{"_id":"589adf484f1c1b945237a0d1","slug":"what-type-of-colattion-samajwadi-party-and-congress-in-up-election-2017","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सपा-कांग्रेस : ये कैसा गठबंधन ? चुनाव में साथ-साथ, वादे अलग-अलग","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
सपा-कांग्रेस : ये कैसा गठबंधन ? चुनाव में साथ-साथ, वादे अलग-अलग
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 09 Feb 2017 11:50 AM IST
विज्ञापन
अखिलेश और राहुल
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी के लिए कांग्रेस पार्टी बुधवार को अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दी। कांग्रेस की सहयोगी पार्टी समाजवादी पार्टी पहले ही अपना घोषणापत्र जारी कर चुकी है। दोनों पार्टियां विस चुनाव के लिए अलग-अलग मेनिफेस्टो जारी की है।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सत्ता में आने के बाद सपा और कांग्रेस अपने-अपने चुनावी एजेंडे पर काम करेगी। ये सवाल इसलिए उठते हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस एक साथ मिलकर चुनाव लड़ी थी और तीनों पार्टियों का मेनिफेस्टो भी एक था। लेकिन यूपी के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ।
अखिलेश यादव ने गठबंधन एलान के पहले ही अपनी पार्टी का मेनिफेस्टो जारी कर दिया था। वहीं कई सीटों पर अभी भी पेंच फंसा हुआ है। जहां दोनों दल के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। गौरतलब है कि राज्य में सपा और कांग्रेस ने गठबंधन के तहत 403 विधानसभा सीटों में से सपा 298 और कांग्रेस 105 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सत्ता में आने के बाद सपा और कांग्रेस अपने-अपने चुनावी एजेंडे पर काम करेगी। ये सवाल इसलिए उठते हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस एक साथ मिलकर चुनाव लड़ी थी और तीनों पार्टियों का मेनिफेस्टो भी एक था। लेकिन यूपी के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ।
विज्ञापन
अखिलेश यादव ने गठबंधन एलान के पहले ही अपनी पार्टी का मेनिफेस्टो जारी कर दिया था। वहीं कई सीटों पर अभी भी पेंच फंसा हुआ है। जहां दोनों दल के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। गौरतलब है कि राज्य में सपा और कांग्रेस ने गठबंधन के तहत 403 विधानसभा सीटों में से सपा 298 और कांग्रेस 105 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
विज्ञापन
राहुल गांधी अखिलेश यादव
- फोटो : SELF
पहले ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि कांग्रेस अपना चुनाव घोषणा पत्र जारी नहीं करेगी। कांग्रेस और सपा का संयुक्त घोषणापत्र होगा। बिहार विधानसभा चुनाव में भी महागठबंधन ने संयुक्त घोषणापत्र जारी किया था। हालांकि हमेशा साझा घोषणापत्र जारी करने वाले एनडीए के घटक दलों ने बिहार में अपना अलग-अलग घोषणापत्र जारी किया था।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी गठबंधन में चुनाव लड़ रही है, तो बिहार की तर्ज पर दोनों पार्टियों का संयुक्त घोषणा पत्र की उम्मीद थी। पहले ऐसी खबर आ रही थी कि बिहार में ‘नीतीश निश्चय, प्रगति के सात सूत्र’ की तरह पार्टी नेता उप्र में ‘ विकास के दस सूत्र’ जारी कर सकते हैं ।
लेकिन खुद राहुल गांधी ने मथुरा की जनसभा में ये कहकर जता दिया था कि कांग्रेस का घोषणापत्र अलग हो सकता है। क्योंकि मंच से उन्होंने अखिलेश जी से कहा है कि चुनाव के घोषणापत्र में किसानों को शामिल किया जाए और बेरोजगार युवाओं का खास ध्यान रखा जाए। राहुल ने कहा कि हर युवा के अपने सपने होते हैं, चाहे वह किसान का बेटा हो, व्यापारी हो या गरीब का बेटा हो।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी गठबंधन में चुनाव लड़ रही है, तो बिहार की तर्ज पर दोनों पार्टियों का संयुक्त घोषणा पत्र की उम्मीद थी। पहले ऐसी खबर आ रही थी कि बिहार में ‘नीतीश निश्चय, प्रगति के सात सूत्र’ की तरह पार्टी नेता उप्र में ‘ विकास के दस सूत्र’ जारी कर सकते हैं ।
लेकिन खुद राहुल गांधी ने मथुरा की जनसभा में ये कहकर जता दिया था कि कांग्रेस का घोषणापत्र अलग हो सकता है। क्योंकि मंच से उन्होंने अखिलेश जी से कहा है कि चुनाव के घोषणापत्र में किसानों को शामिल किया जाए और बेरोजगार युवाओं का खास ध्यान रखा जाए। राहुल ने कहा कि हर युवा के अपने सपने होते हैं, चाहे वह किसान का बेटा हो, व्यापारी हो या गरीब का बेटा हो।
Rahul Gandhi-Akhilesh yadav
राहुल ने मंच से आगे कहा कि यही नहीं यूपी में बहुत सारे कोचिंग सेंटर हैं, जहां पैसों की कमी के कारण बच्चे पढ़ने नहीं जा पाते हैं। मैंने अखिलेश जी को सुझाव दिया है कि प्रदेश में हाई क्वालिटी के कोचिंग सेंटर खोलें जाएं। ताकि यूपी के युवाओं को रोजगार मिल सके।
ऐसा लगता है कि चुनाव के अवसर पर विभिन्न पार्टियों के लिए ‘घोषणा पत्र’ जारी करना अब मात्र औपचारिकता रह गया है। यही कारण है कि सीटों के तालमेल और उम्मीदवारों के चयन में उलझी राजनीतिक पार्टियों ने तो प्रथम चरण के मतदान से मात्र चार दिन पहले अपना घोषणा पत्र जारी कर रही हैं।
ऐसा लगता है कि चुनाव के अवसर पर विभिन्न पार्टियों के लिए ‘घोषणा पत्र’ जारी करना अब मात्र औपचारिकता रह गया है। यही कारण है कि सीटों के तालमेल और उम्मीदवारों के चयन में उलझी राजनीतिक पार्टियों ने तो प्रथम चरण के मतदान से मात्र चार दिन पहले अपना घोषणा पत्र जारी कर रही हैं।