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West Bengal: तृणमूल का केंद्र पर आरोप, बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि पर राज्य सरकार की नहीं ली गई राय
Sun, 23 Jun 2024 06:21 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 23 Jun 2024 06:21 PM IST
सार
West Bengal: पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। दरअसल हाल ही में भारत ने बांग्लादेश के साथ 1996 गंगा जल बंटवारा संधि के नवीनीकरण पर बातचीत शुरू करने का फैसला किया और केंद्र ने राज्य सरकार से कोई चर्चा भी नहीं की।
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गंगा जल संधि को लेकर केंद्र पर टीएमसी ने साधा निशाना
- फोटो : ANI
विस्तार
भारत और बांग्लादेश के प्रधानमंत्रियों ने बीते दिन कई अहम द्विपक्षीय मुद्दों के साथ कई अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें 1996 गंगा जल बंटवारा संधि के नवीनीकरण पर बातचीत शुरू करने का फैसला भी शामिल है। वहीं केंद्र सरकार के इस फैसले पर राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि पश्चिम बंगाल राज्य भी इस संधि का भागीदार है, लेकिन उससे राय नहीं ली गई है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की राय के बिना फरक्का-गंगा संधि का नवीनीकरण किया जा रहा है।
पश्चिम बंगाल इस संधि का भागीदार- ओ ब्रायन
डेरेक ओ ब्रायन ने कहा राज्य इस संधि का भागीदार है और यहां तक कि पिछली संधि के तहत हमारा बकाया भी नहीं चुकाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गंगा की ड्रेजिंग बंद कर दी गई है, जो बाढ़ और कटाव का मुख्य कारण है। बता दें कि शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एलान किया कि भारत और बांग्लादेश 1996 गंगा जल बंटवारा संधि के नवीनीकरण पर फिर से बातचीत शुरू करेंगे और जल्द ही भारत की एक टेक्निकल टीम बातचीत और तीस्ता नदी के संरक्षण और प्रबंधन को लेकर बांग्लादेश का दौरा करेगी।
2026 में खत्म होने वाली है गंगा जल बंटवारा संधि
नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। इसके बाद जारी भारत-बांग्लादेश साझा विजन दस्तावेज में कहा गया है कि दोनों पक्ष 1996 की गंगा जल बंटवारा संधि के नवीनीकरण के लिए चर्चा शुरू करने के लिए एक संयुक्त तकनीकी समिति के गठन का स्वागत करते हैं। बता दें कि भारत और बांग्लादेश की तरफ से साल 1996 में हस्ताक्षरित गंगा जल संधि 30 साल पुरानी संधि है, जो साल 2026 में समाप्त होने वाली है और आपसी सहमति से इसे नवीनीकृत किया जा सकता है।
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क्या है गंगा जल बंटवारा संधि
12 दिसम्बर, 1996 को भारत और बांग्लादेश ने गंगा नदी जल के बंटवारे पर हस्ताक्षर किए थे। इस संधि का मकसद दोनों देशों के बीच पानी से जुड़े आपसी तनाव को होने से रोकना था। इस पर तत्कालीन भारत के प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और शेख हसीना ने साइन किए थे। दरअसल पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में भगीरथी नदी पर फरक्का बांध है और इस बांध में जनवरी से मई तक पानी का बहाव कम रहता है। इस समझौते के तहत इस बांध में पानी का बहाव सुनिश्चित करना था।
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पश्चिम बंगाल इस संधि का भागीदार- ओ ब्रायन
डेरेक ओ ब्रायन ने कहा राज्य इस संधि का भागीदार है और यहां तक कि पिछली संधि के तहत हमारा बकाया भी नहीं चुकाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गंगा की ड्रेजिंग बंद कर दी गई है, जो बाढ़ और कटाव का मुख्य कारण है। बता दें कि शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एलान किया कि भारत और बांग्लादेश 1996 गंगा जल बंटवारा संधि के नवीनीकरण पर फिर से बातचीत शुरू करेंगे और जल्द ही भारत की एक टेक्निकल टीम बातचीत और तीस्ता नदी के संरक्षण और प्रबंधन को लेकर बांग्लादेश का दौरा करेगी।
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2026 में खत्म होने वाली है गंगा जल बंटवारा संधि
नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। इसके बाद जारी भारत-बांग्लादेश साझा विजन दस्तावेज में कहा गया है कि दोनों पक्ष 1996 की गंगा जल बंटवारा संधि के नवीनीकरण के लिए चर्चा शुरू करने के लिए एक संयुक्त तकनीकी समिति के गठन का स्वागत करते हैं। बता दें कि भारत और बांग्लादेश की तरफ से साल 1996 में हस्ताक्षरित गंगा जल संधि 30 साल पुरानी संधि है, जो साल 2026 में समाप्त होने वाली है और आपसी सहमति से इसे नवीनीकृत किया जा सकता है।
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क्या है गंगा जल बंटवारा संधि
12 दिसम्बर, 1996 को भारत और बांग्लादेश ने गंगा नदी जल के बंटवारे पर हस्ताक्षर किए थे। इस संधि का मकसद दोनों देशों के बीच पानी से जुड़े आपसी तनाव को होने से रोकना था। इस पर तत्कालीन भारत के प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और शेख हसीना ने साइन किए थे। दरअसल पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में भगीरथी नदी पर फरक्का बांध है और इस बांध में जनवरी से मई तक पानी का बहाव कम रहता है। इस समझौते के तहत इस बांध में पानी का बहाव सुनिश्चित करना था।