भारत में सरोगेसी पर लगाम क्यों जरूरी?
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केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को सरोगेसी रेगुलेशन बिल 2016 पर मोहर लगा दी। इसमें किराये की कोख वाली मां के अधिकारों की रक्षा के उपाय किए गए हैं तथा इस तरह के बच्चों के अभिभावकों को कानूनी मान्यता देने का प्रावधान है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रस्ताव के अनुसार किराये की कोख मसौदा विधेयक 2016 का लक्ष्य देश में किराये की कोख संबंधी प्रक्रिया के नियमन को समुचित ढंग से अंजाम देना है। कमर्शियल सरोगेसी कई देशों में बैन है जिसमें ऑस्ट्रेलिया,यूके,कैनेडा, फ्रांस,जर्मनी,स्वीडन,न्यूजीलैंड,जापान और थाईलैंड शामिल हैं।
भारत में इसके लिए कोई ठोस कानून नहीं है। सरकार ने हाल में स्वीकार किया था कि वर्तमान में किराये की कोख संबंधी मामलों को नियंत्रित करने के लिए कोई वैधानिक तंत्र नहीं होने के चलते ग्रामीण एवं आदिवासी इलाकों सहित विभिन्न क्षेत्रों में किराये की कोख के जरिए गर्भधारण के मामले हुए, जिनमें शरारती तत्वों द्वारा महिलाओं के संभावित शोषण की आशंका रहती है।
सूत्रों ने बताया कि महिलाओं विशेषकर ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की महिलाओं के शोषण को रोकने के लिए सरकार ने विदेशियों के लिए देश में किराये की कोख की सेवाएं लेने पर प्रतिबंध का प्रावधान विधेयक में किया है।
किराए की कोख
दुनियाभर में करीब 10 लाख निसंतान दंपति हैं जिस वजह से लोग भारत और थाईलैंड किराए की कोख लेने के लिए जाते हैं। इस कारण दुनियाभर में ये दो देश कमर्शियल सरोगेसी का गढ़ बन गए हैं। हजारों निसंतान दंपत्ति गरीब महिलाओं को पैसे देकर नौ महीनों के लिए उनकी कोख किराए पर लेते हैं।
भारत में इसे बैन करने पर 2014 से विचार चल रहा है क्योंकि ऑस्ट्रेलियाई दंपत्ति जुड़वा बच्चों में से लड़की लेकर चला गया था और लड़के को भारत में ही छोड़ गया था।
नए बिल के अनुसार अब अगर कोई दंपत्ति बच्चे को छोड़ता है तो 10 साल जेल और 10 लाख के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही डॉक्टर भी अब सरोगेट मां के साथ इलाज में कोताही नहीं बरत पाएंगे।
प्रो-वुमेन लॉ
नए बिल के प्रावधानों के अनुसार एक मां तभी सरोगेसी कर सकेगी जब वह पैसे नहीं लेगी। जानकार इस प्रावधान में खामी बता रहे हैं,उनका कहना है कि लोग पैसे लेकर कोख किराए पर देने के मामलों को भी छुपा लेंगे और ये कारोबार चलता रहेगा।
हालांकि इस बिल के प्रावधान के अनुसार एक मां एक ही बार सरोगेट मां बन सकेगी। डॉक्टर इस कदम को अच्छा फैसला मान रहे हैं। वहीं सरोगेसी से पैसे कमाने वाली महिलाएं इससे खफा हैं उनका कहना है कि वह अगर अपनी कोख किराए पर देकर पैसे कमा रही हैं तो इसमें गलत क्या है?
भारतीयों के बना कानून
नए बिल प्रावधान के अनुसार वहीं दंपत्ति सरोगेसी के सहारे बच्चे पा सकते हैं जिनकी शादी को पांच साल हो चुके हों और उनके कोई संतान भी न हो।
वहीं इस कानून के आने के बाद आईवीएफ सेंटर चलाने वाले डॉक्टरों की परेशानी बढ़ गयी है। क्योंकि ज्यादातर विदेशी दंपत्ति ही भारत आते हैं जिससे विदेशी मुद्रा देश में आती है।