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पश्चिम बंगाल में SIR के बाद मतदाता सूची: कई जिलों में हार्ड कॉपी जारी, कट सकते हैं इतने लाख मतदाताओं के नाम

Sat, 28 Feb 2026 12:11 PM IST
Riya Dubey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: Riya Dubey Updated Sat, 28 Feb 2026 12:11 PM IST
सार

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में SIR के बाद संशोधित मतदाता सूची को चरणबद्ध तरीके से जारी करना शुरू किया है, लेकिन यह अभी ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है। सूची में मतदाताओं को तीन श्रेणियों में बांटा गया है, जबकि बड़ी संख्या में नामों की जांच अभी भी जारी है और अंतिम आंकड़ों पर स्पष्टता नहीं दी गई है।

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West Bengal voter list released after SIR: find out how many voters' names have been deleted
पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद मतदाता सूची जारी - फोटो : डीडी न्यूज

विस्तार

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची का प्रकाशन चरणबद्ध तरीके से शुरू कर दिया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राज्य के विभिन्न जिलों में संशोधित मतदाता सूची की हार्ड कॉपियां जारी की जा रही हैं, जबकि ऑनलाइन सूची अभी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

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मतदाताओं को कैसे बांटा गया?

आयोग के सूत्रों के अनुसार, मतदाता सूची से हटाए गए नामों की कुल संख्या के बारे में अभी तक कोई स्पष्टता नहीं मिली है, लेकिन केवल बैंकुरा जिले में ही करीब 1.35 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका जताई जा रही है। प्रकाशित सूची में कुल 7.08 करोड़ मतदाताओं को तीन श्रेणियों  'स्वीकृत', 'हटाए गए' और 'निर्णयाधीन' में वर्गीकृत किया गया है। 'निर्णयाधीन' श्रेणी में वे मतदाता शामिल हैं, जिनके नामों की जांच न्यायिक अधिकारियों द्वारा की जा रही है और जिनके शामिल या हटाए जाने पर अंतिम फैसला पूरक सूचियों में होगा।

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कब शुरू हुई थी प्रक्रिया?

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया 4 नवंबर को मतदाताओं के बीच गणना प्रपत्र वितरण के साथ शुरू हुई थी। चुनाव आयोग ने 116 दिनों में इस अभ्यास को अस्थायी रूप से पूरा कर 'अधूरी अंतिम सूची' जारी की, जो राजनीतिक विवाद, दस्तावेज सत्यापन नियमों में संशोधन और कानूनी चुनौतियों के बीच प्रकाशित की गई।

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कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए?

16 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची के अनुसार, अगस्त 2025 तक राज्य की मतदाता सूची में दर्ज 7.66 करोड़ मतदाताओं की संख्या घटकर 7.08 करोड़ रह गई। आयोग ने बताया कि 58 लाख से अधिक नाम मृत्यु, पलायन, दोहराव या पता न चल पाने जैसी वजहों से हटाए गए।


दूसरे चरण में 1.67 करोड़ मतदाताओं की सुनवाई की गई, जिनमें 1.36 करोड़ को 'तार्किक विसंगतियों' के कारण चिह्नित किया गया था, जबकि 31 लाख मतदाताओं की मैपिंग अधूरी पाई गई। अभी भी लगभग 60 लाख मतदाता 'तार्किक विसंगति' के आधार पर निर्णयाधीन श्रेणी में हैं।


उल्लेखनीय है कि 2002 के बाद यह पश्चिम बंगाल में पहली बार राज्यव्यापी विशेष गहन पुनरीक्षण  किया गया है, जिसे चुनाव आयोग ने आगामी बड़े चुनाव से पहले वैधानिक मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान के रूप में शुरू किया था।

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