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GRAP-lll: दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए लागू 'ग्रैप' क्या है, यह कब प्रभावी होता है; कौन लेता है इसका फैसला?
Fri, 03 Nov 2023 07:37 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Fri, 03 Nov 2023 07:37 PM IST
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दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए लागू 'ग्रैप'
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amar ujala
विस्तार
इन दिनों देश की राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में हवा जहर का रूप ले चुकी है। ऐसी आबोहवा में लोगों को सांस लेने में समस्या हो रही है। स्विस समूह IQAir के मुताबिक, दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की रियल टाइम लिस्ट में नई दिल्ली फिर से शीर्ष पर है। शुक्रवार को राजधानी के AQI को 640 पर 'खतरनाक' श्रेणी में रखा गया। आज नई दिल्ली में वायु गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन के वार्षिक वायु गुणवत्ता दिशानिर्देश मूल्य से 53.4 गुना अधिक थी।उधर बढ़ते प्रदूषण के बीच दिल्ली सरकार ने बैठक बुलाई जिसमें ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) का तीसरा चरण को कड़ाई से लागू कराने को लेकर चर्चा हुई। इससे पहले गुरुवार को पूरे एनसीआर में ग्रैप के तीसरे चरण के तहत 8 सूत्रीय कार्य योजना को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया। ऐसे में सवाल उठते हैं कि आखिर ग्रैप क्या होता है? ग्रैप कार्य योजना में कितने चरण होते हैं? दिल्ली में लागू तीसरा चरण क्या है?
दिल्ली में प्रदूषण
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Amar ujala
आखिर ग्रैप होता क्या है?
पिछले कुछ वर्षों में देश की राजधानी दिल्ली अक्तूबर-नवंबर के महीनों में गैस चैंबर बनती रही है। इस समय पर हवा की गुणवत्ता बताने वाला वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 'खतरनाक' श्रेणी में बना रहता है जिससे लोगों के बीमार होने का भी खतरा बना रहता है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए 2 दिसंबर 2016 में एमसी मेहता बनाम भारत संघ के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। आदेश के अनुसार, विभिन्न वायु गुणवत्ता सूचकांक के तहत कार्यान्वयन के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ग्रैप तैयार किया गया है।
राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक में एक्यूआई की कई श्रेणियों में शामिल किया गया है जिसमें मध्यम और खराब, बहुत खराब और गंभीर शामिल हैं। 'गंभीर+ या आपातकालीन' की एक नई श्रेणी बाद में जोड़ी गई है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण के जरिए ग्रैप के कार्यान्वयन के लिए अधिसूचित किया गया है।
पिछले कुछ वर्षों में देश की राजधानी दिल्ली अक्तूबर-नवंबर के महीनों में गैस चैंबर बनती रही है। इस समय पर हवा की गुणवत्ता बताने वाला वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 'खतरनाक' श्रेणी में बना रहता है जिससे लोगों के बीमार होने का भी खतरा बना रहता है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए 2 दिसंबर 2016 में एमसी मेहता बनाम भारत संघ के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। आदेश के अनुसार, विभिन्न वायु गुणवत्ता सूचकांक के तहत कार्यान्वयन के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ग्रैप तैयार किया गया है।
राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक में एक्यूआई की कई श्रेणियों में शामिल किया गया है जिसमें मध्यम और खराब, बहुत खराब और गंभीर शामिल हैं। 'गंभीर+ या आपातकालीन' की एक नई श्रेणी बाद में जोड़ी गई है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण के जरिए ग्रैप के कार्यान्वयन के लिए अधिसूचित किया गया है।
दिल्ली-एनसीआर को बीमार कर रहा प्रदूषण
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ग्रैप कार्य योजना में कितने चरण होते हैं?
