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कश्मीर में सेना: अटकलों का बाजार गर्म, धारा 377 ए हटाने से लेकर अलग राज्य गठन की अफवाह

Sat, 03 Aug 2019 12:28 AM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nilesh Kumar Updated Sat, 03 Aug 2019 12:28 AM IST
सार

  • सुरक्षा बलों की तैनाती के बाद से ही प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल तेज
  • सोशल मीडिया पर सेना की तैनाती को लेकर अटकलों और अफवाहों का बाजार गर्म
  • क्या जम्मू-कश्मीर से धारा 377 और 35 ए हटाए जाने को लेकर हो रहा ये सब?

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Why massive deployment of army in Jammu Kashmir, Rumors on Social media gone viral 35 A & 377
भारतीय सेना (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के नाते सरकार की ओर से एडवायजरी जारी होने और सुरक्षा बलों की तैनाती के बाद से ही प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। वहीं दूसरी ओर व्हाट्सएप, फेसबुक से लेकर ट्वीटर और दूसरे सोशल मीडिया के मंचों पर भी सेना की तैनाती को लेकर अटकलों और अफवाहों का बाजार गर्म है। लोग अपने-अपने हिसाब से कयास लगा रहे हैं। किसी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर से धारा 377 और 35 ए हटाए जाने को लेकर ये सब हो रहा है तो कोई अलग राज्य गठन की अफवाह को सच बता रहा है।

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क्यों शुरू हुईं यह अटकलें और अफवाहें
दरअसल जम्मू-कश्मीर में 22 नवंबर 2018 से राज्यपाल शासन लगा हुआ है। ऐसे में अमरनाथ यात्रा पर आतंकी खतरे की खुफिया सूचना के बाद प्रदेश सरकार की ओर से शुक्रवार को अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों के लिए एडवाइजरी जारी की गई। राज्य प्रशासन की ओर से पाक आतंकी हमले के अंदेशे पर अमरनाथ यात्रियों से घाटी छोड़ने की अपील की गई है।
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प्रदेश के प्रधान सचिव (गृह विभाग) के सुरक्षा परामर्श में श्रद्धालुओं और पर्यटकों से 'यात्रा की अवधि कम करने' और 'जल्द से जल्द लौटने' को कहा गया है। बता दें, प्रदेश में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती पहले से ही जारी थी। अब तक कुल 380 कंपनियां भेजी जा चुकी हैं।  
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आर्टिकल 35-A और 370 को खत्म करने की तैयारी की अफवाह

जम्मू-कश्मीर में 38 हजार अतिरिक्त जवानों को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तैनात किया जा रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार 2018 से लेकर अब तक राज्य में तैनात केंद्रीय अर्धसैनिक कर्मियों की संख्या बढ़कर 75,000 हो गई है। इतनी बड़ी संख्या में सेना की तैनाती को आर्टिकल 35-A और 370 को खत्म करने से जोड़कर देखा जा रहा है, सोशल मीडिया पर इससे जुड़े संदेश एक-दूसरे को भेज रहे हैं। जबकि केंद्र सरकार ने इन अटकलों-अफवाहों को खारिज किया है। 

संविधान का अनुच्छेद 35ए और 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करता है। सेना की तैनाती को लेकर पहली प्रतिक्रिया 35ए और 370 के हनन को लेकर आई। ऐसी चर्चा इसलिए भी हो रही है, क्योंकि 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा के घोषणा पत्र में जम्मू कश्मीर अहम मुद्दे के तौर पर शामिल था।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि केंद्र सरकार के फैसले जम्मू कश्मीर में भय का माहौल बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के बीच यह चिंता है कि सरकार अनुच्छेद 35ए और 370 को खत्म करने का इरादा रखती है।

उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर लिखा

कश्मीर में ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है कि सेना और वायु सेना को अलर्ट जारी कर दिया गया? यह 35ए या परिसीमन से संबंधित नहीं है। ऐसा अलर्ट, अगर सच में जारी हुआ है तो, किसी अलग ही स्थिति के लिए होगा।


