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Gujarat: गांधीनगर में 38 करोड़ की लागत से 'व्हाइट टॉपिंग रोड' का काम पूरा; यह पद्धति अधिक सरल और टिकाऊ

Sun, 13 Jul 2025 08:55 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sun, 13 Jul 2025 08:55 PM IST
सार

व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बनी सड़क की लाइफ 20 साल की होती है। व्हाइट टॉपिंग तकनीक में मौजूदा डामर रोड की ऊपरी सतह हटाकर कंक्रीट की मोटी परत बिछाई जाती है। यह तकनीक आर्थिक दृष्टि से आरसीसी सड़क की तुलना में अधिक सरल और टिकाऊ होती है।

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White topping road work completed at cost of 38 crores in Gandhinagar method is more simple and sustainable
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल - फोटो : X/@Bhupendrapbjp

विस्तार

मानसून के सीजन में राज्य के ज्यादातर क्षेत्रों में भारी वर्षा के कारण अनेक सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में इन सड़कों और पुलों की तत्काल मरम्मत करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। इसके अंतर्गत वर्तमान में पूरे राज्य में युद्धस्तर पर काम चल रहा है।

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केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गुजरात में व्हाइट टॉपिंग रोड बनाने के संबंध में सुझाव दिया था। इसके अंतर्गत मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में कुल 38 करोड़ के ‘व्हाइट टॉपिंग’ सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी थी। इन कार्यों में गांधीनगर में 6.20 किलोमीटर लंबाई की कोबा-अडालज लिंक रोड और 2.80 किलोमीटर लंबाई की सरगासण-रक्षा शक्ति सर्कल रोड शामिल हैं। इन दोनों सड़कों को व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बनाने का काम पूरा कर लिया गया है।
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उल्लेखनीय है कि व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बनी सड़क की लाइफ 20 साल की होती है। व्हाइट टॉपिंग तकनीक में मौजूदा डामर रोड की ऊपरी सतह हटाकर कंक्रीट की मोटी परत बिछाई जाती है। यह तकनीक आर्थिक दृष्टि से आरसीसी सड़क की तुलना में अधिक सरल और टिकाऊ होती है। माना जाता है कि यह पद्धति डामर की रिसर्फेसिंग से अधिक लाभदायक होती है। सड़क में डामर की सतह के ऊपर 20 सेमी कंक्रीट की परत बिछाई जाती है, जो डामर और आरसीसी की प्रक्रिया से अलग पद्धति है।
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मानसून की सीजन में पानी के तेज बहाव के कारण गुणवत्तायुक्त और गहन निगरानी के साथ बनी डामर रोड में भी पैच पड़ जाते हैं। ऐसी स्थिति में व्हाइट टॉपिंग तकनीक को फायदेमंद माना जाता है। सड़क एवं भवन विभाग की विज्ञप्ति में बताया गया है कि व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बनी सड़कों को अब आवाजाही के लिए खोल दिया गया है।

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