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'वह एक आतंकवादी की तरह लग रहा था': और इस तरह कर्नाटक में भीड़ हिंसा अंजाम तक पहुंची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Updated Mon, 30 Jul 2018 06:47 PM IST
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मुर्की में भीड़ हिंसा का शिकार हुए मोहम्मद आजम
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हैदराबाद में सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करने वाले मोहम्मद आजम कुछ समय पहले बीदर जिले के मुर्की गांव में भीड़ हिंसा का शिकार हो गए थे। हिंसक भीड़ का निशाना बने आजम और उनके चार दोस्तों को बचाने के लिए पहुंचे आठ पुलिसकर्मी भी भीड़ के गुस्से का शिकार बन गए थे।
पुलिस इंस्पेक्टर वीबी यादवद उस मनहूस दिन को याद करते हुए और अपने पीठ के जख्मों को दिखाते हुए कहते हैं, "हमने उन्हें रोकने के बहुत कोशिश की, लेकिन वे किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थे।"
13 जुलाई को मुर्की में 200 से ज्यादा लोगों की भीड़ अफवाह के आधार पर पांच लोगों को बच्चा चोर गिरोह का मानकर उनपर जानलेवा हमला किया था।
इस हमले में ब्रिटेन से इंफॉर्मेशन टेक्नॉलजी की पढ़ाई कर चुके और भारत में टेक्नॉलजी के गढ़ हैदराबाद में काम करने वाले मोहम्मद आजम की जान चली गई, जबकि उनके दो दोस्त बहुत बुरी तरह जख्मी हो गए। इस हमले में आठ पुलिस अधिकारी भी घायल हो गए जिनमें दो की गंभीर रूप से जख्मी हुए।
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आजम 32 वर्ष के थे और वैश्विक कंसलटेंसी फर्म एक्सेंचर के लिए काम करते थे। भारत में फैल रही भीड़ हिंसा की लहर के ताजा पीड़ित में से एक हैं। बच्चों के अपहरण के बारे में झूठे संदेश सोशल मीडिया फेसबुक की मैसेजिंग सेवा व्हॉट्सएप के जरिये फैलाए जा रहे हैं और इस चुनौती से मुकाबला करने में पुलिस सक्षम नहीं दिखती।
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पुलिस इंस्पेक्टर वीबी यादवद उस मनहूस दिन को याद करते हुए और अपने पीठ के जख्मों को दिखाते हुए कहते हैं, "हमने उन्हें रोकने के बहुत कोशिश की, लेकिन वे किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थे।"
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13 जुलाई को मुर्की में 200 से ज्यादा लोगों की भीड़ अफवाह के आधार पर पांच लोगों को बच्चा चोर गिरोह का मानकर उनपर जानलेवा हमला किया था।
इस हमले में ब्रिटेन से इंफॉर्मेशन टेक्नॉलजी की पढ़ाई कर चुके और भारत में टेक्नॉलजी के गढ़ हैदराबाद में काम करने वाले मोहम्मद आजम की जान चली गई, जबकि उनके दो दोस्त बहुत बुरी तरह जख्मी हो गए। इस हमले में आठ पुलिस अधिकारी भी घायल हो गए जिनमें दो की गंभीर रूप से जख्मी हुए।
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आजम 32 वर्ष के थे और वैश्विक कंसलटेंसी फर्म एक्सेंचर के लिए काम करते थे। भारत में फैल रही भीड़ हिंसा की लहर के ताजा पीड़ित में से एक हैं। बच्चों के अपहरण के बारे में झूठे संदेश सोशल मीडिया फेसबुक की मैसेजिंग सेवा व्हॉट्सएप के जरिये फैलाए जा रहे हैं और इस चुनौती से मुकाबला करने में पुलिस सक्षम नहीं दिखती।