ग्रैप को दिल्ली एनसीआर में प्रतिकूल वायु गुणवत्ता के 4 विभिन्न चरणों के हिसाब से बांटा गया गया है। ग्रैप का चरण-l उस वक्त लागू होता है, जब दिल्ली में AQI का स्तर 201-300 के बीच होता है।
ग्रैप का दूसरा चरण उस परिस्थिति में प्रभावी होता है, जब राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 301-400 के बीच 'बहुत खराब' मापा जाता है। चरण II के तहत कार्रवाई एक्यूआई के 301-400 के अनुमानित स्तर तक पहुंचने से कम से कम तीन दिन पहले शुरू की जाती है।
चरण III 'गंभीर' वायु गुणवत्ता के बीच लागू किया जाता है। इस वक्त दिल्ली में एक्यूआई 401-450 के बीच होता है। ग्रैप के चरण III के तहत कार्रवाई एक्यूआई के 400 से अधिक के अनुमानित स्तर तक पहुंचने से कम से कम तीन दिन पहले शुरू की जाती है।
ग्रैप कार्य योजना का अंतिम और चरण IV 'गंभीर +' वायु गुणवत्ता की परिस्थिति में लागू किया जाता है। इस दौरान दिल्ली में AQI स्तर 450 से ज्यादा होना चाहिए। दूसरे और तीसरे चरण की तरह चरण IV के तहत कार्रवाई एक्यूआई के 450 के अनुमानित स्तर तक पहुंचने से कम से कम तीन दिन पहले ही शुरू की जाती है।
ग्रैप को दिल्ली एनसीआर में प्रतिकूल वायु गुणवत्ता के 4 विभिन्न चरणों के हिसाब से बांटा गया गया है। ग्रैप का चरण-l उस वक्त लागू होता है, जब दिल्ली में AQI का स्तर 201-300 के बीच होता है।
ग्रैप का दूसरा चरण उस परिस्थिति में प्रभावी होता है, जब राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 301-400 के बीच 'बहुत खराब' मापा जाता है। चरण II के तहत कार्रवाई एक्यूआई के 301-400 के अनुमानित स्तर तक पहुंचने से कम से कम तीन दिन पहले शुरू की जाती है।
चरण III 'गंभीर' वायु गुणवत्ता के बीच लागू किया जाता है। इस वक्त दिल्ली में एक्यूआई 401-450 के बीच होता है। ग्रैप के चरण III के तहत कार्रवाई एक्यूआई के 400 से अधिक के अनुमानित स्तर तक पहुंचने से कम से कम तीन दिन पहले शुरू की जाती है।
ग्रैप कार्य योजना का अंतिम और चरण IV 'गंभीर +' वायु गुणवत्ता की परिस्थिति में लागू किया जाता है। इस दौरान दिल्ली में AQI स्तर 450 से ज्यादा होना चाहिए। दूसरे और तीसरे चरण की तरह चरण IV के तहत कार्रवाई एक्यूआई के 450 के अनुमानित स्तर तक पहुंचने से कम से कम तीन दिन पहले ही शुरू की जाती है।
दिल्ली में बढ़ा वायु प्रदूषण
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ग्रैप को लागू कौन करता है?
ग्रैप पर बनाई गई उप-समिति अग्रिम कार्रवाई की योजना बनाने के लिए समय-समय पर बैठक करती है। इसके साथ है उप-समिति मौजूदा वायु गुणवत्ता और एक्यूआई पूर्वानुमान के आधार पर के विभिन्न प्रावधानों को लागू करने के लिए आवश्यक आदेश जारी करती है।
उप-समिति ग्रैप के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार विभिन्न एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाइयों की भी समीक्षा करती है। एनसीआर में आने वाले राज्यों और दिल्ली के मुख्य सचिव अक्सर ग्रैप के कार्यों और कार्यान्वयन की समीक्षा करेंगे, खासकर जब हवा की गुणवत्ता गिरती है या 'गंभीर' या 'गंभीर +' श्रेणी में गिरने की आशंका होती है।
ग्रैप पर बनाई गई उप-समिति अग्रिम कार्रवाई की योजना बनाने के लिए समय-समय पर बैठक करती है। इसके साथ है उप-समिति मौजूदा वायु गुणवत्ता और एक्यूआई पूर्वानुमान के आधार पर के विभिन्न प्रावधानों को लागू करने के लिए आवश्यक आदेश जारी करती है।
उप-समिति ग्रैप के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार विभिन्न एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाइयों की भी समीक्षा करती है। एनसीआर में आने वाले राज्यों और दिल्ली के मुख्य सचिव अक्सर ग्रैप के कार्यों और कार्यान्वयन की समीक्षा करेंगे, खासकर जब हवा की गुणवत्ता गिरती है या 'गंभीर' या 'गंभीर +' श्रेणी में गिरने की आशंका होती है।
प्रदूषण
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दिल्ली में लागू तीसरे चरण में क्या शामिल है?
गुरुवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 392 रहा। मौजूदा वायु गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए और क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में आगे गिरावट को रोकने के लिए उप-समिति ने 2 नवंबर को ग्रैप-3 के तहत सभी कार्रवाइयों को तत्काल प्रभाव से पूरे एनसीआर में लागू करने की बात कही। यह चरण 'गंभीर' वायु गुणवत्ता यानी एक्यूआई 401-450 के बीच होने पर लागू किया जाता है। बता दें कि 2022 में ग्रैप का चरण-III अक्तूबर के महीने में ही लागू किया गया था, इस साल संशोधित ग्रैप का चरण-III नवंबर में लागू किया गया है।
ग्रैप-III के तहत 8 सूत्रीय कार्य योजना 2 नवंबर से पूरे एनसीआर में तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इस 8 सूत्रीय कार्य योजना में विभिन्न एजेंसियों और एनसीआर के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और डीपीसीसी की ओर से किए जाने वाले कदम शामिल हैं। ये कदम इस प्रकार हैंः
1. सड़कों की मशीन/वैक्यूम आधारित की जाने वाली सफाई की संख्या बढ़ाना।
2. सड़कों पर विशेषतौर पर हॉटस्पॉट, ज्यादा यातायात वाले रास्तों पर पीक ट्रैफिक वाले घंटों से पहले धूल रोकने के साथ रोज पानी का छिड़काव और इकट्ठा की गई धूल आदि को निर्धारित स्थलों या लैंडिफल में डालना।
3. सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बढ़ाना। पीक टाइम से इतर यात्रा को प्रोत्साहित करने के लिए अलग-अलग दरें शुरू करना।
4. कुछ अपवादों को छोड़कर निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियां प्रतिबंधित करना।
5. स्टोन क्रशर का संचालन बंद करना।
6. एनसीआर में खनन और संबंधित गतिविधियों को बंद रखा जाएगा।
7. दिल्ली और गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर जिलों में बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल एलएमवी (4 पहिया) पर प्रतिबंध।
8. एनसीआर में पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए स्कूलों में कक्षाएं बंद करने और ऑनलाइन मोड में कक्षाएं संचालित करने का विकल्प।
गुरुवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 392 रहा। मौजूदा वायु गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए और क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में आगे गिरावट को रोकने के लिए उप-समिति ने 2 नवंबर को ग्रैप-3 के तहत सभी कार्रवाइयों को तत्काल प्रभाव से पूरे एनसीआर में लागू करने की बात कही। यह चरण 'गंभीर' वायु गुणवत्ता यानी एक्यूआई 401-450 के बीच होने पर लागू किया जाता है। बता दें कि 2022 में ग्रैप का चरण-III अक्तूबर के महीने में ही लागू किया गया था, इस साल संशोधित ग्रैप का चरण-III नवंबर में लागू किया गया है।
ग्रैप-III के तहत 8 सूत्रीय कार्य योजना 2 नवंबर से पूरे एनसीआर में तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इस 8 सूत्रीय कार्य योजना में विभिन्न एजेंसियों और एनसीआर के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और डीपीसीसी की ओर से किए जाने वाले कदम शामिल हैं। ये कदम इस प्रकार हैंः
1. सड़कों की मशीन/वैक्यूम आधारित की जाने वाली सफाई की संख्या बढ़ाना।
2. सड़कों पर विशेषतौर पर हॉटस्पॉट, ज्यादा यातायात वाले रास्तों पर पीक ट्रैफिक वाले घंटों से पहले धूल रोकने के साथ रोज पानी का छिड़काव और इकट्ठा की गई धूल आदि को निर्धारित स्थलों या लैंडिफल में डालना।
3. सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बढ़ाना। पीक टाइम से इतर यात्रा को प्रोत्साहित करने के लिए अलग-अलग दरें शुरू करना।
4. कुछ अपवादों को छोड़कर निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियां प्रतिबंधित करना।
5. स्टोन क्रशर का संचालन बंद करना।
6. एनसीआर में खनन और संबंधित गतिविधियों को बंद रखा जाएगा।
7. दिल्ली और गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर जिलों में बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल एलएमवी (4 पहिया) पर प्रतिबंध।
8. एनसीआर में पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए स्कूलों में कक्षाएं बंद करने और ऑनलाइन मोड में कक्षाएं संचालित करने का विकल्प।