{"_id":"6aae86ee9f4bbdf7a10e86e9","slug":"will-india-become-chip-hub-ashwini-vaishnav-said-youth-will-build-companies-like-qualcomm-intel-2026-09-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारत बनेगा चिप हब?: अश्विनी वैष्णव बोले- युवा खड़ी करेंगे क्वालकॉम-इंटेल जैसी कंपनियां, दुनिया की नजरें हम पर","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
भारत बनेगा चिप हब?: अश्विनी वैष्णव बोले- युवा खड़ी करेंगे क्वालकॉम-इंटेल जैसी कंपनियां, दुनिया की नजरें हम पर
Sat, 19 Sep 2026 06:30 PM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Sat, 19 Sep 2026 06:30 PM IST
सार
भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। पांच इकाइयों में उत्पादन शुरू हो चुका है और कई बड़ी विदेशी कंपनियां निवेश की तैयारी कर रही हैं। अश्विनी वैष्णव को उम्मीद है कि भारत के युवा आने वाले समय में क्वालकॉम और इंटेल जैसी बड़ी कंपनियां खड़ी कर सकते हैं।
विज्ञापन
अश्विनी वैष्णव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारत में सेमीकंडक्टर का कारोबार तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश में पांच सेमीकंडक्टर इकाइयों में उत्पादन शुरू हो चुका है और अरबों डॉलर के निवेश की तैयारी चल रही है। ऐसे में केंद्रीय आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव को भरोसा है कि आने वाले वर्षों में भारत के युवा ऐसी कंपनियां खड़ी कर सकते हैं, जो दुनिया में क्वालकॉम और इंटेल जैसी पहचान बनाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार का जोर सिर्फ चिप बनाने पर नहीं, बल्कि चिप डिजाइन, मशीनरी, कच्चे माल, पैकेजिंग, स्टार्टअप और कुशल लोगों को तैयार करने पर भी है। हालांकि, उन्होंने सेमीकंडक्टर कंपनियों को साइबर हमलों और दूसरे संभावित खतरों से सावधान रहने की भी सलाह दी है।
विज्ञापन
दुनिया का भारत पर बढ़ रहा भरोसा
वैष्णव ने कहा कि पिछले चार-पांच साल में भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को लेकर दुनिया की सोच काफी बदली है। पहले लोग सवाल उठाते थे कि क्या भारत वाकई बड़े स्तर पर सेमीकंडक्टर बना पाएगा। लेकिन अब कई परियोजनाएं निर्माण से आगे बढ़कर टेस्टिंग और उत्पादन तक पहुंच चुकी हैं। यही वजह है कि दुनिया की बड़ी कंपनियां अब भारत में निवेश को लेकर गंभीर हैं। कई कंपनियां अपने भारतीय साझेदार और प्लांट लगाने के लिए जगह तय कर रही हैं। वैष्णव ने बताया कि एक कंपनी के सीईओ ने उनसे यहां तक कहा कि उनके बोर्ड ने भारत में उतना पैसा लगाने की मंजूरी दे दी है, जितना उनकी टीम वास्तव में खर्च कर सकती है।
विज्ञापन
'अभी तो सिर्फ शुरुआत हुई है'
मंत्री ने कहा कि विदेशी कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी सरकार के काम को मिली एक तरह की मंजूरी है, लेकिन इसे मंजिल नहीं समझना चाहिए। सेमीकंडक्टर का कारोबार बहुत मुश्किल और जटिल है। इसमें आगे बढ़ने के लिए लंबे समय तक लगातार मेहनत करनी होगी। धैर्य रखना होगा और छोटी-छोटी चीजों पर भी ध्यान देना होगा। उनका कहना है कि भारत को सिर्फ वही चिप या तकनीक नहीं बनानी है, जो दूसरे देश पहले से बना रहे हैं। देश के युवाओं को ऐसे नए और अलग उत्पाद बनाने होंगे, जिनकी दुनिया भर में जरूरत हो।
विज्ञापन
युवाओं से क्वालकॉम और इंटेल बनाने की उम्मीद