भारत सरकार का कहना है कि वह भीड़ हिंसा के आंकड़े नहीं जुटा रही है। लेकिन डाटा पोर्टल इंडियास्पेंड के मुताबिक जनवरी 2017 से भीड़ हिंसा की ऐसी 70 घटनाओं में 30 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
भीड़ हिंसा को रोकने में नाकाम रहने के विपक्ष और जनता की आलोचना का सामना कर रही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने व्हॉट्सएप को दोषी ठहराया है। साथ ही व्हॉट्सएप को चेतावनी दी है कि अफवाह की रोकथाम नहीं की गई तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
20 जुलाई को व्हॉट्सएप ने सरकार को जवाब दिया कि वह संदेशों को आगे भेजने वालों की संख्या कम कर रही है और फेक न्यूज (अफवाह) की रोकथाम की दिशा में कुछ और कदम उठा रही है। लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि इससे भीड़ हिंसा कितना रूक पाएगी।
दक्षिणी तेलंगाना राज्य जहां कुछ हालिया भीड़ हिंसा की घटनाएं हुईं हैं, वहां तैनात पुलिस अधीक्षक रेमा राजेश्वरी ने कहती हैं, "भारत धार्मिक और जाति के फॉलट लाइन के कारण पहले से ही कमजोर है, जब आप इस मिश्रण में व्हाट्सएप को जोड़ देते हैं, तो चीजें आसानी से नियंत्रण से बाहर हो सकती हैं।"
भीड़ हिंसा को रोकने में नाकाम रहने के विपक्ष और जनता की आलोचना का सामना कर रही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने व्हॉट्सएप को दोषी ठहराया है। साथ ही व्हॉट्सएप को चेतावनी दी है कि अफवाह की रोकथाम नहीं की गई तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
20 जुलाई को व्हॉट्सएप ने सरकार को जवाब दिया कि वह संदेशों को आगे भेजने वालों की संख्या कम कर रही है और फेक न्यूज (अफवाह) की रोकथाम की दिशा में कुछ और कदम उठा रही है। लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि इससे भीड़ हिंसा कितना रूक पाएगी।
दक्षिणी तेलंगाना राज्य जहां कुछ हालिया भीड़ हिंसा की घटनाएं हुईं हैं, वहां तैनात पुलिस अधीक्षक रेमा राजेश्वरी ने कहती हैं, "भारत धार्मिक और जाति के फॉलट लाइन के कारण पहले से ही कमजोर है, जब आप इस मिश्रण में व्हाट्सएप को जोड़ देते हैं, तो चीजें आसानी से नियंत्रण से बाहर हो सकती हैं।"
पुलिस के मुताबिक आजम अपने चार दोस्तों के साथ घूमने के गाड़ी से निकले थे। जब वे घूमकर वापस हैदराबाद लौट रहे थे तो रास्ते में थोउल हेमलेट में सलहाम ने कुछ बच्चों को खेलते हुए देखा। मानवता के नाते उन्हें गरीब बच्चों को चॉक्लेट देने का ख्याल आया। अनजान लोगों को चॉकलेट देता हुआ देख गांव वालों ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया। भीड़ में से ही किसी ने इस घटना का वीडियो बनाआ और दूसरे गांव के अपने दोस्तों को व्हॉट्सएप के जरिये भेज दिया।
रॉयटर्स ने घटना का एक वीडियो देखा जिसके मुताबिक सलहम अल कुबस्सी को सबसे पहले पीटा गया। कुबस्सी कतर का नागरिक है और आजम के दोस्त थे।
भीड़ से बचकर ये अपनी गाड़ी से भागने में कामियाब हुए। लेकिन गांववालों ने रास्ता रोकने के लिए पेड़ का बड़ा सा तना डाल रखा था। जब ये लोग मुरकी गांव पहुंचे तो यहां लोगों ने उनका रास्ता रोक लिया। भीड़ को हटाने के चक्कर में उनकी गाड़ी दीवार से टकरा गई। इसके बाद थाउल हेमलेट के निवासी भी वहां आ गए और दोनों गांव के लोगों ने डंडों और पत्थरों से उनपर हमला कर दिया।
