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आइए जानते हैं सीबीआई के बारे में: इसके काम करने का तरीका और अधिकार

Sat, 22 Aug 2020 05:32 PM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, नई दिल्ली Published by: अनिल पांडेय Updated Sat, 22 Aug 2020 05:32 PM IST
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What is CBI and its power and jurisdiction how sushant singh murder investigation started by cbi
सीबीआई के अधिकार और इतिहास - फोटो : iStock

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की 16 सदस्यों की टीम मुंबई पहुंचकर अपनी जांच शुरू कर चुकी है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने सुशांत के रूममेट सिद्धार्थ पिठानी और रसोइया नीरज सिंह से भी पूछताछ की है। इसी के साथ मौत का सीन भी रिक्रिएट किए जाने की खबर है। अमर उजाला डॉट कॉम आपको इस खबर से जुड़ी हर जानकारी दे रहा है।

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सुशांत सिंह की मौत की जांच सीबीआई कर रही है। लेकिन क्या वजह है कि मुंबई पुलिस के होते हुए भी यह जांच केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी गई। आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा। इसी प्रकार के कई और सवाल भी हो सकते हैं जिनके बारे में आप जानना चाहेंगे। आखिर यह जांच सीबीआई को ही क्यों दी गई। सीबीआई क्या है, उसकी जांच का तरीका क्या होगा। क्या सीबीआई पुलिस से अलग है या पुलिस ही है। ऐसे ही सवालों के जवाब आपको यहां मिलेंगे। पहले एक नजर सुशांत मामले के अब तक के अपडेट पर:
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सीबीआई के सामने क्या चुनौतियां हैं?

  • सुशांत की मौत को 60 से ज्यादा दिन हो गए हैं। घटना स्थल पर सबूत पूरी तरह मिट चुके होंगे। सीबीआई के पास सिर्फ मौके से ली गई तस्वीरें ही जांच के लिए सहारा होंगी।
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  • मुंबई पुलिस का पूरा रिकॉर्ड मराठी भाषा में है और उसे मराठी से अंग्रेजी में अनुवाद किया जाएगा, जिसमें समय लग सकता है। इन दस्तावेजों में 56 गवाहों के बयान भी शामिल हैं।
  • सुशांत की मौत का कोई भी चश्मदीद गवाह नहीं है। केवल एक व्यक्ति है जिसने शव को फंदे से उतारा था।
  • ऐसे में सुशांत का शव कहां और किस अवस्था में था उसके पैर कहां पर थे इन बातों को समझने के लिए भी सीबीआई को मशक्कत करनी पड़ेगी।

सीबीआई के कब्जे में क्या है:

  • सुशांत के तीन मोबाइल फोन, लैपटॉप।
  • वो मग जिसमें सुशांत ने जूस पिया था।
  • सुशांत ने उस समय जो कपड़े पहने थे और फंदे के लिए इस्तेमाल में किए गए हरे रंग का कपड़ा।
  • अटोप्सी और फोरेंसिक रिपोर्ट।
  • सुशांत के घर और फॉर्म हाउस से बरामद डायरी।
  • 13 से 14 जून की सीसीटीवी फुटेज।
  • रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती और इस केस से जुड़े सभी लोगों की सीडीआर।
  • 56 गवाहों के बयान की कॉपी।

सुशांत के रसोइए का 40 पन्नों का बयान
जांच के पहले दिन यानी शुक्रवार को सीबीआई की एक टीम ने सुशांत के घर पर खाना बनाने वाले नीरज सिंह से पूछताछ की थी। 40 पन्नों में उसका बयान दर्ज किया गया है।

सीबीआई के सामने सवाल

  • सीबीआई की जांच का मुख्य आधार बिहार पुलिस की एफआईआर पर आधारित होगी। इसमें आत्महत्या के लिए उकसाने, धोखाधड़ी और साजिश रचने का मुकदमा दर्ज किया गया था।
  • सुशांत सिंह राजपूत की मौत खुदकुशी है या मर्डर? दोनों के पीछे की वजह क्या हो सकती है।
  • सुशांत की मौत में रिया, उनके परिवार, बॉलीवुड से जुड़े लोग और उसके घर पर काम करने वाले लोगों की क्या भूमिका थी?
  • पैसों के लेन-देन, कमाई और सुशांत के पिता द्वारा लगाए आरोपों की जांच।
  • सुशांत की बीमारी और उनके डॉक्टर्स के दावों की पड़ताल।
  • पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को परखना और फॉरेंसिक रिपोर्ट से इसका मिलान करना।
  • कॉल डिटेल्स की पड़ताल।
  • इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का पता लगाना।


