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यादों में नारायण : जब फाइल लाने के लिए बीच रास्ते में उतार दिया था नगर विकास मंत्री को...

Fri, 19 Oct 2018 01:46 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 19 Oct 2018 01:46 AM IST
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when ND Tiwari dropped town development minister in middle of way to bring file

मैं नारायण दत्त तिवारी के मंत्रिमंडल में नगर विकास मंत्री था। बाराबंकी में बैठक थी। तिवारी जी ने मुझसे भी कहा कि टाउन प्लानिंग की बात है, तो तुम्हें भी साथ चलना है। सुबह हम लोग लखनऊ से बाराबंकी के लिए रवाना हुए। चिनहट के आगे निकले तो तिवारी जी ने अचानक पूछा कि कल जिस पर डिस्कशन हो रहा था, वह फाइल लाए हो। मैं उनके चेहरे की तरफ देखने लगा। मैने धीरे से कहा कि वह फाइल तो मैं भूल गया।

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आगे की बात बताने से पहले एक और बात कि तिवारी जी और हम पड़ोसी थे। उनकी पत्नी और हमारी पत्नी दोनों डफरिन अस्पताल में एक साथ डॉक्टर थीं। हम लोगों के घरों की दीवार मिली हुई थी। बावजूद इसके तिवारी जी ने मेरे मुंह से यह निकलते ही, ‘फाइल भूल गया हूं’ ड्राइवर से कहा, गाड़ी रोको। गाड़ी रुकी और तिवारी जी मुझसे बोले, यहीं उतर जाओ और ऑफिस जाकर फाइल लेकर बाराबंकी आओ। मैं हक्का-बक्का। गाड़ी से नीचे उतरा। मेरा गनर भी नीचे उतर गया। फ्लीट आगे चली गई। 
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उस समय चिनहट के आगे का इलाका आज जैसा नहीं था। सड़क के दोनों तरफ जंगल और सड़क पर मैं और मेरा गनर। गनर ने बाराबंकी की तरफ से आ रहा एक ट्रक रुकवाया। ट्रक पर बैठने ही जा रहा था कि इसी बीच, एक परिचित बाराबंकी की तरफ से अपनी कार से आ गए और मुझे देखकर आवाज दी। पूछा, यहां कैसे? समस्या बताई, तो वह मुझे गाड़ी में बैठाकर सचिवालय लाए, अन्यथा मुझे ट्रक में बैठकर आना पड़ता।
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बहरहाल, सचिवालय पहुंचा तो पोर्टिको में तत्कालीन मुख्य सचिव फाइल लिए खड़े थे और तत्कालीन राज्य संपत्ति अधिकारी एक गाड़ी के साथ खड़े थे। मुख्य सचिव ने फाइल दी और राज्य संपत्ति अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर यह गाड़ी खड़ी है। इससे बाराबंकी चले जाइए। मैं फाइल लेकर बाराबंकी पहुंचा। 

बैठक के बाद वापस हुए तो मुझे फिर अपनी गाड़ी में बैठाया और बोले कि तुम्हें बुरा लगा होगा, लेकिन सवाल भरोसे का है। बाराबंकी के विधायक बाबूलाल कुशमेश ने पूरे प्लान पर बात की थी। फाइल पर प्वाइंट भी नोट थे। अगर कोई मुख्यमंत्री बाराबंकी जाकर भी सिर्फ हवा में बातें कर आता, तो न सरकार की साख बनती और न मुख्यमंत्री की। ऊपर से विधायक का भरोसा और घटता। हमेशा ध्यान रखो कि राजनीति में सम्मान के लिए जनता का भरोसा और उसके काम समय पर होना बहुत जरूरी है। इसीलिए मैने रास्ते में तुम्हें उतारकर फाइल लाने सचिवालय भेजा।

हॉट मिक्स वाले तिवारी जी....

