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ITBP: 35 साल की नौकरी में भी हवलदार क्यों नहीं बन पा रहे आईटीबीपी के सिपाही? प्रमोशन को लेकर यहां फंसा है पेंच

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 04 Jan 2024 07:30 PM IST
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सार
सूत्रों का कहना है कि फॉलोअर्स रैंक के तहत आने वाले जवानों ने डीजी से लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय तक अपनी गुहार लगाई है। खास बात है कि दूसरे बलों में वरिष्ठता के आधार पर फॉलोअर रैंक को पदोन्नति मिल रही है। इन्हें उम्मीद है कि देर सवेर निकलने वाली पदोन्नति सूची में उनका नाम शामिल होगा...
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Why are ITBP followers rank jawans not able to become constable even after 35 years of service?
ITBP - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

भारत-चीन बॉर्डर की सुरक्षा में तैनात आईटीबीपी के कई जवान (फॉलोअर रैंक) पदोन्नति के मोर्चे पर पिछड़ रहे हैं। भले ही 10, 20 और 30 वर्ष में पदोन्नति देने का नियम है, लेकिन आईटीबीपी के फॉलोअर्स रैंक में कुछ जवान ऐसे हैं, जिन्हें 30-35 साल भी हवलदार का पद नसीब नहीं हो सका है। वे तीन दशकों से सिपाही के पद पर काम कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि फॉलोअर्स रैंक के तहत आने वाले जवानों ने डीजी से लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय तक अपनी गुहार लगाई है। खास बात है कि दूसरे बलों में वरिष्ठता के आधार पर फॉलोअर रैंक को पदोन्नति मिल रही है। इन्हें उम्मीद है कि देर सवेर निकलने वाली पदोन्नति सूची में उनका नाम शामिल होगा।

क्या होगी है फॉलोअर रैंक?

फॉलोअर रैंक में कुक, वाटर कैरियर, वॉशरमैन, बार्बर और सफाई कर्मी आदि शामिल होते हैं। सूत्रों ने बताया कि ये रैंक भी मुश्किल जगहों पर ड्यूटी देते हैं। 2009 के दौरान में इस संबंध में दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका लगाई गई थी। सितंबर 2014 में जब अदालत का फैसला आया, तो उसमें 90 दिन के भीतर फॉलोअर रैंक में सिपाही को हवलदार रैंक देने की बात कही गई थी। इसके 10 वर्ष बाद कैडर रिव्यू हुआ। जो पुराने सीनियर बचे थे, वे पदोन्नति का इन्तजार करते-करते 57 व 60 वर्ष की आयु में रिटायर होकर अपने घर चले गए। उन्हें अपनी पूरी नौकरी के दौरान एक भी पदोन्नति नहीं मिल सकी।

गत वर्ष अगस्त में कई लोगों का प्रमोशन हुआ था, लेकिन वह भी 10 साल देरी से मिला। फॉलोअर रैंक में शामिल स्टाफ का कहना है कि इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के आदेशों की अवहेलना हो रही है। दूसरा, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ व बीएसएफ में फॉलोअर रैंक को वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति मिल रही है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से 2018 में आरक्षण को लेकर कुछ नियम बदले गए थे, लेकिन उनमें कहा गया गया था कि वे नियम, वरिष्ठता की राह में बाधा नहीं बनेंगे। सफाई कर्मचारियों में कुल 238 हवलदार बनाए जाने थे। इनमें से 135 लोगों को ही पदोन्नति मिल सकी। इस सूची में एससी समुदाय के 35 लोगों को ही हवलदार बनने का मौका मिला। ऐसे कर्मचारी, जो 1988 में भर्ती हुए थे, उन्हें छोड़कर 2007 एवं 2012 तक के कर्मियों को हवलदार बना दिया गया।

आईटीबीपी कर्मियों का कहना था, सफाई कर्मचारी भी सभी मोर्चों पर तैनात रहते हैं। वे बॉर्डर पर पेट्रोलिंग पार्टी के साथ हर तरह की मुश्किल ड्यूटी करते हैं। फॉरवर्ड पोस्ट पर तैनात रहते हैं। जब 22 अगस्त 2023 को प्रमोशन लिस्ट आउट हुई, तो ऐसे कई कर्मचारी, हक्के बक्के रह गए। पदोन्नति के लिए सभी तरह की योग्यताएं पूरी करने वालों का नाम सूची से गायब था। पहली बार किसी बल में ऐसा हुआ कि वरिष्ठता को दरकिनार कर उनसे काफी जूनियर रहे कर्मियों को प्रमोशन दे दिया गया। जूनियर और सीनियर के बीच का यह अंतर भी कोई दो चार वर्ष का नहीं, बल्कि 20 से 25 साल का रहा है। कर्मियों का कहना है कि बल के अधिकारी यह तो मानते हैं कि उनके साथ गलत हुआ है, लेकिन इससे आगे कोई आश्वासन नहीं देते। दो दर्जन से अधिक सफाई कर्मचारी, जिनमें एससी समुदाय से आने वाले कुछ बार्बर और वॉशरमैन हैं, उन्होंने वेलफेयर पोर्टल पर आईटीबीपी डीजी से गुजारिश की है।

कर्मियों का आरोप है कि इस बाबत कई जवानों को लिखित नोटिस देकर डराया धमकाया गया है। एक जवान को कारावास की सजा दी गई। 1962 से लेकर 2005 तक सफाई कर्मचारी के पद पर ज्यादातर वाल्मीकि समाज के जवान ही भर्ती होते थे। यह रिकार्ड आईटीबीपी के पास है। आईटीबीपी में फॉलोअर रैंक के करीब 1300 पद हैं। इनमें से कई सफाई कर्मियों को अभी तक पदोन्नति नहीं मिली है। जो पदोन्नति दी गई, उसमें पुराने कर्मियों में से केवल 35 को ही हवलदार बनने का मौका मिला है। 2007 से 2012 के बीच भर्ती हुए लोगों को हवलदार बना दिया गया है।

अगर वरिष्ठता के आधार पर सभी को पदोन्नति मिलती है, तो किसी को ऐतराज नहीं होता। 2005 के बाद सभी जातियों के लोग, इस तरह के रैंकों में आने लगे। पदोन्नति की यह समस्या भी तभी से शुरू हुई है। पदोन्नति से वंचित कर्मियों ने पीएम, एमएचए व डीजी को पत्र लिख व ईमेल के माध्यम से अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया है। कर्मियों का कहना है कि अभी पदोन्नति सूची में 99 सीटें बची हैं। जो पदोन्नति मिली है, उनमें एससी समुदाय के 35 लोगों को छोड़कर बाकी दूसरे समुदायों के लोग हैं। अगर बाकी बची 99 सीटों के लिए पुराने लोगों को पदोन्नति मिलती है, तो इस समस्या का हल हो सकता है।

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