अब यह भी जान लीजिए कि सीबीआई क्या है और कब-कैसे जांच करती है
सीबीआई, कार्मिक विभाग, कार्मिक पेंशन तथा लोक शिकायत मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन कार्यरत एक प्रमुख जांच एजेंसी है। यह एक नोडल पुलिस एजेंसी भी है, जो इंटरपोल के सदस्य-राष्ट्रों के अन्वेषण का समन्वयन करती है। एक भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी से हटकर सीबीआई एक बहुआयामी, बहु-अनुशासनात्मक केंद्रीय पुलिस, क्षमता, विश्वसनीयता और विधि शासनादेश का पालन करते हुए जांच करने वाली एक विधि प्रवर्तन एजेंसी है और यह भारत में कहीं भी अपराधों का अभियोजन करती है।

सीबीआई की आवश्यकता क्यों?
माना जाता है कि दूसरे विश्वयुद्ध की शुरुआत में ब्रिटिश सरकार के खर्चों में उल्लेखनीय रूप से तेज वृद्धि हुई थी। जिसकी वजह से देश में भ्रष्ट कारोबारियों तथा सरकारी अधिकारियों की लूट-खसोट काफी बढ़ गई थी। चूंकि स्थानीय पुलिस इस प्रकार के मामलों की पड़ताल करने में समर्थ नहीं थी, इसलिए ब्रिटिश सरकार को एक दक्ष और विशेष पुलिस बल की जरूरत महसूस हुई।

इसलिए 1941 में विशेष पुलिस की स्थापना (स्पेशल पुलिस एस्टैबलिशमेंट-एसपीई) की गई थी। युद्ध के बाद के वर्षों में भी एक केंद्रीय जांच एजेंसी की आवश्यकता महसूस की गई। तब 1946 में अस्तित्व में आया दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम (Delhi Special Police Establishment-DPSE Act)। इस अधिनियम ने विशेष पुलिस स्थापना की देखरेख गृह विभाग को हस्तांतरित कर दी गई और इसके कार्यों की परिधि में भारत सरकार के सभी विभागों को शामिल कर लिया गया।

राज्यों की सहमति से इसे राज्यों में भी लागू किया जाता है। बाद में 1963 में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना का नाम बदलकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation-CBI) कर दिया गया। हालांकि, आज भी सीबीआई का कार्यक्षेत्र 1946 में बने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम से ही निर्धारित होता है।

किन मामलों की जांच सीबीआई करती है?

शुरुआत में विशेष पुलिस स्थाना की दो शाखाएं थीं:
  1. सामान्य अपराध शाखा
  2. आर्थिक अपराध शाखा

डीएसपीई अधिनियम के तहत सामान्य अपराध शाखा केंद्र सरकार और सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों के उन कर्मचारियों की जांच करती थी, जिनके बारे में यह संदेह होता था कि वे रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार में लिप्त हैं तथा आर्थिक अपराध शाखा आर्थिक/राजकोषीय नियमों के उल्लंघन के विभिन्न मामलों की जांच करती थी। प्रतिभूति घोटाले से संबंधित मामलों और आर्थिक अपराधों में वृद्धि होने के कारण कार्य की अधिकता और भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण की वह से 1994 में अलग से एक अपराध शाखा स्थापित की गई थी।

परंपरागत अपराधों की जांच कब शुरू हुई?
एक भ्रष्टाचार निरोधी जांच एजेंसी के रूप में काम शुरू करने वाली सीबीआई को समय बीतने के साथ-साथ सरकार और न्यायपालिका के विभिन्न क्षेत्रों से पारंपरिक अपराध व अन्य विशिष्ट मामलों की जांच के अनुरोध मिलने शुरू हो गए थे। 1980 के दशक की शुरुआत से संवैधानिक न्यायालयों ने भी खोजबीन और जांच के लिए सीबीआई को मामले भेजने शुरू कर दिए थे।

सीबीआई का अधिकार क्षेत्र
डीएसपीई अधिनियम 1946 की धारा 2 के तहत केवल केंद्रशासित प्रदेशों में अपराधों की जांच के लिए सीबीआई को शक्ति प्राप्त है। हालांकि, केंद्र द्वारा रेलवे तथा राज्यों जैसे अन्य क्षेत्रों में उनके अनुरोध पर इसके अधिकार क्षेत्र को बढ़ाया जा सकता है। वैसे सीबीआई केवल केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित मामलों की जांच के लिए अधिकृत है। कोई भी व्यक्ति केंद्र सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और राष्ट्रीयकृत बैंकों में भ्रष्टाचार के मामले की शिकायत सीबीआई से कर सकता है। इसके अलावा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामलों में सीबीआई स्वयं कार्रवाई कर सकती है।

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