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BJP: चुनाव की घोषणा से पहले ही क्यों चेहरे पहचानने में जुटी भाजपा, मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में बना हुआ है ये संकट
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चेहरे पहचानने में जुटी भाजपा
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अमर उजाला
विस्तार
साल के अंत में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। इसे लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी सिलसिले में बुधवार शाम को पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई। समिति ने मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ की चुनावी रणनीति और तैयारियों का जायजा लिया। करीब चार घंटे चली इस बैठक में छत्तीसगढ़ को लेकर दो घंटे और मध्यप्रदेश को लेकर डेढ़ तक मंथन चला।
केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद फिर पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की लगभग डेढ़ घंटे बैठक हुई। भाजपा के चुनावी इतिहास में यह पहला मौका है, जब पार्टी चुनाव की घोषणा से पहले ही उम्मीदवारों के चयन में जुट गई है।
अमर उजाला को पार्टी के विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में दोनों राज्यों के नेतृत्व ने अपने-अपने फीडबैक केंद्रीय नेतृत्व को दिए। पार्टी उन सीटों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जहां उसे मजबूत विरोध का सामना करना पड़ता है। केंद्रीय चुनाव समिति का मानना है कि, वह मजबूत उम्मीदवारों के चयन सहित कुशल रणनीति से चुनाव की परिस्थिति को बदल सकती है। सूत्रों का कहना है कि पिछले चार चुनाव में जिन सीटों पर पार्टी प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा है, उन सीटों पर सितंबर में उम्मीदवार की घोषणा करने पर विचार किया गया। टिकट वितरण के अलावा सीटों के समीकरण, विधायकों और नेताओं के परफार्मेंस पर भी चर्चा हुई।
मध्य प्रदेश को लेकर यह हुई चर्चा
केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में मध्य प्रदेश से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, संगठन महामंत्री हितानंद और नरेंद्र सिंह तोमर के साथ प्रदेश चुनाव प्रभारी व सह प्रभारी शामिल हुए। प्रदेश के नेताओं ने चुनाव समिति के समक्ष प्रदेश की हारी हुई सीटों का ब्योरा रखा। इसके बाद तय हुआ कि प्रदेश नेतृत्व जल्द से जल्द इन 40 से 50 सीटों पर दो से तीन नाम का पैनल बनाएगा। भाजपा इस बार सितंबर में ही हारी हुई सीटों के प्रत्याशी तय कर देगी, ताकि उन्हें प्रचार का वक्त मिले।
सूत्रों का कहना है कि, प्रदेश नेताओं ने ऐसी विधानसभाओं का चयन किया है, जिनमें पार्टी को पिछले तीन या चार या इससे अधिक बार हार का सामना करना पड़ा है। इसी बीच कुछ और घोषणाएं करने के लिए प्रदेश नेतृत्व ने केंद्रीय संगठन से स्वीकृति मांगी है। मध्य प्रदेश में कुल 103 आकांक्षी सीट हैं जहां पिछली बार बीजेपी चुनाव हार गई थी। इसके अलावा 22 ऐसी सीटें हैं, जिस पर पार्टी का जीत का मार्जिन एक हजार से कम था।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव ने मध्यप्रदेश में चुनावी तैयारी पर एक समीक्षा रिपोर्ट भी चुनाव समिति के सामने रखी। इस रिपोर्ट में कार्यकर्ताओं की भावना, चुनाव की दृष्टि से सूबे में प्रभावी राज्य सरकार की योजनाएं और मुद्दे, चुनावी प्रबंधन जैसे विषयों पर जानकारी शामिल है। बैठक में पार्टी की आंतरिक सर्वे रिपोर्ट्स भी चर्चा हुई। इसमें यह बताया गया है कि भाजपा संगठन और केंद्र सरकार को लेकर जनता में नाराजगी नहीं है। लेकिन लंबे समय से सत्ता में रहने की वजह से समर्थकों और कोर वोटर्स में उदासीनता है। बैठक में इस उदासीनता को दूर करने के कदमों पर भी चर्चा की गई।
छत्तीसगढ़ की सीटों को बांटा गया 4 हिस्सों में
केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में छत्तीसगढ़ की कमजोर सीटों पर विस्तार से चर्चा हुई और उन्हें जीतने की रणनीति पर विचार किया गया। इस बैठक में प्रदेश की सभी 90 सीटों को चार श्रेणी ए, बी, सी और डी में बांटा गया है। ए श्रेणी में वे सीटें हैं, जिन्हें भाजपा ने हर बार जीता है। बी-कैटेगरी में वे सीटें हैं, जिन पर भाजपा की जीत-हार दोनों हुई है। सी-श्रेणी की सीटों पर भाजपा कमजोर है। वहीं डी श्रेणी की सीटों पर भाजपा कभी नहीं जीत सकी है।
बैठक में बी और सी की 22 और डी श्रेणी की पांच सीटों पर चर्चा हुई। इस बंटवारे से कमजोर सीटों पर पार्टी ज्यादा फोकस दे सकेगी। बैठक में इन 27 सीटों पर उम्मीदवारों के पैनल के अलावा स्थानीय मुद्दों को लेकर भी चर्चा की गई। हर सीट पर जातिगत समीकरण को ध्यान में रखकर जिताऊ उम्मीदवारों के नामों पर भी चर्चा की गई है, लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि इन उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कब की जाएगी। पार्टी इस बार आधी सीटों पर नए उम्मीदवारों को मौका देने पर विचार कर रही है।
गौरतलब है कि 2018 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। तब बीजेपी को 90 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 15 पर जीत मिली थी, जबकि कांग्रेस ने राज्य के चुनावी इतिहास में सबसे ज्यादा 68 विधानसभा सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। हालांकि, उसके तुरंत बाद हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने जबरदस्त वापसी करते हुए 11 सीटों में से 9 सीटें जीती थीं।