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दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली करने की हिम्मत क्यों नहीं जुटा सके अरविंद केजरीवाल?
Wed, 13 Feb 2019 08:45 PM IST
Amit Digital
अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली
Published by: Amit Digital
Updated Wed, 13 Feb 2019 08:45 PM IST
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दिल्ली में सत्ता संभाले आम आदमी पार्टी सरकार को लगभग चार साल बीत चुके हैं। कुछ ही दिनों में लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में जनता के सामने पार्टी की ताकत दिखाने के लिए अरविंद केजरीवाल के सामने यह एक बेहतर मौका था। लेकिन ऐसे मौके पर भी अरविंद केजरीवाल दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली आयोजित नहीं कर सके। केंद्र के खिलाफ उन्होंने जंतर-मंतर पर रैली आयोजित की जिसमें बमुश्किल चार हजार लोगों की भीड़ ही जुटी। उनकी रैली में दिग्गज नेताओं के जोरदार भाषण तो जरुर सुनाई पड़े लेकिन उनकी रैलियों में हमेशा दिखने वाला वह जोश नदारद दिखा जो उनकी रैलियों की पहचान हुआ करता था।
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'मोदी दिल्ली के लिए तू तो हानिकारक है'
अरविंद केजरीवाल की रैलियों में देशभक्ति गाने एक खास पहचान हुआ करते थे। देशभक्ति गानों की धुन पर लहराते तिरंगे से कार्यकर्ताओं में जान पड़ जाती थी और इसका एक बेहतर संदेश जाता था। लेकिन 13 फरवरी की अरविंद केजरीवाल की रैली के लिए आम आदमी पार्टी ने आमिर खान की फिल्म 'दंगल' के गाने का सहारा लिया। नेताओं के भाषणों के बीच-बीच में 'मोदी दिल्ली के लिए तू तो हानिकारक है' गाना बजता दिखा। पूरे गाने में केंद्र सरकार के फैसलों की आलोचना सुनाई पड़ती रही।
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ममता के भाषण में भी दिखा कम भीड़ का दर्द
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में एक बड़ी रैली कर पूरे देश में केंद्र सरकार के खिलाफ एक बड़ा संदेश देने का काम किया था। लेकिन दिल्ली में अपेक्षा से बहुत कम भीड़ पाकर वे भी स्तब्ध रह गईं। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि यह एक छोटी रैली जरुर है, लेकिन वे मजबूती से लड़ेंगे और मोदी सरकार को सत्ता से हमेशा के लिए भगा देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जब वे लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करेंगी तब दिल्ली में एक बड़ी रैली आयोजित की जाएगी।
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आप-कांग्रेस के साथ आने की जरुरत बता गई रैली
आम आदमी पार्टी की रैली में लोगों की इतनी कम उपस्थिति रही कि पार्टी कार्यकर्ताओं को भी लोकसभा चुनाव में आप के प्रदर्शन पर संदेह हो रहा था। आप के एक पदाधिकारी ने स्वीकार करते हुए कहा कि इस लोकसभा चुनाव में अगर नरेंद्र मोदी के लिए 2014 वाली लहर नहीं है, तो अरविंद केजरीवाल के लिए भी 2015 वाली लहर नहीं है। दोनों पार्टियों की आवश्यकता है कि वे इस चुनाव में एक साथ आएं और भाजपा का मुकाबला करें। अगर दोनों दल साथ नहीं आते हैं तो परिणाम कुछ भी हो सकता है।
विपक्ष ने उड़ाया मजाक
अरविंद केजरीवाल की इस रैली का विपक्ष ने जमकर मजाक उड़ाया। दिल्ली भाजपा नेता मनोज तिवारी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल चार साल सरकार चलाने के बाद रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली आयोजित नहीं कर सके। जनता जुटाने के लिए देश के कई राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं को बुलाया लेकिन इसके बाद भी उन्हें इस बात का डर था कि जनता नहीं आएगी। यही वजह है कि उन्होंने जंतर-मंतर पर एक छोटी सी रैली आयोजित की।