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Hindi News ›   India News ›   West Bengal Election: How will Kamal blossom on Trinamool's branch?

पश्चिम बंगाल चुनावः तृणमूल की टहनी पर कैसे खिल पाएगा कमल?

Mon, 18 Jan 2021 09:48 PM IST
सुरेंद्र जोशी शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 18 Jan 2021 09:48 PM IST
सार

  • चेहरा वही,  झंडा बदल जाने से क्या होगा : भाजपा उपाध्यक्ष
  • नारदा-शारदा वाले भाजपाई बिगाड़ रहे हैं भाजपा का ही खेल

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West Bengal Election: How will Kamal blossom on Trinamool's branch?
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

विस्तार

भाजपा के 33 साल पुराने झंडाबरदार और पश्चिम बंगाल के पार्टी उपाध्यक्ष को नहीं पता कि तृणमूल की टहनी पर कमल कैसे खिल पाएगा? हालांकि वह कहते हैं कि जनता बदलाव के लिए तैयार है। उधर,  भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का दावा है कि राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी। बस देखते जाइए। राज्य के प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयावर्गीज भी इसके लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन सूचना है कि भाजपा के राज्य नेताओं को तृणमूल से पार्टी में आए नेताओं के बढ़ते प्रभाव को लेकर परेशानी शुरू हो गई है। एक नेता सवाल उठाते हुए कहते हैं कि ताजा भाजपाई सुवेंदु अधिकारी के गुट ने तृणमूल में रहते हुए जिन भाजपा के नेताओं को पीटा था, अब वह उसी क्षेत्र में कैसे सुवेंदु के साथ काम करें?

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ममता ने दी सुवेंदु और भाजपा को सीधी चुनौती
दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा को खुली चुनौती दे दी है। मुख्यमंत्री ने भाजपा के हॉट केक बने सुवेंदु अधिकारी के गढ़ नंदी ग्राम से चुनाव लडऩे की घोषणा कर दी है। ममता की यह चुनौती भाजपा की रणनीति को फेल करने के इरादे से आई है। गौरतलब है कि नंदी ग्राम में ममता के आंदोलन ने उन्हें सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी, तब तृणमूल नेता सुवेंदु अधिकारी भी ममता के बड़े सहयोगी थे। 
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नारदा-शारदा के आरोपी बने भाजपाई नेता कितना योगदान देंगे?
भाजपा में सांसद और बैरकपुर क्षेत्र के धाकड़ नेता अर्जुन सिंह को लेकर सवाल उठ खड़ा हुआ है। भाजपा के नेता कहते हैं कि तृणमूल में रहते हुए अर्जुन सिंह ब्रिगेड ने भाजपा के नेताओं का जीना हराम कर दिया था। समित लहरी समेत कई नेताओं के साथ जमकर मारपीट हुई थी। अब अर्जुन सिंह प्रदेश के भाजपा के बड़े नेताओं में शुमार हैं। एक भाजपा नेता का कहना है कि पार्टी ड्यूटी लगाती है तो जाना पड़ता है, लेकिन मन के भीतर की टीस तो खत्म नहीं हुई है। 
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बंगाली हल्ला मचाते हैं, लेकिन सोच-समझकर आगे बढ़ते हैं
बकुल भट्टाचार्य कहते हैं कि कुछ इन्हीं कारणों ने भाजपा की स्थिति को पहले की तुलना में खराब किया है। बकुल इस समय पूरे बंगाल में बदल रही राजनीतिक नब्ज पर काम कर रहे हैं। बकुल का कहना है कि 2016 से भाजपा ने 2019 तक काफी गेन किया था, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में 18 सीटें जीतने वाली भाजपा का इस समय ग्राफ कुछ गिरा है। बकुल कहते हैं कि बंगाली हल्ला भी खूब मचाता है, लेकिन कुछ करने के समय बहुत सोच-समझकर आगे बढ़ता है। इसलिए हो सकता है कि तृणमूल के पोस्टर पर भाजपा का चुनाव चिन्ह ज्यादा अपील न कर पाए।

सूत्र का कहना है कि अक्टूबर, नवंबर का माहौल भाजपा के पक्ष में  दिखाई दे रहा था, लेकिन इसके बाद थोड़ी गिरावट आई है। इसका कारण भाजपा के वेस्ट बंगाल कॉडर में तृणमूल के नेताओं के आने से बढ़ी परेशानी है। हालांकि इस बारे में पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष का कहना है कि तृणमूल के दबंग नेताओं को भाजपा में लाकर वह अपने कार्यकर्ताओं को राजनीतिक अभियान तेज करने का अवसर दिला रहे हैं। 


अलग है पश्चिम बंगाल का मिजाज
कोलकाता में वरिष्ठ पत्रकार शांतनु बनर्जी कहते हैं कि जब राजनीतिक हमले बढ़ जाते हैं तो पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हवा बदलती है, लेकिन इस प्रक्रिया में भी समय लगता है। शांतुन का आकलन है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सीटें बढ़ेंगी। दोगुनी तक हो सकती हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल के मिजाज, सामाजिक समीकरण, वोटिंग पैटर्न को देखते हुए अभी ममता बनर्जी के हाथ से सत्ता छिटक पाना मुश्किल लग रहा है, क्योंकि कांग्रेस और वामदल का गठजोड़ सरकार विरोधी वोट में हिस्सेदारी बढ़ाएगा और इससे भाजपा को मिलने वाली हिस्सेदारी घटने की संभावना है।

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