फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   why did Eknath Shinde suddenly take a rebellious stand from the party

Eknath Shinde: शिवसेना सरकार पर संकट, एकनाथ शिंदे ने अचानक पार्टी से क्यों अख्तियार कर लिया बगावती रूख?

Tue, 21 Jun 2022 11:25 PM IST
अमित शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: अमित शर्मा Updated Tue, 21 Jun 2022 11:25 PM IST
सार

एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र में शिवसेना के विधानसभा चुनाव की पूरी कमान संभाली थी। किस विधानसभा सीट पर कौन उम्मीदवार जिताऊ हो सकता है, और वहां से जीत के लिए पार्टी के क्या समीकरण हो सकते हैं, यह पूरी रणनीति बनाने का काम एकनाथ शिंदे ने किया था।

विज्ञापन
why did Eknath Shinde suddenly take a rebellious stand from the party
एकनाथ शिंदे - फोटो : पीटीआई

विस्तार

उद्धव ठाकरे सरकार के कैबिनेट मंत्री एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को अचानक बगावती रूख अपनाकर सरकार के भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया है। यदि वह शिवसेना के 26 विधायक पार्टी से अलग होकर भाजपा के साथ जाने का फैसला कर लेते हैं तो भाजपा निर्दलीयों के समर्थन से राज्य में सरकार बनाने की स्थिति में आ सकती है। बड़ा प्रश्न है कि बालासाहब ठाकरे के जमाने से शिवसेना के कट्टर समर्थक रहे एकनाथ शिंदे ने अचानक पार्टी से बगावती रूख क्यों अख्तियार कर लिया? क्या यह आदित्य ठाकरे से उनकी नाराजगी का परिणाम है?
विज्ञापन


एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र में शिवसेना के विधानसभा चुनाव की पूरी कमान संभाली थी। किस विधानसभा सीट पर कौन उम्मीदवार जिताऊ हो सकता है, और वहां से जीत के लिए पार्टी के क्या समीकरण हो सकते हैं, यह पूरी रणनीति बनाने का काम एकनाथ शिंदे ने किया था। कहा जाता है कि बाला साहब ठाकरे के गुजरने के बाद वे उद्धव ठाकरे के सबसे करीबी सहयोगी बनकर उभरे थे। उनकी इसी वफादारी का ईनाम उन्हें महाराष्ट्र सरकार में प्रमुख मंत्रालय के रूप में दिया गया था।
विज्ञापन


लेकिन कहा जा रहा है कि ठाणे और संभाजीनगर की एरिया में बहुत प्रभावशाली नेता के रूप में उभरे एकनाथ शिंदे के मंत्रालय के कामकाज में उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ठाकरे की बहुत ज्यादा दखल हुआ करती थी। एकनाथ शिंदे जैसे कद्दावर नेता के मंत्रालय के हर कामकाज की फाइल पर आदित्य ठाकरे की कड़ी नजर रहती थी। कोई तबादला तक आदित्य ठाकरे की सहमति के बिना नहीं हो सकता था।
विज्ञापन
विज्ञापन


एकनाथ शिंदे ने इस पर अपनी गहरी नाराजगी उद्धव ठाकरे के सामने व्यक्त की थी। लेकिन उद्धव ठाकरे की तरफ से इस पर कोई पहल नहीं की गई। इस मामले पर दोनों नेताओं के बीच मतभेद बढ़ते चले गए जो राज्यसभा चुनाव और एमएलसी चुनाव में शिवसेना की पराजय का कारण तक बने। लेकिन इसके बाद भी उद्धव ठाकरे ने समय रहते इस पर कोई उपयुक्त कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं समझी जिससे हालात बिगड़ते चले गए।

सरकार में आपसी तालमेल की कमी भी भाजपा को राज्य में दुबारा अवसर बनाने की राह बना सकती है। बताया जाता है कि सरकार और सहयोगी दलों में भी आपसी तालमेल की काफी कमी है। शरद पवार को छोड़ दें तो सरकार और कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेताओं के बीच भी तालमेल की भारी कमी है। महाराष्ट्र विकास अघाड़ी के नेताओं की शिकायत है कि उनकी ही सरकार में उनकी बात नहीं सुनी जा रही है। इससे सहयोगी दलों के नेताओं में भी सरकार के कामकाज को लेकर गहरी असहमति है।


भाजपा के पास क्या विकल्प

भाजपा इसके पहले भी राज्य में सत्ता बनाने का खेल खेल चुकी है जिसमें उसे करारी हार का सामना करना पड़ा था। लिहाजा इस बार पार्टी कोई जल्दीबाजी करने के मूड में नहीं है। वह पहले एकनाथ शिंदे प्रकरण का पूरा परिणाम सामने आने देना चाहती है। एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे में बातचीत कराने की कोशिश हो चुकी है, यदि इसके बाद भी दोनों नेताओं के बीच कोई रास्ता नहीं निकलता है तब भाजपा उपलब्ध परिस्थितियों में अपनी भूमिका तलाशेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed