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RSS में बगावत!: संघ के पूर्व प्रचारक होने का दावा करने वाले इन नेताओं ने क्यों बनाई नई पार्टी?, जानें सबकुछ
Tue, 12 Sep 2023 05:57 PM IST
शिव शरण शुक्ला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 12 Sep 2023 05:57 PM IST
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
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विस्तार
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) बहुत अनुशासित संगठन माना जाता है। कहा जाता है कि संघ के स्वयं सेवक कभी संगठन की विचारधारा नहीं छोड़ते और एक बार संघ से जुड़ने के बाद पूरे जीवन भर संघ के उद्देश्यों के लिए कार्य करते रहते हैं। संघ के प्रति इस मजबूत धारणा के बाद भी तीन ऐसे नेताओं ने एक नया राजनीतिक दल जनहित पार्टी बना लिया जो यह दावा करते हैं कि वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं। तो क्या संघ में भी वैचारिक मतभेद सतह पर आने लगे हैं और उसके कार्यकर्ता भी संगठन की विचारधारा से अलग पार्टी बनाने लगे हैं।
कौन हैं पार्टी बनाने वाले नेता
अभय जैन और मनीष काले वे व्यक्ति हैं जिन्होंने इसी साल के अंत में होने वाले मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पूर्व नए राजनीतिक दल का गठन किया है। इनका दावा है कि वे पूर्व में संघ के कार्यकर्ता रहे हैं। अभय जैन का दावा है कि 2007 में उन्होंने संघ छोड़ दिया था तो इस राजनीतिक दल में शामिल कुछ लोग स्वयं को अभी भी संघ का कार्यकर्ता बता रहे हैं। जैन ने दावा किया है कि उनका नया राजनीतिक दल जनहित पार्टी लोकतंत्र के उन मूल सिद्धांतों के प्रति काम करेगी जिसे भाजपा, कांग्रेस सहित तमाम दलों ने त्याग दिया है। जनहित पार्टी के नेताओं ने शिक्षाा, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए काम करने की बात कही है।
चूंकि, इस समय मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है, माना जा रहा है कि उसको निशाना बनाने के लिए ही इस नए राजनीतिक दल का गठन किया गया है। यह भाजपा पर दबाव बनाकर चुनाव से पहले कुछ बेहतर पाने की रणनीति भी हो सकती है। इस संगठन में शामिल हुए कुछ लोगों पर गंभीर विवादित आरोप भी लगे हैं, ऐसे में इस राजनीतिक दल के गठन को लेकर तमाम आशंकाएं जाहिर की जा रही हैं।
हालांकि, नए राजनीतिक दल के गठन के बाद भी इन नेताओं ने संघ की विचारधारा या उसके वर्तमान नेतृत्व पर कोई आक्रमण नहीं किया है। उनका कहना है कि भाजपा पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सिद्धांतों से भटक गई है। वे अपने नए दल के जरिए उन उद्देश्यों को प्राप्त करने की कोशिश करेंगे जिसके लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने सपना देखा था।
कोई अस्तित्व नहीं
राजनीतिक विश्लेषक सचिन ने कहा कि इस नए राजनीतिक दल के गठन को आरएसएस के पूर्व कार्यकर्ताओं के द्वारा नये राजनीतिक दल का गठन नहीं कहा जाना चाहिए। संघ अपने आदर्श में किसी राजनीतिक दल के लिए प्रतिबद्ध नहीं है। वरिष्ठ संघ नेता राम माधव ने तो यहां तक कह दिया था कि उनके प्रचारक-कार्यकर्ता किसी भी राजनीतिक दल में कार्य करने के लिए स्वतंत्र होते हैं। यदि कांग्रेस भी चाहे तो वे अपने स्वयं सेवक उन्हें उपलब्ध करा सकते हैं। लेकिन संघ कार्यकर्ता केवल अपनी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध होते हैं और इससे वे कभी समझौता नहीं करते। उन्होंने कहा कि इस अर्थ में इसे संघ से बगावत नहीं करार दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चुनाव के दौर में इस तरह के अनेक दल गठित होते रहते हें और चुनाव के बाद वे गायब भी हो जाते हैं। कई राजनीतिक दल केवल चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपना नाम अंकित कराने और उससे टैक्स या अन्य लाभ लेने के लिए गठित किए जाते हैं। इसलिए जब तक किसी लोकप्रिय चेहरे के द्वारा एक सुगठित प्रयास नहीं किया जाता, तब तक इसे गंभीरता से नहीं लिया जाएगा।