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पश्चिम बंगाल: हिंसा प्रभावित मुर्शिदाबाद में स्थिति नियंत्रण में, ममता सरकार ने HC में बताई राज्य की स्थिति
Thu, 17 Apr 2025 03:45 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: राहुल कुमार
Updated Thu, 17 Apr 2025 03:45 PM IST
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ममता बनर्जी, सीएम, पश्चिम बंगाल
- फोटो : ANI
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वक्फ कानून के विरोध में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में भड़की हिंसा को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से स्थिति की जानकारी मांगी थी। जिसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत की और दावा किया कि हिंसा प्रभावित मुर्शिदाबाद जिले में कानून और व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में है।
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न्यायमूर्ति सौमेन सेन और न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी की खंडपीठ राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि मुस्लिम बहुल जिले में सांप्रदायिक दंगों के दौरान बम विस्फोट हुए थे। याचिका में उन्होंने अनुरोध किया था कि हिंसा की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सौंपी जाए।
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राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष यह भी कहा कि जिले में हिंसा को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन द्वारा पर्याप्त कदम उठाए गए हैं। केंद्र की ओर से पेश वकील ने अदालत के समक्ष अनुरोध किया कि मुर्शिदाबाद में सीएपीएफ की तैनाती को जिले की जमीनी स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए कुछ समय के लिए और बढ़ा दिया जाए।
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मुर्शिदाबाद के उपद्रवग्रस्त सुती, शमसेरगंज-धुलियान इलाकों में फिलहाल केंद्रीय बलों की लगभग 17 कंपनियां तैनात हैं। एक अन्य याचिकाकर्ता ने हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों की उनके घरों में वापसी के लिए राज्य सरकार द्वारा कदम उठाए जाने का अनुरोध किया।
राज्य सरकार ने कहा कि कुछ प्रभावित परिवार पहले ही अपने घर लौट चुके हैं। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि पिछले कुछ दिनों में मुर्शिदाबाद में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध में हुई हिंसा से बचकर कई लोगों ने मालदा जिले के एक स्कूल में राहत शिविर में शरण ली है।
हिंसा में तीन की मौत
मुर्शिदाबाद जिले के कई इलाकों में वक्फ कानून के विरोध में बीती 11-12 अप्रैल को हिंसा भड़क गई थी। ये हिंसा सुती, धुलियान और जंगीपुर इलाकों में हुई। इस हिंसा में तीन लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए। धुलियान के मंदिरपाड़ा इलाके में कथित तौर पर कई महिलाओं का उत्पीड़न किया गया। हिंसा के चलते मुर्शिदाबाद में बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ। सैंकड़ों की संख्या में महिलाएं बच्चे भागीरथी नदी पार कर पड़ोसी माल्दा जिले में पहुंच गए और अब वहां कैंपों में रह रहे हैं। महिला आयोग की अध्यक्ष ने बयान जारी कर कहा कि 'आयोग मुर्शिदाबाद से आ रहीं खबरों को लेकर बेहद चिंतित है। महिलाओं को न सिर्फ हिंसा का सामना करना पड़ा बल्कि उन्हें अपनी गरिमा और अपने घरों को भी छोड़ना पड़ा।'