{"_id":"5a5ab1fa4f1c1bfa408b4b2d","slug":"what-kind-of-bullet-proof-jacket-is-it-for-army","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सेना के लिए यह कैसी बुलट प्रूफ जैकेट की खरीद है?","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
सेना के लिए यह कैसी बुलट प्रूफ जैकेट की खरीद है?
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 14 Jan 2018 06:57 AM IST
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बुलट प्रूफ जैकेट
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शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले ......बड़ी उम्दा पंक्तियां हैं। कानों में पड़ते ही रोएं भर्रा उठते हैं, लेकिन जिस तरह से मैनेज करके सेना के इंफैट्री के जवानों के लिए 1.86 लाख बुलट प्रूफ जैकेट के खरीद की प्रक्रिया चल रही है, पूरी तरह से चौंकाने वाली है। बुलट प्रूफ जैकेट की गुणवत्ता का जो मानक आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) जारी हुआ था, उसे दे पाना मौजूदा भारतीय कंपनियों के बस की बात नहीं है। उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि कपड़े, सतह (सरफेस एरिया) और बैलिस्टिक परीक्षण में किसी भी कंपनी का बुलट प्रूफ जैकेट गुणवत्ता में खरा नहीं उतरा है, लेकिन फिर भी सेना और सरकार बुलेट प्रूफ जैकेट खरीदने का मन बना रही है।
फिर भी होगी बुलटप्रूफ जैकेट की खरीद
एसएम पल्प, टाटा,एमकेयू जैसी तीन नामी कंपनियों के बुलट प्रूफ जैकट परीक्षण में सफल नहीं हो पाए हैं। स्टार वाॉयर इस खेल में शामिल ही नहीं हो पाई थी। इन कंपनियों को एनआईजे0101.06 की गुणवत्ता का बुलट प्रूफ जैकेट देना था। तीनों में से एक कंपनी के प्रतिनिधि का कहना है कि इटली से लेकर अन्य देशों के मॉडल का कॉकटेल तैयार करके बुलट प्रूफ जैकेट के लिए जो मानक तैयार हुआ है, उस गुणवत्ता को पूरा कर पाने की किसी कंपनी में क्षमता नहीं है।
पढ़ें- जम्मू पुलिस के बुलेट प्रूफ जैकेट के सैंपल टेस्ट में फेल
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सूत्र का कहना है कि परीक्षण में तीनों ही कंपनियों के मॉडल फेल हुए हैं, ऐसे में सेना तीनों कंपनियों में 1.86 लाख बुलट प्रूफ जैकेट का सौदा बांटने का मन बना रही है। यह बीच का रास्ता निकाला जा रहा है। ताकि मेक इन इंडिया थीम के तहत सेना के जवानों की जरूरत को पूरा किया जा सके। इस बारे में सेना मुख्यालय के एक सूत्र का कहना है कि हमें जिस गुणवत्ता की जैकेट चाहिए, वह मानक विदेशी बुलट प्रूफ जैकेट ही पूरा कर सकते हैं।
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फिर भी होगी बुलटप्रूफ जैकेट की खरीद
एसएम पल्प, टाटा,एमकेयू जैसी तीन नामी कंपनियों के बुलट प्रूफ जैकट परीक्षण में सफल नहीं हो पाए हैं। स्टार वाॉयर इस खेल में शामिल ही नहीं हो पाई थी। इन कंपनियों को एनआईजे0101.06 की गुणवत्ता का बुलट प्रूफ जैकेट देना था। तीनों में से एक कंपनी के प्रतिनिधि का कहना है कि इटली से लेकर अन्य देशों के मॉडल का कॉकटेल तैयार करके बुलट प्रूफ जैकेट के लिए जो मानक तैयार हुआ है, उस गुणवत्ता को पूरा कर पाने की किसी कंपनी में क्षमता नहीं है।
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सूत्र का कहना है कि परीक्षण में तीनों ही कंपनियों के मॉडल फेल हुए हैं, ऐसे में सेना तीनों कंपनियों में 1.86 लाख बुलट प्रूफ जैकेट का सौदा बांटने का मन बना रही है। यह बीच का रास्ता निकाला जा रहा है। ताकि मेक इन इंडिया थीम के तहत सेना के जवानों की जरूरत को पूरा किया जा सके। इस बारे में सेना मुख्यालय के एक सूत्र का कहना है कि हमें जिस गुणवत्ता की जैकेट चाहिए, वह मानक विदेशी बुलट प्रूफ जैकेट ही पूरा कर सकते हैं।
पहले भी सरकार ने चलाया काम
indian army
- फोटो : BASIT ZARGAR
मौजूदा में बुलट प्रूफ जैकेट बनाने वाली देश की 12 कंपनियों के पास इस क्षमता का अभाव है। माना यह जा रहा है कि ऐसी स्थिति में भारत-पाक सीमा पर इंफैंट्री के जवानों की अपरिहार्य जरूरत को देखते हुए इंड यूजर, डीआरडीओ और रक्षा मंत्रालय के स्तर पर अंतिम रेस में बची टाटा डिफेंस, एमकेयू और एसएम पल्प जैसी कंपनियों के बीच में इस सौदे का बंटवारा किया जा रहा है।