वास्तव में वह विकास पुरुष थे। आज हॉट-मिक्स प्लांट से बन रही पेवर रोड की तकनीक तिवारी जी ही बतौर मुख्यमंत्री लेकर आए थे। कभी रात 12 बजे तो कभी दो और तीन बजे उनका फोन आता और दस मिनट में न सिर्फ मुझसे बल्कि लखनऊ नगर महापालिका के तत्कालीन प्रशासक एके मिश्रा, तत्कालीन मुख्य अभियंता को किसी बन रही सड़क पर निश्चित जगह पहुंचने को कहा जाता। 

कोई कुर्ता पाजामा तो कोई स्लीपिंग सूट में वहां पहुंचता, तो देखता कि तिवारी जी नई सड़क के बीच में गड्ढा करा रहे हैं। गड्ढा होता और फिर तिवारी जी उसमें पानी भरवा देते। इसके बाद आगे की सड़कों की जांच को निकल लेते। अगले दिन­गड्ढे में भरा पानी कुछ ही कम होता, तो कोई बात नहीं। पर, अगर गड्ढे में पानी ज्यादा खत्म हो जाता या बिल्कुल सूख जाता तो फिर संबंधित इंजीनियर की शामत। 

एक बार मैंने उनसे गड्ढे का राज पूछा तो उन्होंने बताया कि किसी देश से सिर्फ तकनीक लाना ही पर्याप्त नहीं है, यह भी समझकर आना जरूरी है कि उस तकनीक का गुणवत्तापूर्वक इस्तेमाल करने के लिए क्या जरूरी है। इसीलिए जब मैं यह तकनीक लेकर आया तो यह भी समझकर आया कि हॉट-मिक्स प्लांट से पेवर तकनीक से बनी सड़कों पर बिछाए गए कोलतार पर पानी का असर नहीं होता। अगर गड्ढे में पानी ज्यादा-कम हो गया या खत्म हो गया तो समझो कि गड़बड़ी की गई है।

मददगार, विनम्र पर सख्त

तिवारी जी वैसे तो अधिकारियों से बड़ी विनम्रता से बात करते थे। पर, लिखापढ़ी में बहुत सख्त थे। उनका स्पष्ट मानना था कि प्रजातंत्र में प्रजा का हित सर्वोच्च है। तंत्र यानी सरकारी मशीनरी को प्रजा के हित को ध्यान में रखकर ही काम करना चाहिए। अगर कहीं नियम और कानून भी आड़े आ रहे हों तो सरकार में बैठे लोगों को उनका भी रास्ता निकालना जरूरी है। 

एक घटना याद आती है... स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सूर्यकुमार अवस्थी तिवारी जी से मिलने गए। तिवारी जी ने उनसे पूछा कि कहां रह रहे हैं। अवस्थी जी ने बताया कि इधर-उधर रह लेता हूं। तिवारी जी ने योगेन्द्र नारायण, जो कि उनके प्रमुख सचिव थे, बुलाकर कहा, मैं सूर्यकुमार अवस्थी जी को पार्क रोड पर एक आवास देना चाहता हूं। पर, आवास नहीं हुआ। योगेन्द्र नारायण ने बताया कि राज्य संपत्ति अधिकारी अख्तर आलम कह रहे हैं कि नियमानुसार, इन्हें आवास आवंटित नहीं किया जा सकता। 

तिवारी जी ने खुद अख्तर आलम से फोन पर बात की। पर, आलम मियां का वही जवाब कि आवास नहीं दिया जा सकता। तिवारी जी ने फाइल मंगवाई और उस पर लिखा, ‘मैं सूर्यकुमार अवस्थी जी को जानता हूं। यह आजादी की लड़ाई में जेल गए हैं। इनके पास रहने का ठिकाना नहीं है। मैं आदेश देता हूं कि अवस्थी जी को तुरंत पार्क रोड पर आवास आवंटित कर दिया जाए।’ नतीजा आवास तो आवंटित हुआ ही ऊपर से मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन न करने और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का सम्मान न करने पर अख्तर आलम को निलंबित भी कर दिया।

- नरेश चंद्रा (वरिष्ठ कांग्रेस नेता)

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