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जम्मू-कश्मीर: अनुच्छेद 370 हटने के बाद सिर्फ दो ही बाहरी लोगों ने क्यों खरीदी जमीन? छह पॉइंट में समझिए पूरा मामला
Wed, 11 Aug 2021 09:38 AM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Wed, 11 Aug 2021 09:38 AM IST
सार
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में मंगलवार को बताया था कि जम्मू और कश्मीर सरकार द्वारा प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, केंद्रशासित प्रदेश में बाहर के दो व्यक्तियों ने ही अगस्त 2019 से अब तक संपत्तियां खरीदी हैं।
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लाल चौक
- फोटो : PTI
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विस्तार
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में बताया कि जम्मू-कश्मीर के बाहर के केवल दो व्यक्तियों ने ही अब तक केंद्रशासित प्रदेशों में संपत्तियां खरीदी हैं। उन्होंने मंगलवार को एक प्रश्न के एक लिखित उत्तर में जम्मू-कश्मीर सरकार के हवाले से यह बड़ी जानकारी दी थी। बता दें कि जम्मू-कश्मीर में अब जमीन खरीदने में बाहरी लोगों या सरकार को किसी तरह की कठिन प्रक्रियाओं का सामना नहीं करना पड़ रहा है। यहां पांच अगस्त 2019 को विशेष अधिकार देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 और 35-a को खत्म कर दिया गया था।
जानिए इसके छह अहम कारण
1. जब जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद नए भूमि खरीद कानून बने, तो जम्मू-कश्मीर में भाजपा नेताओं सहित अधिकांश लोगों ने इसका पुरजोर विरोध किया।
2. नए कानूनों में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर के बाहर के लोग अभी भी कृषि भूमि नहीं खरीद सकते हैं।
3. जम्मू-कश्मीर में कानून-व्यवस्था की स्थिति में केंद्र सरकार की अपेक्षाओं के अनुरूप सुधार नहीं हुआ है। खासकर कश्मीर में हालात ज्यादा चिंताजनक हैं। अशांत क्षेत्रों में कोई भी संपत्ति खरीदना नहीं चाहता है।
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4. उद्योगपति जम्मू-कश्मीर में निवेश करने के लिए इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि उन्हें वहां कोई फायदा नहीं दिख रहा है।
5. कश्मीर में आतंकवाद और अनिश्चितता का डर इसकी बड़ी वजह बताई जा रही है।
6. कोरोनावायरस महामारी और लॉकडाउन की वजह से भी लोग अभी घाटी का रुख नहीं कर रहे हैं।
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जानिए इसके छह अहम कारण
1. जब जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद नए भूमि खरीद कानून बने, तो जम्मू-कश्मीर में भाजपा नेताओं सहित अधिकांश लोगों ने इसका पुरजोर विरोध किया।
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2. नए कानूनों में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर के बाहर के लोग अभी भी कृषि भूमि नहीं खरीद सकते हैं।
3. जम्मू-कश्मीर में कानून-व्यवस्था की स्थिति में केंद्र सरकार की अपेक्षाओं के अनुरूप सुधार नहीं हुआ है। खासकर कश्मीर में हालात ज्यादा चिंताजनक हैं। अशांत क्षेत्रों में कोई भी संपत्ति खरीदना नहीं चाहता है।
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4. उद्योगपति जम्मू-कश्मीर में निवेश करने के लिए इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि उन्हें वहां कोई फायदा नहीं दिख रहा है।
5. कश्मीर में आतंकवाद और अनिश्चितता का डर इसकी बड़ी वजह बताई जा रही है।
6. कोरोनावायरस महामारी और लॉकडाउन की वजह से भी लोग अभी घाटी का रुख नहीं कर रहे हैं।
बीते दिन लोकसभा में गृह राज्य मंत्री ने और क्या कहा था
- एक अन्य सवाल के लिखित जवाब में गृह राज्य मंत्री ने बताया था कि यह राज्य सीमापार से समर्थित व प्रायोजित आतंकवाद से प्रभावित है। 1989 में राज्य में आतंकवाद की शुरुआत के बाद से 5 अगस्त 2019 तक आतंकी घटनाओं में 5886 सुरक्षाकर्मी मारे गए।
- गृह राज्य मंत्री ने बताया था कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार, यूएपीए के तहत दर्ज मामलों की संख्या वर्ष 2017 में 901 थी, जोकि वर्ष 2019 में बढ़कर 1226 हो गई है। इसके अलावा गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या वर्ष 2017 में 1554 थी, जोकि वर्ष 2019 में बढ़कर 1948 हो गई है।