कौन है मसूद अजहर? इन पांच वजहों से चीन बार-बार कर रहा उसका 'समर्थन'
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मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित होने से चीन ने एक बार फिर बचा लिया है। ड्रैगन के अड़ंगा लगाने की वजह से ये चौथी बार है कि भारत समेत अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन की सारी कोशिशों पर फिर से पानी फिर गया है।
यूएन सिक्योरिटी काउंसिल के 15 सदस्यों में से सिर्फ चीन ही ऐसा है जो मसूद अजहर को इंटरनेशनल टेररिस्ट की सूची में लाने का लगातार विरोध कर रहा है। चीन ने एक बार फिर प्रतिबंध लगाने वाली कमेटी के बीच आम सहमति न बनने का राग अलापते हुए फिर पाकिस्तान से अपनी दोस्ती निभाई है। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम देश सऊदी अरब भी भारत समेत बाकी देशों की इस कोशिश के समर्थन में है।
अजहर को 'बचाकर' अब चीन कर रहा भारत को मनाने की कोशिश, द्विपक्षीय संबंधों की दी दुहाई
क्या आप जानते हैं कि चीन बार-बार पाकिस्तान का साथ क्यों दे रहा है और क्या इसमें उसका भी कोई फायदा छिपा है? इन सवालों के जवाब आपको आज मिल जाएंगे। सबसे पहले जानिए कि मसूद अजहर है कौन?
मसूद अजहर आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद का मुखिया है। भारत सरकार उसे 13 दिसंबर 2001 को हुए संसद पर हमले और 2 जनवरी 2016 को पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के लिए जिम्मेदार मानता है।
चीन क्यों निभा रहा 'दोस्ती'?
1. दोस्ती: चीन और पाकिस्तान दोस्त हैं यह सब जानते हैं, चीन चाहता है कि वह किसी भी तरह साउथ एशिया के देशों को खुश रखे। ऐसा इसलिए है क्योंकि चीन का सीधा मुकाबला भारत से है इसलिए वह ज्यादा देशों को अपनी तरफ करना चाहता है।
2. बदले में मिलती है 'मदद': ऐसा नहीं है कि बदले में पाकिस्तान चीन की मदद नहीं करता। आपको बता दें कि ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) और गुटनिरपेक्ष आंदोलन जैसे कई अन्य संगठनों में चीन की स्थिति कमजोर है। यहां पर चीन को शिनचियांग में मुस्लिम समुदाय पर अत्याचार और साउथ चाइना सी प्रोजेक्ट के लिए घेरा जाता है तो पाकिस्तान ही उसकी साइड लेता है।
3. यूएस से भारत की 'दोस्ती': चीन अमेरिका को अपना दुश्मन मानता है और भारत से उसकी दोस्ती को बर्दाश्त नहीं कर पाता। दोनों देश चीन के खिलाफ कोई रणनीति न बना पाएं इसलिए अजहर जैसे मुद्दों में वह भारत को उलझाकर रखना चाहता है। इतना ही नहीं इससे पहले न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) और सुरक्षा काउंसिल में भारत की स्थाई एंट्री पर चीन ही अड़ंगा लगाता रहा है।
4. दलाई लामा: धर्मगुरु जिन्होंने 1959 में तिब्बत छोड़कर भारत में शरण ले ली थी उनको चीन अपना मुख्य विरोधी मानता है। चीन में मौजूद भारत के पूर्व राजदूत तो यह तक कह चुके हैं कि दलाई लामा चीन के लिए लश्कर-ए-तय्यबा के हाफिज सईद के बराबर हैं।
5. वन बेल्ट वन रोड: चीन के महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में पाकिस्तान अहम भूमिका अदा कर रहा है। दुनिया के कई हिस्सों को आपस में सड़क, रेल और समुद्र मार्ग से जोड़ने के इस प्रोजेक्ट में पाकिस्तान अहम रोल अदा कर रहा है, जिसके लिए चीन द्वारा पाकिस्तान में काफी निवेश किया जा रहा है।