वैष्णव ने युवा उद्यमियों और चिप डिजाइन से जुड़े लोगों से अपनी क्षमता दिखाने की अपील की। उनका मानना है कि अगर भारत के युवा अच्छे और नए उत्पाद तैयार करते हैं, तो दुनिया की कंपनियों को भारतीय सप्लाई चेन का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि आने वाले वर्षों में भारत से क्वालकॉम और इंटेल जैसी कंपनियां निकलेंगी। उनके मुताबिक, जैसे-जैसे युवा पीढ़ी अच्छे उत्पाद बनाने की जिम्मेदारी संभालेगी, भारत में वैश्विक स्तर की सेमीकंडक्टर कंपनियों के बनने की संभावना बढ़ेगी।
सिर्फ चिप नहीं, पूरी सप्लाई चेन बनाने की तैयारी
भारत की योजना सिर्फ चिप बनाने तक सीमित नहीं है। सरकार चिप बनाने वाली मशीनों, कच्चे माल, पैकेजिंग, डिजाइन और सप्लाई चेन से जुड़ी दूसरी जरूरी चीजों को भी देश में विकसित करना चाहती है। 1,27,500 करोड़ रुपये के सेमीकॉन 2.0 कार्यक्रम के तहत सरकार पैसा लगाने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन दे रही है और देश की इंजीनियरिंग क्षमता का इस्तेमाल कर पूरा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने की कोशिश कर रही है। सरकार के मुताबिक, इस योजना के तहत करीब 11-12 अरब डॉलर के निवेश में कंपनियों ने रुचि दिखाई है। अगले दो-तीन साल में इनसे जुड़ी कई परियोजनाएं जमीन पर उतरने की उम्मीद है।
बड़े निवेश के साथ रोजगार बढ़ाने पर भी जोर
सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम में भी भारत को लेकर कंपनियों की दिलचस्पी दिखाई दी। इसमें करीब 600 कंपनियों ने हिस्सा लिया। एप्लाइड मैटेरियल्स ने 2035 तक भारत में 5 अरब डॉलर की योजना बताई है। लैम रिसर्च ने करीब 10,000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स धोलेरा में 363 एकड़ में वेंडर पार्क बनाने की योजना पर काम कर रही है, जबकि फुजीफिल्म 800 करोड़ रुपये का सेमीकंडक्टर सामग्री संयंत्र लगाएगी। वैष्णव के मुताबिक, सरकार कम से कम तीन बड़ी वैश्विक उपकरण कंपनियों और तीन प्रमुख सामग्री कंपनियों को भारत में लाना चाहती है। इसके अलावा 200 चिप डिजाइन स्टार्टअप को फंडिंग दिलाने, एक लाख तकनीशियनों को प्रशिक्षित करने, कॉलेजों में चिप डिजाइन से आगे सिस्टम डिजाइन की पढ़ाई बढ़ाने और एक लाख से ज्यादा रोजगार पैदा करने का लक्ष्य है।
ये भी पढ़ें: एक्सप्लेनर: क्यों हो रही देश में जनसंख्या नियंत्रण की जिद छोड़ने की बात, कैसे बदले आबादी को लेकर हमारे हालात?
साइबर हमलों और दूसरे खतरों से सतर्क रहने की सलाह
वैष्णव ने कहा कि भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के बढ़ने के साथ इसके सामने कुछ नई चुनौतियां भी आ सकती हैं। उन्होंने कंपनियों और डीप-टेक स्टार्टअप को साइबर हमलों, भू-राजनीतिक तनाव और दूसरी तरह की रुकावटों के लिए पहले से तैयार रहने को कहा है। उन्होंने बताया कि दक्षिण कोरिया, जापान और सिंगापुर जैसे देशों की कंपनियां भी भारत में निवेश और कारोबार बढ़ाने में दिलचस्पी दिखा रही हैं। वैष्णव के मुताबिक, भारत में उत्पादन शुरू कर चुकी पांच सेमीकंडक्टर इकाइयां वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं और जापान, यूरोप तथा अमेरिका जैसे बाजारों में निर्यात भी कर रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि दुनिया में टिकने के लिए भारत को कम लागत पर अच्छी गुणवत्ता वाले चिप और दूसरे सेमीकंडक्टर उत्पाद बनाने होंगे।