आखिर अन्नदाता बार-बार गुस्सा क्यों होते हैं? ये हैं इसके पीछे के प्रमुख कारण
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देशभर में किसानों की स्थिति बिल्कुल दयनीय है। अपनी मांगों को लेकर वो बार-बार सड़कों पर उतरते हैं और बार-बार उन्हें बस आश्वासन दे दिया जाता है। और वो भी इतने भोले हैं कि तुरंत अपना आंदोलन खत्म कर घर चले जाते हैं। आखिर वो भी करें तो क्या करें? उनके भी परिवार हैं। अगर वो अपने घर को ना लौटें तो उनके परिवार को तो रात-दिन खाली पेट ही बिताने पड़ेंगे। हाल ही में महाराष्ट्र में किसानों का एक बड़ा आंदोलन हुआ था और फिर जल्द ही खत्म भी हो गया था। अब सबसे बड़ा सवाल येे है कि आखिर किसान बार-बार क्यों गुस्सा हो जा रहे हैं और अपनी खेती-बारी छोड़कर सड़कों पर उतर जा रहे हैं, जबकि सरकार उनकी कई बातें मानती भी है।
बता दें कि देशभर में मौजूद किसानों की तीन ऐसी प्रमुख समस्याएं हैं, जिससे वो हमेशा जूझते रहते हैं। पहली ये कि उन्हें फसलों के उत्पादन में ज्यादा खर्च करना पड़ता है और उस हिसाब से उन्हें उसके दाम भी नहीं मिलते हैं। दूसरी ये कि वो कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं और ऊपर से खेती करने में उन्हें कई तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है, जैसे- कभी सूखा पड़ गया तो कभी बाढ़ आ गई। इनके उनके फसलों को काफी नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा तीसरी सबसे बड़ी परेशानी ये है कि उन्हें फसल के उत्पादन का सही मूल्य नहीं मिल पाता। हालांकि अलग-अलग राज्यों में किसानों की ये परेशानी अलग-अलग है।
हरियाणा
हरियाणा की अगर बात करें तो अन्य राज्यों की अपेक्षा यहां के किसान कम आय, आलू, टमाटर और दालों में नुकसान की समस्या से जूझ रहे हैं। इसके अलावा राज्य के कई इलाकों में पानी की कमी की समस्या भी, जिससे किसानों की लागत बढ़ जाती है। ये भी एक बड़ी समस्या है।
राजस्थान
रेगिस्तानी राज्य होने के बावजूद राजस्थान देशभर में बाजरे का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। इसके अलावा वहां भी सरसों और मसालों का उत्पादन भी भारी मात्रा में होता है। हालांकि यहां कृषि आय हमेशा अस्थिर होती रही है। कभी फसलों के सही दाम मिल जाते हैं तो कभी कीमतें अचानक घट जाती हैं।
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में किसानों की सबसे बड़ी समस्या चीनी मिलों से बकाया भुगतान की है, जो अब तक नहीं की गई है और इसका सीधा असर गन्ने की खेती पर भी पड़ता है। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 1 जून तक गन्ना किसानों का बकाया लगभग 12,000 करोड़ रुपये है। अपने बकाया भुगतान के लिए यहां के किसान हमेशा आंदोलन करते रहते हैं, लेकिन फिर भी हालत जस की तस है।
मध्य प्रदेश
2000-01 और 2014-15 के बीच मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र में काफी उछाल आया है। इस दौरान किसानों की आय में भी वृद्धि हुई है। बता दें कि प्रति व्यक्ति देश की मासिक आय 6,426 रुपये है और इन सालों के दौरान मध्य प्रदेश में किसानों की प्रति व्यक्ति मासिक आय इससे थोड़ा ही कम 6,210 रुपये थी। लेकिन इसके बावजूद यहां बड़ी तादाद में किसान आत्महत्या करते हैं और इसका सबेस बड़ा कारण है कर्ज, जो वो चुका नहीं पाते।
महाराष्ट्र
55 फीसदी ग्रामीण आबादी के साथ महाराष्ट्र देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। बता दें कि इस राज्य का एक बड़ा हिस्सा सूखाग्रस्त है, जबकि बाकी जगहों पर जो खेती होती है, उसका सही मूल्य किसानों को मिलता ही नहीं है। यहां भी किसानों के ऊपर भारी कर्ज है। यही कारण है कि यहां किसान हमेशा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले रहते हैं।
कर्नाटक
तमिलनाडु
कर्नाटक की तरह ही तमिलनाडु भी पिछले कुछ समय से सूखे से ग्रसित है। साल 2016 में यहां भयंकर सूखा पड़ा था, जिससे अब तक किसान उबर नहीं पाए हैंं। सूखे की वजह से यहां किसानों की आय में भारी कमी आई है और उनके ऊपर कर्ज का बोझ बढ़ गया है।