क्या देश को जल्द मिलने वाला है नया संसद भवन?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्या देश का मौजूदा संसद भवन जल्द ही किसी नए भवन में चला जाएगा। सुनने में बेशक यह सवाल बड़ा अटपटा लग रहा है लेकिन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के प्रयास रंग लाए तो जल्द ही देश का नया संसद भवन अस्तित्व में आ सकता है।
88 साल पुरानी संसद भवन को सुरक्षित और आने वाले समय के लिए पर्याप्त न मानते हुए स्पीकर ने नए संसद भवन के निर्माण के लिए शहरी विकास मंत्रालय को पत्र लिखकर नई जगह संसद भवन का निर्माण कराने के लिए विचार करने को कहा है।
मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार नए संसद भवन का निर्माण राजपथ पर स्थित वायु भवन के निकट पीछे किसी जगह पर हो सकता है। हालांकि स्पीकर और सरकार की इच्छा है कि नए संसद भवन का निर्माण पुराने वाले भवन के एक किलोमीटर के दायरे में और राजपथ पर ही होना चाहिए। माना जा रहा है कि भाजपा नीत गठबंधन सरकार भी इस प्रस्ताव के समर्थन में है।
बीते दिसंबर में स्पीकर सुमित्रा महाजन ने इस संबंध में शहरी विकास मंत्रालय को पत्र लिखकर 88 साल पुराने भवन पर संकट के लक्षण बताते हुए नए भवन की जरूरत बताई थी। इसमें एक विकल्प यह भी था कि पुराने वाले भवन की जगह ही नए भवन का निर्माण किया जाए जबकि दूसरा विकल्प यह है कि नया भवन राजपथ पर ही कहीं बनाया जाए।
नया भवन बनवाने के पक्ष में हैं स्पीकर सुमित्रा महाजन
मंत्रालय को लिखे पत्र में स्पीकर ने यह जानकारी भी दी थी कि लोकसभा में सांसदों की सीटों में भविष्य में बढोत्तरी भी हो सकती है। फिलहाल इसकी क्षमता 550 सीटों की है जिसे आगे और नहीं बढ़ाया जा सकता।
पुराने भवन का निर्माण ब्रिटिश काल में 1927 में हुआ था, जिसमें एक तय क्षमता के हिसाब से जगह रखी गई थी। लेकिन समय बीतने के साथ ही संसद भवन में सदस्यों की संख्या बढ़ने के साथ ही विभिन्न गतिविधियां भी बढ़ गई हैं।
पीटीआई की खबर के अनुसार पत्र में स्पीकर ने नए भवन को तकनीकी रूप से भी काफी सक्षम बनाए जाने पर जोर दिया है। जिसमें सांसदों को नवीनतम गैजेट को इस्तेमाल करने में सुविधा हो साथ ही लोकसभा की सारी कार्यवाही पूरी तरह कागजविहीन हो। एक प्रस्ताव यह भी है कि पुराने भवन से नए भवन तक एक सुरंग का भी निर्माण किया जाए। नए भवन के निर्माण के बाद पुराने भवन को सांस्कृतिक विरासत के रूप में विकसित किया जाए।