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West Bengal: विवाद थमा, राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने 7 मार्च को दोपहर 2 बजे बुलाया विधानसभा सत्र
Thu, 03 Mar 2022 11:01 PM IST
मेघा चौधरी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,कोलकाता
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,कोलकाता
Published by: मेघा चौधरी
Updated Thu, 03 Mar 2022 11:01 PM IST
सार
राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने 7 मार्च को दोपहर 2 बजे राज्य विधानसभा बुलाई है। 24 फरवरी को राज्यपाल धनखड़ ने ममता बनर्जी कैबिनेट के एक प्रस्ताव के आधार पर 7 मार्च को सुबह 2 बजे विधानसभा बुलाई थी, जिसके बाद विवाद हुआ।
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बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र को बुलाने को लेकर चल रहा विवाद थम गया। मुख्य सचिव एचके द्विवेदी ने गुरुवार की सुबह राजभवन में जाकर राज्यपाल जगदीप धनखड़ से मुलाकात की, जिसके बाद राज्यपाल ने समय और अन्य मुद्दों पर विराम लगाते हुए 7 मार्च को दोपहर 2 बजे राज्य विधानसभा बुलाई है।
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विधानसभा बुलाने के समय पर विवाद तब शुरू हुआ जब 24 फरवरी को राज्यपाल धनखड़ ने ममता बनर्जी कैबिनेट के एक प्रस्ताव के आधार पर 7 मार्च को सुबह 2 बजे विधानसभा बुलाई थी। हालांकि जिसे बाद में टाइपोग्राफिकल त्रुटि के रूप में स्पष्ट किया गया था।
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इस पर धनखड़ ने ट्वीट किया कि संविधान के अनुच्छेद 174 (1) के आधार पर 28 फरवरी को कैबिनेट के फैसले को स्वीकार करते हुए, विधानसभा को 7 मार्च 2022 को दोपहर 2 बजे बुलाया गया है। पिछले हफ्ते इस मामले में राज्यपाल ने टिप्पणी की थी कि यह एक तरह का इतिहास बन रहा था कि सुबह के 2 बजे विधानसभा सत्र को बुलाया जा रहा था। विधानसभा की बैठक मध्यरात्रि के बाद कराना 2.00 बजे असामान्य समय पर कराना कैबिनेट का निर्णय था।
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इसके बाद कैबिनेट ने 28 फरवरी को एक बैठक की और राज्यपाल धनखड़ को 7 मार्च को दोपहर 2 बजे सदन को बुलाने के लिए एक नया प्रस्ताव भेजा। इस पर धनखड़ ने राज्य के मुख्य सचिव से नए कैबिनेट फैसले में कुछ मुद्दों को स्पष्ट करने के लिए कह दिया था। उन्होंने गुरुवार को ट्वीट किया कि मुख्य सचिव ने सभी लंबित मुद्दों के संवैधानिक अनुपालन को 15 दिनों के भीतर प्रभावी करने का आश्वासन दिया है।
बता दें कि संविधान के अनुसार राज्यपाल की अनुमति के बिना बजट सत्र नहीं बुलाया जा सकता है। लेकिन राज्य विधानसभा में बजट सत्र को लेकर असमंजस की स्थिति थी। पहले राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य की गलती को पकड़ा, बाद में गलती को सुधारा गया लेकिन कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई। गुरुवार को मुख्य सचिव ने इस बारे में राज्यपाल से दोबारा बात की और मामला थम गया।