उमर अब्दुल्ला के इस ट्वीट के बाद से सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों में एक बात यह भी शामिल है कि भारत सरकार सेना को इस वजह से अलर्ट किए हुए है ताकि वह पीओके के कुछ हिस्से को छोड़कर बाकी बचे बड़े हिस्से को स्वतंत्र राज्य घोषित कर दे या फिर नए सिरे से पूरे राज्य में परिसीमन लागू कर दिया जाए।

वहीं दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यह समय हमारे लिए जीने और मरने का है। राज्य पुलिस को किनारे करते हुए केंद्रीय बलों को यहां लाया जा रहा है। भाजपा के इस कदम से अनुच्छेद 35-ए को हटाए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। 

लाल किले की बजाय कश्मीर में तिरंगा फहरा सकते हैं पीएम मोदी !

Why massive deployment of army in Jammu Kashmir, Rumors on Social media gone viral 35 A & 377

सोशल मीडिया पर एक चर्चा इस बात की भी हो रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार स्वतंत्रता दिवस पर अब तक के इतिहास को बदल सकते हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि पीएम मोदी 15 अगस्त को लाल किले के बजाय कश्मीर से राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहरा सकते हैं।

मोदी सरकार को परंपराओं को तोड़ने वाले ऐसे कई फैसलों के बारे में जाना जाता है। जैसे कि 2017 के बजट पेश करने की तारीख को बदल दिया गया। साथ ही अलग से पेश किए जाने वाले रेल बजट को मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में मुख्य बजट में मिला दिया था। 

वहीं, मोदी सरकार 2.0 का पहला बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'वीआईपी कल्चर' को खत्म किया और लाल कपड़े में बजट की फाइलें लेकर संसद पहुंचीं। खैर, पीएम मोदी के कश्मीर में तिरंगा फहराए जाने की तैयारी को लेकर कोई पुष्ट संकेत नहीं हैं। 

विधानसभा चुनाव की बड़ी तैयारी तो नहीं! 

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी जैसे राजनीतिक दल विधानसभा चुनाव की मांग करते आ रहे हैं। यहां राज्यपाल ने पिछले साल 22 नवंबर को सदन भंग कर दिया था। इस बीच भाजपा की जम्मू और कश्मीर इकाई ने संकेत दिया है कि राज्य के चुनाव की तैयारी को लेकर घाटी में बड़े पैमाने पर सेना की तैनाती की जा रही है। 

इस बीच एक और अटकल पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थियों को वोटिंग का अधिकार देने को लेकर भी तैर रही है। कश्मीरियों के एक वर्ग की लंबे समय से मांग रही है कि पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थियों को मतदान का अधिकार दिया जाए।

सेना और अधिकारियों ने बताई ये वजह

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press conference - फोटो : ANI

शुक्रवार को श्रीनगर में हुई सेना की प्रेस कांफ्रेंस में अमरनाथ यात्रा पर खतरे की आशंका और आतंकियों की साजिश का खुलासा किया गया। सेना की 15वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने श्रीनगर में कहा कि अमरनाथ यात्रा मार्ग पर सेना को भारी मात्रा में हथियारों का जखीरा मिला है जिसमें अमेरिकी एम-24 स्नाइपर राइफल भी शामिल है। 
इधर, कश्मीर के आईजी एसपी पाणि ने कहा कि घाटी में ज्यादातर पुलवामा और शोपियां के इलाकों में आईईडी विस्फोट करने के 10 से अधिक गंभीर प्रयास किए गए थे। वहीं, डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा है कि आतंकियों की ओर से हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी के इनपुट मिले हैं। इस वजह से जमीनी स्तर पर काउंटर इंटेलिजेंस ग्रिड को और मजबूत किए जाने की जरूरत है।

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