फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   What is surrogacy? Everything you need to know

जानिए सरोगेसी की पूरी एबीसीडी, नए कानून से क्या होंगे बदलाव

Thu, 25 Aug 2016 11:56 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 25 Aug 2016 11:56 AM IST
विज्ञापन
What is surrogacy? Everything you need to know
सरोगेसी
केंद्रीय कैबिनेट ने सरोगेसी को कानूनों को सख्त बनाने की दिशा में बड़ी पहल की दी है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने सरोगेसी बिल के नए ड्राफ्ट को मंजूरी दी है। इससे किराए की कोख के व्यापार पर रोक लगेगी। नए बिल में कॉमर्शियल सरोगेसी को गैरकानूनी किया गया है और 'परोपकारी सरोगेसी' को मान्यता दी गई है। पढ़ें आखिर क्या है सरोगेसी और जरूरत पड़ी इस पर नए कानून बनाने की...
विज्ञापन


क्या है सरोगेसी?

सरोगेसी एक ऐसी प्रैक्टिस है जिसमें एक महिला किसी अन्य जोड़े के लिए बच्चे को अपनी कोख से जन्म देती है और जन्म के उस बच्चे पर उसके सभी अधिकार समाप्त हो जाते हैं। सरोगेसी मोटे तौर पर दो तरह ही होती है- परोपकारी सरोगेसी और कॉमर्शियल सरोगेसी। परोपकारी सरोगेसी में मेडिकल और इंश्योरेंस के खर्च को छोड़कर किसी भी तरह से आर्थिक फायदा नहीं उठाया जाता। वहीं, कॉमर्शियल सरोगेसी कोख को किराए पर लिया जाता है, इस तरह किसी के लिए बच्चे को जन्म देने के बदले सरोगेट मदर मेडिकल और अन्य संबंधित खर्च के अलावा आर्थिक लाभ की हकदार होती है। भारत में कॉमर्शियल सरोगेसी का बाजार बेहद बड़ा है।
विज्ञापन

 
नए कानून के बाद कौन ले सकेंगे किराए की कोख?

सिर्फ शादीशुदा जोड़े ही सरोगेसी के जरिए बच्चा प्राप्त कर सकेंगे। विदेशियों और एनआरआई के लिए भारत में सरोगेसी पूरी तरह प्रतिबंधित होगी। कोई जोड़ा शादी के 5 साल बाद ही सरोगेसी के जरिए बच्चा पाने का पात्र होगा। इसके लिए उन्हें पहले मेडिकल प्रमाण पत्र देना होगी कि जोड़ा बच्चे को जन्म नहीं दे सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन


कौन बन सकेंगी सरोगेट मदर? 

परिवार या नजदीकी रिश्तेदार महिला की सरोगेट मदर बन सकती हैं। इनसे पैदा हुआ बच्चा अगर विकलांग, मंदबुद्धि या लड़की या चाहे जो हो, उसे स्वीकार करना ही होगा। कोई महिला जीवन में एक बार से अधिक सरोगेट मदर नही बन सकेगी।

सरोगेसी का बाजार और नए बिल की अहमियत

What is surrogacy? Everything you need to know
सरोगेसी
बिल की अहमियत

स्वास्थ्य मंत्रालय पिछले 8 साल से लगातार जद्दोजहद कर रहा था। पहले सरोगेसी पर निगरानी की बात आई। इसके बाद सरोगेसी पर बैन लगाने का फैसला किया गया। सरोगेसी से ज्यादातर अमीर लोग ही बच्चे पैदा कर रहे हैं। ऐसे लोग आईवीएफ सेंटरों को 20 से 50 लाख रुपए तक देते हैं। पर किराए पर कोख देने वाली महिलाओं को 40 से 50 हजार रुपए ही मिलते हैं। लिहाजा यह बिल लाना जरूरी हो गया था। 
 
दुनिया में सरोगेसी

अमेरिका, ब्रिटेन समेत ज्यादातर देश सरोगेसी को गैर कानूनी करार दे चुके हैं। नेपाल, थाईलैंड ने पिछले साल ही सरोगेसी पर रोक लगाई है। अभी सिर्फ रूस, यूक्रेन जैसे कुछ देशों में ही सरोगेसी की सुविधा है। लिहाजा सारी दुनिया से लोग भारत में आकर किराए की कोख लेना चाहते हैं।
 
भारत में सरोगेसी
भारतमें सरोगेसी सबसे सस्ती पड़ती है। साथ ही कानून नहीं रहने के कारण पूरी दुनिया के लोग भारत रहे हैं। गुजरात और महाराष्ट्र में तो इसका हब बन चुका है। अवैध कारोबार चल रहा है। यूएनकी रिपोर्ट के मुताबिक भारत में सरोगेसी के 3000 से ज्यादा सेंटर हैं। जबकि दूर-दराज के इलाकों के सेंटरों के आंकड़े हैं भी नहीं। इसका सालाना करोबार तीन से चार हजार करोड़ रुपए तक का हो चुका है। 

कहां हो सकेगी सरोगेसी की प्रक्रिया?

-केवल उन्हीं क्लिनिक पर सरोगेसी हो सकेगी जो नए एक्ट के तहत रजिस्टर्ड होंगे।

-सरोगेसी हॉस्पिटल का कम से कम 25 साल पुराना रिकॉर्ड होना जरूरी होगा।
-
हॉस्पिटल या डॉक्टर या अन्य अधिकारी सरोगेसी से किसी प्रकार का आर्थिक लाभ नहीं ले सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed