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Bengal: पश्चिम बंगाल में 2021 चुनाव के बाद हुई हिंसा की जांच शुरू, 181 एफआईआर दर्ज; 59 मामले फिर से खोले गए
Mon, 18 May 2026 12:03 PM IST
शिवम गर्ग
एएनआई, कोलकाता
एएनआई, कोलकाता
Published by: शिवम गर्ग
Updated Mon, 18 May 2026 12:03 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल में 2021 चुनाव बाद हिंसा मामलों की जांच तेज कर दी गई है। 458 नई जांच, 181 एफआईआर दर्ज और 59 पुराने मामलों को फिर से खोला गया है। प्रशासन ने पीड़ितों से आगे आने की अपील की है।
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चुनाव बाद हिंसा मामले में सख्ती
- फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में 2021 विधानसभा चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा के मामलों की जांच एक बार फिर तेज कर दी गई है। ताजा जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसियों ने अब तक 458 नई जांचें शुरू की हैं, 181 नई एफआईआर दर्ज की गई हैं और 59 ऐसे मामलों को दोबारा खोल दिया गया है, जिनमें पहले अंतिम रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी थी। प्रशासन की ओर से बताया गया है कि इन मामलों में जांच की प्रक्रिया अभी भी जारी है और कई स्तरों पर सबूत जुटाने का काम किया जा रहा है।
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सरकार का सख्त रुख, पीड़ितों से आगे आने की अपील
इस बीच राज्य प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि सभी लंबित हत्या और हमले से जुड़े मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एफआईआर दर्ज की जाए। पीड़ित परिवारों से भी अपील की गई है कि वे आगे आएं और अपनी शिकायत दर्ज कराएं, भले ही उनके पास ठोस सबूत न हों। सरकार ने आश्वासन दिया है कि हर शिकायत की निष्पक्ष जांच की जाएगी।
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राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
इस पूरे मामले को लेकर राज्य की राजनीति भी गर्म हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि चुनाव के दौरान हिंसा को रोकने में केंद्रीय बल निष्क्रिय रहे। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई जगहों पर टीएमसी उम्मीदवारों और एजेंटों को मतगणना केंद्रों से बाहर कर दिया गया था।
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पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है और हिंसा प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षा देने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कई जगहों पर आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं, जिसमें महिलाओं और बच्चों को भी निशाना बनाया गया।
2026 चुनाव परिणामों के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव
गौरतलब है कि 2026 विधानसभा चुनाव के परिणामों में भाजपा ने 207 सीटों के साथ बहुमत हासिल कर सरकार बनाई, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 80 सीटों पर संतोष करना पड़ा। सत्ता परिवर्तन के बाद से राज्य में राजनीतिक तनाव और जांच प्रक्रियाएं लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं।