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G-20: जी-20 में जिनपिंग और पुतिन के न आने की चर्चा के क्या हैं कूटनीतिक मायने? पहले भी हो चुका है ऐसा

Sat, 02 Sep 2023 10:31 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Sat, 02 Sep 2023 10:31 PM IST
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सार
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आने या न आने पर संशय के बादल हैं। उनके ठहरने का इंतजाम मौर्या शेरटन होटल में है। सुईट भी जिनपिंग के नाम पर बुक है। वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन भारत को खास तवज्जो दे रहे हैं। जो बाइडन नई दिल्ली तीन दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं।
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What is the diplomatic meaning of Jinping and Putin absence in G20 Know all details
व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग - फोटो : Agency

विस्तार

जी-20 शिखर सम्मेलन की तैयारी पूरी हो गई है। रिहर्सल भी लगातार हो रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति और यूरोप के शिखर नेता नई दिल्ली में सम्मेलन में हिस्सा लेने की पीरू तैयारी कर चुके हैं। रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने संवेदनशील समय, यूक्रेन के साथ तनाव और तमाम परिस्थितियों के मद्देनजर आने में असमर्थता जताई है। उनके प्रतिनिधि के तौर पर विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव यहां होंगे। दूसरा बड़ा संशय चीन के राष्ट्रपति शी-जिनपिंग को लेकर बना हुआ है। प्रधानमंत्री ली छ्यांग के उनके प्रतिनिधि के तौर पर आने चर्चा है। लेकिन मेजबान भारत को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। दिल्ली शानदार तरीके से जी-20 शिखर सम्मलेन के संपन्न होने की हर कसर पूरी करने में व्यस्त है।



दिलचस्प है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आने या न आने पर संशय के बादल हैं। उनके ठहरने का इंतजाम मौर्या शेरटन होटल में है। सुईट भी जिनपिंग के नाम पर बुक है। वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन भारत को खास तवज्जो दे रहे हैं। जो बाइडन नई दिल्ली तीन दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं। यह अपने आपमें बड़ी बात है। जर्मन चांसलर समेत दुनिया के तमाम शिखर नेता दिल्ली आ रहे हैं।


विदेश नीति और कूटनीति में अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाले सूत्र का कहना है कि इस समय दुनिया नई चुनौतियों से गुजर रही है। जिओपालिटिक्स की पुर्नस्थापना ने तमाम जटिलताएं पैदा की हैं। सूत्र का कहना है कि यह बस वक्त की बात है। ऐसे में शी जिनपिंग हों या ब्लादिमीर पुतिन, उनके जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग न ले पाने से कौन सा ज़ायका बिगड़ जाएगा? पूर्व राजनयिक का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के शिखर नेता जी-20 शिखर सम्मेलन जैसे फोरम की शोभा हैं। उनके आने से सम्मेलन का न केवल रुतबा बढ़ता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का मिलजुलकर सामना करने का रोड मैप बनाने में मदद मिलती है। लेकिन तमाम व्यस्तताओं के कारण पहले भी शिखर सम्मेलन में राष्ट्राध्यक्ष अनुपस्थित रहे हैं। उनके प्रतिनिधियों ने कोरम पूरा किया है। यह कोई नई बात नहीं है और न ही इस तरह की स्थिति पहली बार आ रही है।

पहले भी राष्ट्राध्यक्षों ने व्यस्तता के कारण नहीं लिया सम्मेलन में हिस्सा
2021(कोविड-19 संक्रमण के बाद) के जी-20 शिखर सम्मेलन का मेजबान देश इटली था। इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने के दौरान कोई विशेष परिस्थिति नहीं थी। लेकिन इसके बावजूद छह देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने हिस्सा नहीं लिया था। इन देशों के राष्ट्राध्यक्षों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। 2008 से जी-20 के अब तक 16 शिखर सम्मेलन हो चुके हैं। एक शिखर सम्मेलन वर्चुअल माध्यम से हुआ था। 2009 और 2010 में दो-दो शिखर सम्मेलन हुए। लेकिन 2010 के बाद से अब तक कोई शिखर सम्मेलन ऐसा नहीं हो पाया जिसमें सभी राष्ट्राध्यक्षों ने भाग लिया हो। कभी छह, कभी पांच तो कभी चार राष्ट्राध्यक्षों के स्थान पर उनके प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया है। यूक्रेन में रूस के हमले के बाद 2022 में संपन्न हुए शिखर सम्मेलन में भी तीन देशों के राष्ट्राध्यक्ष नहीं शामिल हुए थे।