इससे पहले भी रक्षा मंत्रालय ने बुलट प्रूफ जैकेट के परीक्षण में कंपनियों द्वारा मानक को पूरा न कर पाने की स्थिति में 1.86 लाख जैकेट की खरीद प्रक्रिया को जारी रखते हुए आपात स्थिति में 50 हजार अतिरिक्त जैकेट लेने का निर्णय लिया गया था। यह जैकेट एनआईजे0101.04 गुणवत्ता की थी। शुरू में 50 हजार जैकेट के सौदे को टाटा डिफेंस और एमकेयू में विभाजित करने का निर्णय हुआ, लेकिन बाद टाटा द्वारा मजबूत दावा पेश करने के बाद यह सौदा टाटा डिफेंस की झोली में चला गया। समझा जा रहा है कि जल्द ही सरकार अतिरिक्त खरीद के तहत 50 हजार बुलट प्रूफ जैकेट की एक और लॉट लेने का निर्णय कर सकती है।
इससे पहले भी रक्षा मंत्रालय ने बुलट प्रूफ जैकेट के परीक्षण में कंपनियों द्वारा मानक को पूरा न कर पाने की स्थिति में 1.86 लाख जैकेट की खरीद प्रक्रिया को जारी रखते हुए आपात स्थिति में 50 हजार अतिरिक्त जैकेट लेने का निर्णय लिया गया था। यह जैकेट एनआईजे0101.04 गुणवत्ता की थी। शुरू में 50 हजार जैकेट के सौदे को टाटा डिफेंस और एमकेयू में विभाजित करने का निर्णय हुआ, लेकिन बाद टाटा द्वारा मजबूत दावा पेश करने के बाद यह सौदा टाटा डिफेंस की झोली में चला गया। समझा जा रहा है कि जल्द ही सरकार अतिरिक्त खरीद के तहत 50 हजार बुलट प्रूफ जैकेट की एक और लॉट लेने का निर्णय कर सकती है।
आ रहा है पसीना
ARMY
कारगिल संघर्ष के बाद से सेना के जवानों के लिए गुणवत्ता की बुलट प्रूफ जैकेट की जरूरत महसूस की जा रही है। 2005-06 में सेना के भविष्य के जवान की परिकल्पना के तहत इस पर खासा जोर दिया गया। 2009 में 11 वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 3.53 लाख बुलट प्रूफ जैकेट की जरुरत को स्वीकृति दी गई। इसमें 2007-2009 की 11वीं पंच वर्षीय योजना के तहत 1.86 लाख जैकेट तथा 2012-2017 की 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत 1.67 लाख बुलट प्रूफ जैकेट लेने का लक्ष्य रखा गया। लेकिन इतने दिनों में कई दौर के परीक्षण के बाद भी सरकार नौ दिन में अढ़ाई कोस ही चली है। सेना को टाटा डिफेंस से केवल 50 हजार जैकेटों की आपूर्ति प्रक्रिया ही शुरू हो पाई।
जवानों की शहादत का दबाव
पाकिस्तान से लगती नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आतंकी घुसपैठ जारी है। पाकिस्तान ने संघर्ष विराम का उल्लंघन करके आतंकियों की घुसपैठ में सह देने की कोशिशों को बढ़ा दिया है। ऐसे में सीमा पर डटे जवानों की शहादत का दबाव बढ़ रहा है। इंफैट्री के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल राजिन्दर सिंह कहते हैं कि सेना के जवानों की यह मांग काफी पहले पूरी होनी चाहिए थी। गौरतलब है कि 2017 में पाकिस्तान की सेना ने 860 बार नियंत्रण रेखा तथा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है। जबकि 2016 में यह संख्या 221 ही थी। भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों की इस कड़वाहट से सैनिकों की शहादत भी बढ़ी है। ऐसे में सरकार सुरक्षा के संसाधनों को लेकर दबाव में है।
जवानों की शहादत का दबाव
पाकिस्तान से लगती नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आतंकी घुसपैठ जारी है। पाकिस्तान ने संघर्ष विराम का उल्लंघन करके आतंकियों की घुसपैठ में सह देने की कोशिशों को बढ़ा दिया है। ऐसे में सीमा पर डटे जवानों की शहादत का दबाव बढ़ रहा है। इंफैट्री के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल राजिन्दर सिंह कहते हैं कि सेना के जवानों की यह मांग काफी पहले पूरी होनी चाहिए थी। गौरतलब है कि 2017 में पाकिस्तान की सेना ने 860 बार नियंत्रण रेखा तथा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है। जबकि 2016 में यह संख्या 221 ही थी। भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों की इस कड़वाहट से सैनिकों की शहादत भी बढ़ी है। ऐसे में सरकार सुरक्षा के संसाधनों को लेकर दबाव में है।