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नेजल वैक्सीन: कोरोना के अन्य टीकों से कैसे अलग है यह, कितनी होगी कारगर? पीएम मोदी ने जताया है भरोसा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Tue, 08 Jun 2021 08:39 AM IST

सार

इंजेक्शन की जगह नेजल फॉर्म में कोरोना वैक्सीन विकसित करने पर तेजी से काम चल रहा है। बीते दिन अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेजल वैक्सीन का जिक्र किया था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
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विस्तार

देश में कोरोना महामारी पर काबू पाने के लिए तेजी से कोविड वैक्सीन का उत्पादन और टीकाकरण करने पर जोर दिया जा रहा है। देश में अभी दो कोरोना वैक्सीन- कोविशील्ड और कोवैक्सीन से लोगों का टीकाकरण किया जा रहा है। कोरोना वैक्सीन को लेकर कई तरह के प्रयोग अभी भी जारी हैं। इंजेक्शन की जगह नेजल फॉर्म में कोरोना वैक्सीन विकसित करने पर तेजी से काम चल रहा है। बीते दिन अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेजल वैक्सीन का जिक्र किया था। आइए जानते हैं कि क्या है नेजल वैक्सीन और मौजूदा वैक्सीन से यह कैसे अलग है....

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि कोरोना वैक्सीन को लेकर कई तरह के प्रयोग जारी हैं। नेजल वैक्सीन पर भी रिसर्च हो रही है। इसके चलते वैक्सीन को सिरिंज से न देकर नाक में स्प्रे किया जाएगा। अगर टेस्ट में कामयाबी मिली तो वैक्सीनेशन की मुहिम में और तेजी आएगी।


कैसे काम करती है नेजल वैक्सीन?
नेजल स्प्रे वैक्सीन को इंजेक्शन की बजाय नाक से दिया जाता है। यह नाक के अंदरुनी हिस्सों में इम्यून तैयार करती है। इसे ज्यादा कारगर इसलिए भी माना जाता है क्योंकि कोरोना समेत हवा से फैलने वाली अधिकांश बीमारियों के संक्रमण का रूट प्रमुख रूप से नाक ही होता है और उसके अंदरूनी हिस्सों में इम्युनिटी तैयार होने से ऐसे बीमारियों को रोकने में ज्यादा असरदार साबित होती है।

नेजल वैक्सीन के फायदे

क्या बाजार में मौजूद है कोई नेजल वैक्सीन?

बता दें कि इंफ्लूएंजा और नेजल फ्लू की नेजल वैक्सीन अमेरिका जैसे देशों में बाजार में उपलब्ध हैं। इसी तरह जानवरों में केनेल कफ के लिए कुत्तों को वैक्सीन नाक के रास्ते दिया जाता है। वर्ष 2004 में एंथ्रैक्स बीमारी के समय अफ्रीका में प्रयोग के तौर पर बंदर को नेजल वैक्सीन दिया गया था। 2020 में कोरोना वायरस महामारी के सामने आने के बाद चूहों और बंदरों में किए गए प्रयोग में पाया गया कि नाक के जरिये वैक्सीन देकर वायरस संक्रमण को रोका जा सकता है। इसके असर से नाक के अंदरुनी हिस्सों के निचले और ऊपरी हिस्सों में वायरल क्लियरेंस यानी प्रोटेक्शन पाया गया।
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