आखिर क्यों नहीं आ सकते हैं शी जिनपिंग?
शी जिनपिंग के न आने का अभी कयास भर है। चर्चा है कि प्रधानमंत्री ली छ्यांग उनके प्रतिनिधि के तौर पर शामिल होंगे। इस चर्चा का आधार प्रधानमंत्री ली छ्यांग का दक्षिण पूर्वी एशिया सम्मेलन में भाग लेना है। माना जा रहा है कि वहां के बाद ली भारत में आएंगे और जी-20 में प्रतिनिधि के तौर पर हिस्सा लेंगे। शी के दौरे के बारे में चीन के विदेश मंत्रालय ने अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। माना जा रहा है कि शी जिनपिंग भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभर रही छवि, जी-20 की मेजबानी को चीन के साथ एक प्रतिस्पर्धा के तौर पर देख रहे हैं। भारत एशिया में चीन के बाद सबसे महत्वपूर्ण देश है। इसके सामानांतर चीन अर्थ व्यवस्था की बड़ी चुनौती के दौर से गुजर रहा है। भारत के साथ सीमा संबंधी विवाद है और लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्र में उसकी सेना बड़ी संख्या में तैनात है। चीन ने जी-20 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले नक्शा भी जारी किया है। इस नक्शे में उसने अपने कई पड़ोसी देशों के भू-भाग को अपना दिखाया है। माना जा रहा है कि शी जिनपिंग के देश ने यह प्रयास अपने नागरिकों का ध्यान भटकाने के लिए किया है। उसके इस प्रयास से कई पड़ोसी देश चीन की आलोचना कर रहे हैं। यह चीन की एक पूर्व नियोजित योजना का हिस्सा बताया जा रहा है। वैसे भी चीन और अमेरिका ट्रेड वार के दौर से गुजर रहे हैं। अमेरिका भारत को अपने महत्वपूर्ण और विश्वसनीय सामरिक साझीदार की श्रेणी में रखता है। इसलिए माना जा रहा है कि सम्मेलन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग अनुपस्थित रहकर एक तीर से कई शिकार की योजना पर काम कर रहे हैं। इसके पीछे जी-20 शिखर सम्मेलन की भारत में मेजबानी की चमक को फीकी करने की योजना भी संभव है।  

चीन के राष्ट्रपति शी की अनुपस्थिति के नफा और नुकसान दोनों है
शी जिनपिंग के जी-20 शिखर सम्मेलन में न आने के नफा और नुकसान दोनों है। माना जा रहा है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में शी जिनपिंग की भारत में उपस्थिति अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन से भी अधिक महत्वपूर्ण है। वह परिस्थिति और मुद्दों के कारण आकर्षण का मुख्य केन्द्र हो सकते थे। ऐसे में शी जिनपिंग के न आने से जी-20 शिखर सम्मलेन का केन्द्र अंतरराष्ट्रीय मुद्दो और दूसरी तरफ केन्द्रित रहेगा। विदेश और कूटनीति के जानकारों का कहना है कि भारत का पड़ोसी देश चीन स्वयं को अमेरिका के समानांतर समझता है। अमेरिका और चीन के बीच कई मोर्चे पर द्वंद की स्थिति बनी हुई है। यूक्रेन में रूस के हमले के बाद से चीन को राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और रूस का रहस्यमय सहयोगी बताया जा रहा है। भारत के साथ लद्दाख क्षेत्र में उस पर सेना को पीछे ले जाने का दबाव है तो ताइवान में चीन की आक्रामक नीतियों पर अमेरिका खुलकर चेतावनी दे रहा है। इसलिए माना जा रहा है कि चीन संभावित अंतरराष्ट्रीय स्तर के दबाव को देखकर अपनी रणनीति को अंतिम रूप देगा। इससे भारत को अपने हितों, द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय चिंताओं पर चर्चा के समुचित अवसर से भी वंचित रहना पड़ सकता है।

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