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...तो 99 साल में खत्म होंगे अदालतों में लंबित पॉक्सो के मामले, इन राज्यों में मुकदमों की ‘बाढ़’

Mon, 10 Sep 2018 03:48 AM IST
हरेन्द्र, अमर उजला, नई दिल्ली
हरेन्द्र, अमर उजला, नई दिल्ली Updated Mon, 10 Sep 2018 03:48 AM IST
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which Pocso act cases pending in courts that will end in 99 years
सांकेतिक तस्वीर

पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में नाबालिगों से दुष्कर्म के मामलों में जल्द न्याय को लेकर मध्य प्रदेश का जिक्र किया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि एमपी में पॉक्सो एक्ट के तहत कुछ दिन की सुनवाई के बाद दुष्कर्म के आरोपियों को फांसी की सजा सुना दी गई। लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि मध्य प्रदेश में पॉक्सो के 10,950 मामले सुनवाई के लिए लंबित हैं। वहीं देश में यह संख्या 90 हजार से ज्यादा है, जिन्हें खत्म करने में सालों लग जाएं जाएंगे और तब तक पीड़ित बच्चे बालिग हो जाएंगे।

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सबसे ज्यादा मामले एमपी, महाराष्ट्र में

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत 2016 तक देशभर में 36 हजार से ज्यादा मामले रजिस्टर किए गए, जबकि 90 हजार से ज्यादा मामले अभी भी देश की अदालतों में लंबित हैं। इनमें से केवल 11 हजार मामलों का ही ट्रायल पूरा हुआ है।
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वहीं 2016 में सबसे ज्यादा 4 हजार 815 मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए गए, जिनमें से केवल 1054 मामलों का ही निबटारा हुआ। जबकि वहां 17 हजार से ज्यादा मामले अभी लंबित हैं। वहीं एमपी में 2016 में 4700 मामले दर्ज हुए और केवल 2462 मामले ही खत्म हुए और 10950 हजार मामले अभी लंबित हैं।
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 हर घंटे 40 बच्चों का यौन शोषण

नोबल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी की संस्था बचपन बचाओ आंदलन के सीईओ भुवन रिभु का कहना है कि अगर आज वक्त में पॉक्सो के तहत एक भी मामला दर्ज न हो, तो तकरीबन एक लाख मामले विशेष अदालतों में विचाराधीन हैं। उनका कहना है कि हर घंटे 40 बच्चों का यौन शोषण होता है, जिनमें से मात्र 4 बच्चों के मामले ही पॉक्सो के तहत दर्ज होते हैं। भुवन के मुताबिक एक्ट के तहत एक साल के भीतर केस का ट्रायल पूरा करना होता है।

भुवन ने बताया कि पॉक्सो एक्ट में बदलाव हो जाने के बाद 0-12 साल उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार करने वालों को फांसी की सजा दी जाएगी। जबकि 16 साल की लड़की का रेप करने वाले को सख्त सजा देने का प्रावधान किया जाएगा। जिसमें 2 महीने की जांच और 2 महीने का ट्रायल है। उन्होंने कहा कि अगर ट्रायल ऐसे ही धीमी गति से चलते रहे, तो बैकलॉग बढ़ता चला जाएगा।

गुजरात में 2071 तक खत्म होंगे मामले

भुवन का कहना है कि अगर पॉक्सो के तहत कोई नया मामला दर्ज न हो तो अकेले गुजरात में पेंडिग मामले साल 2071 तक खत्म होंगे, वहीं अरुणाचल प्रदेश में साल 2117 तक और दिल्ली में 2029 तक ही बच्चों को न्याय मिल पाएगा। 

उन्होंने बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल हलफनामे के मुताबिक पॉक्सो एक्ट के तहत साल 2012 से 2015 तक 5217 केस दर्ज किए गए, जिनमें से 11 प्रतिशत की रफ्तार से केवल 575 मामलों का ही निबटारा हुआ। वहीं केरल में साल 2039, पश्चिमी बंगाल में साल 2035, महाराष्ट्र में साल 2032 और बिहार में 2029 तक ही मामले खत्म हो पाएंगे।
 
मात्र 620 विशेष अदालतें

उन्होंने बताया कि पॉक्सो मामलों का निबटारा करने के लिए देशभर में मात्र 620 विशेष अदालतें ही हैं, जबकि साल 2014 में पूरे देश में 9 हजार केस रजिस्टर किए गए, 2015 यह संख्या बढ़ कर 15 हजार पहुंच गई। 

भुवन ने न्याय में देरी का हवाला देते हुए कहा कि 2013 में पूर्वी दिल्ली में पांच वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार की घटना हुई थी, जिसमें ट्रायल उसी साल शुरू हो गया था, लेकिन अदालत ने 2017 में आरोपी को ज्युवेनाइल घोषित कर दिया।

इस साल मार्च में यह मामला हाई कोर्ट में सुनवाई पर आया, लेकिन अदालत ने आरोपी की किशोरता साबित करने के लिए दोबारा निचली अदालत में मामला भेज दिया। इस साल जुलाई में अदालत ने फैसला दिया कि घटना के दौरान आरोपी बालिग था।
 

बने ज्यूडिशियल कमेटी

वहीं इस साल सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाई कोर्ट्स को ज्यूडिशियल कमेटी बनाने का निर्देश दिया है, जिसमें 3 से ज्यादा जज शामिल होंगे। ये कमेटी विशेष अदालतों में चल रहे पॉक्सो के तहत चल रहे मामलों पर नजर रखेगी। साथ ही शीर्ष अदालत ने देश के उच्च न्यायलयों को यह भी निर्देश दिया कि वह समय-समय पर फास्ट ट्रैक अदालतों पॉक्सो के मामलों का जल्द निबटारा करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करते रहें।  

पॉक्सो के सेक्शन 35 के मुताबिक ट्रायल का जल्द से जल्द निबटारा करना जरूरी है। वहीं हाल ही हुए संशोधनों के तहत पुलिस को अपनी जांच दो महीनों के भीतर करनी होगी, वहीं अगले दो माह में ट्रॉयल पूरा करना होगा और छह माह के भीतर अपील का निबटारा करना होगा।

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