पुलिस का कहना है कि मुर्की में या उसके आस-पास कोई बच्चा अपहरण की घटना नहीं हुई थी। बाल तस्करी भारत में एक समस्या है और कई बच्चों को गुलाम बनाकर विशेष तौर पर मजबूरन मजदूरी के लिए बेचा दिया जाता है। सरकार के ट्रैक चाइल्ड पोर्टल के मुताबिक जनवरी 2012 और मार्च 2017 के बीच लगभग 2,50,000 (ढाई लाख) बच्चे गायब हो गए।
रॉयटर्स ने घटना का एक वीडियो देखा जिसके मुताबिक सलहम अल कुबस्सी को सबसे पहले पीटा गया। कुबस्सी कतर का नागरिक है और आजम के दोस्त थे।
भीड़ से बचकर ये अपनी गाड़ी से भागने में कामियाब हुए। लेकिन गांववालों ने रास्ता रोकने के लिए पेड़ का बड़ा सा तना डाल रखा था। जब ये लोग मुरकी गांव पहुंचे तो यहां लोगों ने उनका रास्ता रोक लिया। भीड़ को हटाने के चक्कर में उनकी गाड़ी दीवार से टकरा गई। इसके बाद थाउल हेमलेट के निवासी भी वहां आ गए और दोनों गांव के लोगों ने डंडों और पत्थरों से उनपर हमला कर दिया।
पुलिस का कहना है कि मुर्की में या उसके आस-पास कोई बच्चा अपहरण की घटना नहीं हुई थी। बाल तस्करी भारत में एक समस्या है और कई बच्चों को गुलाम बनाकर विशेष तौर पर मजबूरन मजदूरी के लिए बेचा दिया जाता है। सरकार के ट्रैक चाइल्ड पोर्टल के मुताबिक जनवरी 2012 और मार्च 2017 के बीच लगभग 2,50,000 (ढाई लाख) बच्चे गायब हो गए।
मुर्की गांव के निवासियों ने कहा कि वे कई महीनों से बच्चों के अपहरण गिरोहों के बारे में सुन रहे थे। कथित बाल अपहरणकर्ताओं द्वारा बच्चों के शरीर को विकृत कर दिए गए फोटो और वीडियो भारत के कई हिस्सों में व्हाट्सएप के जरिये फैल रहे हैं। पुलिस ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को कुछ ऐसी ही एकत्र की गई सामग्री दिखाई।
तेलंगाना में पुलिस अधीक्षक राजेश्वरी कहती हैं, "समस्या यह है कि लोग पढ़ने या लिखने के काबिल नहीं हो सकते हैं, लेकिन हर कोई फोटो और वीडियो को देखकर समझ सकता है।"
आजम की हत्या के बाद मुर्की गांव के लोग सकते में हैं। पुलिस ने पूछताछ के लिए 30 से ज्यादा आदमी और औरतों को गिफ्तार किया है जिसके बाद लोग इस हत्या के बारे में बात करने से भी डर रहे हैं। हालांकि किसी के खिलाफ अभी आरोप तय नहीं किए गए हैं।
गांव के बुजुर्ग शख्स विजय बिरदर से जब पूछा गया कि गांव वालों ने उन पांच लोगों पर हमला क्यों किया, तो उन्होंने कहा, "लोगों ने गलती की।"
उन्होंने आगे कहा, "क्या आपने कुबस्सी का चेहरा देखा था? उसकी बड़ी दाढ़ी? वह एक आतंकवादी की तरह लग रहा था।"
तेलंगाना में पुलिस अधीक्षक राजेश्वरी कहती हैं, "समस्या यह है कि लोग पढ़ने या लिखने के काबिल नहीं हो सकते हैं, लेकिन हर कोई फोटो और वीडियो को देखकर समझ सकता है।"
आजम की हत्या के बाद मुर्की गांव के लोग सकते में हैं। पुलिस ने पूछताछ के लिए 30 से ज्यादा आदमी और औरतों को गिफ्तार किया है जिसके बाद लोग इस हत्या के बारे में बात करने से भी डर रहे हैं। हालांकि किसी के खिलाफ अभी आरोप तय नहीं किए गए हैं।
गांव के बुजुर्ग शख्स विजय बिरदर से जब पूछा गया कि गांव वालों ने उन पांच लोगों पर हमला क्यों किया, तो उन्होंने कहा, "लोगों ने गलती की।"
उन्होंने आगे कहा, "क्या आपने कुबस्सी का चेहरा देखा था? उसकी बड़ी दाढ़ी? वह एक आतंकवादी की तरह लग रहा था।"