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Shambhavi Choudhary: 'समस्तीपुर की जनता ने बेटी मानकर आशीर्वाद दिया, पिता-ससुर और पति ने हर कदम पर दिया साथ'

Tue, 11 Jun 2024 03:53 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Tue, 11 Jun 2024 03:53 PM IST
सार

सबसे कम उम्र की महिला सांसद शांभवी ने अमर उजाला से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि हम यह मानते हैं कि आप चाहें पांच हजार वोट या 10 हजार वोट के अंतर से जीतें, जीत तो जीत ही होती है। 

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Who is India youngest MP Shambhavi Chaudhary, Know all about her in exclusive interview
शांभवी चौधरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार में चिराग पासवान की पार्टी लोजपाआर की ओर से समस्तीपुर सीट पर 25 साल की शांभवी चौधरी ने चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उनकी जीत हुई। यह जीत कोई साधारण नहीं थी, बल्कि उन्होंने एक इतिहास रचा। शांभवी ने न सिर्फ एनडीए, बल्कि प्रदेश के सभी 40 सीटों में मुजफ्फरपुर के बाद सबसे बड़े अंतर से अपनी जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी सन्नी हजारी को एक लाख 87 हजार से भी अधिक वोटों से शिकस्त दी। इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा में सबसे कम उम्र की महिला सांसद बनने का गौरव हासिल किया। अब शांभवी चौधरी ने अपनी जीत को लेकर अमर उजाला से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक सफर के बारे में बताया। वहीं, समस्तीपुर के लोगों का आभार जताया। 

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जीतकर सभी को खुशी होती है
सबसे कम उम्र की महिला सांसद ने कहा, 'बहुत सामान्य बात है, जीतकर सभी को बहुत खुशी होती है। मैं यह मानती हूं कि आप चाहें पांच हजार वोट या 10 हजार वोट के अंतर से जीतें, जीत तो जीत ही होती है। पर ज्यादा खुशी इस बात की है कि बिहार में दूसरे सबसे बड़े अंतर से हमारी जीत हुई है।
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लोगों का मुझे प्यार मिला
उन्होंने कहा, 'चुनाव प्रचार के दौरान मैं अपने क्षेत्र गई थी तो मैंने सबसे कहा था कि एक प्रत्याशी या सांसद के रूप में बाद में देखिए, पहले मुझे अपनी बेटी या बहन के रूप में मानिए और अपना आशीर्वाद मुझे दीजिए। अगर आप लोगों का आर्शीवाद मेरे साथ होगा, तो मैं चुनाव जीत जाऊंगी। मैं आज गर्व के साथ कह सकती हूं कि समस्तीपुर की धरती ने मुझे अपनी बेटी माना है।'
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शांभवी चौधरी ने कहा, 'लोगों का मुझे प्यार मिला है। इसलिए ही मुझे मेरी जिम्मेदारियों का पूरा अहसास है। बस मैं कोशिश करूंगी कि लोगों की आंकाक्षाओं पर खरा उतरूं। हर काम अच्छे और सफलता से कर सकूं।'

मायका और ससुराल पर यह बोलीं
यह पूछे जाने पर कि आपका मायका राजनीति से, जबकि ससुराल काफी धार्मिक प्रवृत्ति का है, ऐसे में यह कैसे संभालती हैं, इस पर उन्होंने कहा, 'देखिए मैं मानती हूं कि भक्ति में बहुत शक्ति होती है। आप जब किसी ऐसे काम में होते हैं, जहां पर लगातार आपको लोगों से मिलना होता है, तो आपके दिमाग और मन में स्थिरता होना जरूरी है। इसलिए मैं मानती हूं कि जब हम भगवान से प्रार्थना करते हैं तब बहुत सुकून मिलता है।'



उन्होंने आगे कहा, 'मेरे पिता, दादा सभी राजनीति में रहे हैं। वहीं मेरे ससुर मानव और जन सेवा का एक उदाहरण हैं। मैं यह मानती हूं कि जो यह सब तरफ से सीख मिलती है, दिशा-निर्देश मिलते हैं और बड़ों से आशीर्वाद के रूप में सुझाव मिलते हैं कि क्या करना चाहिए क्या नही, उसको मैं बहुत गंभीरता से लेती हूं। मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि पिता के साथ-साथ मेरे ससुर भी मुझे बेटी की तरह मानते हैं। मेरे ससुर सारे इंटरव्यू देखते हैं और मुझे बताते हैं कि क्या सही था क्या नहीं। वहीं मेरे पति भी मेरा साथ देते हैं।'

राजनीति में आने का कब सोचा?
यह पूछे जाने पर कि क्या वह पहले से ही राजनीति में आना चाहती थीं, इस पर शांभवी ने कहा, 'हां बिल्कुल। मैं अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी से सबसे छोटी नेता हूं। मैंने बचपन से अपने घरवालों को क्षेत्र के लोगों की सेवा करते देखा। मुझे बड़ा अच्छा लगता था कि खुद के लोगों को आपसे आशाएं होती हैं। इसलिए मैंने बचपन में ही सोच लिया कि मैं भी पापा और दादा की तरह काम करूंगी।'

सबसे कम उम्र की महिला सांसद बनने पर चौधरी ने कहा, 'मैंने नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी राजनीति में आने का मौका मिलेगा। हालांकि इससे पहले भी मेरी सामाजिक कार्यों में रुचि रही है। मैंने कई एनजीओ के साथ काम किया है। यह सेवा और राजनीति पहले से ही मेरे खून में बसी है, इसलिए ही मैं यहां हूं।'

खाने में क्या कुछ पसंद?
जब उनसे पूछा गया कि अगर वह हार जाती तो क्या होता, तो उन्होंने कहा, 'मैंने कभी यह सोचा ही नहीं था।' वहीं उन्होंने अपने खाने की पसंद भी बताई। शांभवी ने कहा कि उन्हें दाल, चावल बहुत पसंद हैं। जब तक यह नहीं खा लेती है, तबतक पेट नहीं भरता है। 


उन्होंने बताया कि उन्होंने समस्तीपुर क्षेत्र के लिए एक अलग से घोषणापत्र बनाया था। इसे बड़े ही खास अंदाज से बनाया गया था। इसके लिए एक पोर्टल लॉन्च किया था। इस पर लोगों से सुझाव मांगे थे। सबने अपने अपने सुझाव दिए, जिसे ध्यान में रखकर घोषणापत्र बनाया गया।

कौन हैं शांभवी?
शांभवी बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री और सीएम नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी अशोक चौधरी की बेटी हैं। उनके दादा स्वर्गीय महावीर चौधरी कांग्रेस सरकार में बिहार के पूर्व मंत्री थे। उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर किया और लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक किया। उनकी शादी पूर्व आईपीएस अधिकारी और महावीर मंदिर ट्रस्ट के सचिव आचार्य किशोर कुणाल के बेटे सायन कुणाल से हुई है। शांभवी ने लोकसभा चुनाव से पहले औपचारिक रूप से चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को ज्वॉइन किया था। 

 

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