फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   who warns air pollution causes dementia risk in elderly indians

चिंताजनक: हर 100 में 7 भारतीयों में भूलने की बीमारी का खतरा, WHO ने वायु प्रदूषण को माना सबसे बड़ा विलेन

Sat, 18 Jul 2026 04:40 AM IST
राकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Sat, 18 Jul 2026 04:40 AM IST
सार

भारत की तेजी से बुजुर्ग होती आबादी के सिर पर भूलने की बीमारी का बड़ा खतरा मंडरा रहा है! विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी नई गाइडलाइन में पहली बार वायु प्रदूषण को डिमेंशिया का मुख्य कारण घोषित किया है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 60 वर्ष से अधिक उम्र के करीब 6 से 7 फीसदी (लगभग 60-70 लाख) लोग इस बीमारी की चपेट में हैं।
 

विज्ञापन
who warns air pollution causes dementia risk in elderly indians
डिमेंशिया ( प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Freepik.com

विस्तार

भारत तेजी से बुजुर्ग होती आबादी वाले देशों में शामिल हो रहा है। ऐसे में याददाश्त कमजोर होने और डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) का खतरा भी बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पहली बार अपनी नई गाइडलाइन में वायु प्रदूषण (खासतौर पर पीएम 2.5) को डिमेंशिया के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल किया है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि प्रदूषण के संपर्क को कम करने से याददाश्त कमजोर होने के खतरे को कम किया जा सकता है। 
विज्ञापन


भारत के लिए यह चेतावनी इसलिए भी अहम है क्योंकि देश के कई शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं। साथ ही, भारतीयों में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और स्ट्रोक जैसी बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं, जिन्हें डब्ल्यूएचओ ने डिमेंशिया के प्रमुख कारणों में गिना है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में 2021 तक 5.7 करोड़ लोग डिमेंशिया के साथ रह रहे थे। हर साल करीब 1 करोड़ नए मामले सामने आते हैं। अनुमान है कि यह संख्या 2030 तक 7.8 करोड़ और 2050 तक 13.9 करोड़ पहुंच जाएगी। इनमें 60% से अधिक कम और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं।
विज्ञापन


खतरा और बढ़ने की आशंका
भारत में करीब 10.4 करोड़ लोग 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के हैं। विभिन्न भारतीय अध्ययनों के अनुसार, इस आयु वर्ग के करीब 6 से 7 प्रतिशत लोग किसी न किसी प्रकार के डिमेंशिया से प्रभावित हैं। यानी हर 100 भारतीयों में लगभग 6-7 लोगों को यह बीमारी है या उसका खतरा है। आबादी के हिसाब से यह संख्या 60 से 70 लाख के बीच बैठती है और आने वाले वर्षों में इसके और बढ़ने की आशंका है। डब्ल्यूएचओ भी मानता है कि कम और मध्यम आय वाले देशों में डिमेंशिया का बोझ तेजी से बढ़ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इन वजहों से भी बढ़ी भूलने की बीमारी
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक डिमेंशिया केवल बढ़ती उम्र की बीमारी नहीं है। जीवनशैली और पर्यावरण से जुड़े कई कारण इसे बढ़ाते हैं। इनमें वायु प्रदूषण (पीएम2.5), हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन, डिप्रेशन समेत कई कारण शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ ने गाइडलाइन में 2024 लैंसेट कमीशन का हवाला देते हुए कहा है कि डिमेंशिया के करीब 45% मामलों का संबंध ऐसे जोखिम कारकों से है जिन्हें बदला या नियंत्रित किया जा सकता है।

यानी अगर लोग समय रहते जीवनशैली सुधारें और सरकारें प्रदूषण सहित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को मजबूत करें, तो बड़ी संख्या में मामलों को टाला या देर से विकसित किया जा सकता है।


पहली बार प्रदूषण पर स्पष्ट सिफारिश
डब्ल्यूएचओ ने अपनी दूसरी संस्करण की गाइडलाइन में पहली बार साफ कहा है कि बाहरी वायु प्रदूषण, विशेषकर पीएम 2.5, और घर के अंदर होने वाले प्रदूषण के संपर्क को कम करने से डिमेंशिया का खतरा घट सकता है। हालांकि उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों को अभी सीमित माना गया है, लेकिन डब्ल्यूएचओ ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम बताया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed