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जब इंदिरा गांधी और नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के नारे को उसी के खिलाफ इस्तेमाल कर सत्ता हासिल की...

Thu, 23 May 2019 07:58 PM IST
Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: Jitendra Bhardwaj Updated Thu, 23 May 2019 07:58 PM IST
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When Indira Gandhi and Narendra Modi gained power by using the opposition slogan against them
इंदिरा गांधी-नरेंद्र मोदी - फोटो : social media

आपको ध्यान होगा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के खिलाफ साल 1971 में विपक्ष का महागठबंधन बना था। इसके नेताओं ने 'इंदिरा हटाओ, देश बचाओ' का नारा दिया। विपक्ष ने अपनी हर रैली में इस नारे को इंदिरा गांधी पर एक बाण की तरह इस्तेमाल किया, लेकिन इंदिरा गांधी ने इस नारे को पलटकर उसे विपक्ष पर ही दे मारा। नारा भी ऐसा दिया कि जनता ने भारी बहुमत से इंदिरा गांधी को सत्ता सौंप दी।

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इंदिरा गांधी ने नारा दिया, वे कहते हैं इंदिरा हटाओ, मैं कहती हूं, 'गरीबी हटाओ'। ठीक उसी तरह अब पीएम नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के नारे 'चौकीदार चोर है' को उसी के खिलाफ इस्तेमाल कर दिया। मोदी ने अपने नाम के आगे 'मैं चौकीदार हूं' लगा लिया। इसके बाद देश में होड़ लग गई। लोगों ने अपने नाम के आगे चौकीदार लगा लिया। दूसरी ओर राहुल गांधी जनता में 'चौकीदार चोर है' बोलते रहे। इसका नतीजा, ईवीएम खुलने के बाद पता चला।
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चुनाव में लोगों की नब्ज के अनुसार नए-नए नारे ईजाद किए जाते रहे हैं। इनमें कोई हिट हो जाता है तो कोई फ़्लॉप। अगर नारा चल गया तो 'नेताजी' की बल्ले बल्ले होती है। जनता को वह नारा अच्छा नहीं लगा तो समझो नेताजी की जीती हुई बाजी भी हाथ से निकल सकती है। कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल मामले में 'चौकीदार चोर है', इस नारे को घर-घर तक पहुंचा दिया।

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चूंकि यह सीधे पीएम मोदी पर वार था, इसलिए भाजपा ने इसका जवाब देने में जल्दबाजी नहीं दिखाई। कई माह इंतजार कर यह देखा गया कि जनता में इसका कैसा प्रभाव है। भाजपा के चुनाव प्रचार की रणनीति तैयार करने वाली टीम के एक पदाधिकारी का कहना है कि 'चौकीदार चोर है' के नारे पर काफी रिसर्च वर्क किया गया था। पार्टी ने इस नारे में बदलाव करने के लिए कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई।

मोदी ने अपनी रैलियों में कहा, मैं तो चौकीदार हूं। देश की रक्षा करना मेरा धर्म है। आपके चौकीदार को चोर कहा जा रहा है। रिसर्च टीम ने उन सभी जगहों पर लोगों की प्रतिक्रिया जानी, जहां पर मोदी ने चौकीदार शब्द का इस्तेमाल किया था।अधिकांश जगहों से यह रिपोर्ट मिलने के बाद कि जनता राहुल गांधी के इस नारे से नाराज नहीं है तो खुश भी नहीं है।

बस इसी रिपोर्ट के बाद मैं भी चौकीदार हूं और नाम के आगे चौकीदार शब्द लगाने की मुहिम शुरू कर दी गई। इसका असर भी खूब देखने को मिला। मोदी ने चौकीदारों से मन की बात की। इसके बाद जनता की राय ली गई तो चौकीदार शब्द मोदी के पक्ष में वोट लाता हुआ दिखाई पड़ा। कांग्रेस पार्टी चुनाव के अंतिम चरण तक इस नारे की मार को समझ नहीं सकी। राहुल अपनी हर जनसभा में ज़ोरशोर से चौकीदार चोर है, बोलने लगे।

साल 2014 में हिट रहा 'चायवाला' नारा मणिशंकर अय्यर ने दिया था...

पिछले लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने मोदी को चायवाला कह दिया था। मोदी ने इस नारे की गहराई भांपने में देर नहीं लगाई। उन्होंने कहा, अगर कोई चायवाला देश का प्रधानमंत्री बन रहा है तो इसमें कुछ लोगों को (राजनीतिक दलों) दिक्कत क्यों हो रही है। बाद में यह नारा चल निकला और मोदी प्रधानमंत्री बन गए।

इसके अलावा 'अच्छे दिन आने वाले है', 'मैं देश नहीं मिटने दूंगा और न ही देश को झुकने दूंगा' और 'सबका साथ, सबका विकास' जैसे नारे खूब चले हैं। विपक्षी दलों की ओर से उन्हें मौत का सौदागर' और 'नीच' भी कहा गया, लेकिन मोदी ने इन नारों को अपने फायदे में बदल दिया।

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