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'हम ट्रंप से ओबामा जैसा ही भरोसा चाहते हैं'

Sun, 05 Mar 2017 04:12 PM IST
जसमीत सिंह, अमेरिका
जसमीत सिंह, अमेरिका Updated Sun, 05 Mar 2017 04:12 PM IST
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We would trust like Obama with Trump

सिएटल में एक पगड़ीधारी सिख पर हमले के बाद अमेरिका में सिख समुदाय डरा हुआ है। डरना तो स्वाभाविक है। इसके साथ ही समुदाय में इस बात की भी चिंता है कि इस तरह की घटनाओं और प्रचार से किस तरह निपटा जाए। 

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अमेरिका के दूसरे समुदायों के साथ पारस्परिक संबंध कैसे विकसित किया जा सकता है? बातचीत को आगे कैसे बढ़ाया जा सकता है? इस तरह की घटना से थोड़ी निराशा तो है। लेकिन वो इन चीजों से निपटने के बारे में सोच भी रहे हैं। ये घटना केंट वॉशिंगटन नाम के एक छोटे से शहर में हुई।
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वहां शाम करीब आठ बजे एक सिख व्यक्ति अपनी कार पर कुछ काम कर रहा था। इस दौरान एक व्यक्ति वहां पहुंचा और उन्हें गालियां देने लगा। इस पर सिख व्यक्ति ने उस व्यक्ति को समझाना चाहा। वह उन्हें अमेरिका छोड़कर जाने के लिए कह रहा था।
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 इस बात पर विवाद बढ़ गया और दोनों हाथापाई करने लगे। इस दौरान गाली देने वाले व्यक्ति ने बंदूक निकाल कर सिख व्यक्ति के कंधे में गोली मार दी।

प्रशासन इन घटनाओं पर चुप्पी साधे हुए क्यों है?

We would trust like Obama with Trump
ट्रंप के बाद

मेरे पास ऐसा कोई आंकड़ा तो नहीं है जिसके आधार पर मैं कह सकूं कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद सिखों पर हमले की घटनाएं बढ़ी हैं या कम हुई हैं। लेकिन जिस तरह से कैंसस में श्रीनिवास की गोली मारकर हत्या की गई और शुक्रवार शाम एक सिख को गोली मारकर घायल किया गया - इन घटनाओं को देखकर लग रहा है कि भारतीयों पर हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं। 

दूसरी बात यह है कि इसके पहले जब इस तरह की घटनाएं होती थीं तो राष्ट्रपति या प्रशासन की ओर से बहुत साफ-साफ संदेश आता था कि इस तरह की घटनाएं स्वीकार नहीं हैं। ऐसी हर घटना की कड़ी निंदा की जाती थी, लेकिन अब वैसा नहीं देखा जा रहा है। 

राष्ट्रपति के मुंह से हम यह सुनना चाहते हैं कि अमरीकी नागरिक के रूप में हर दक्षिण एशियाई हिंदू, मुसलमान या सिख की जिंदगी भी किसी दूसरे नागरिक की ही तरह महत्वपूर्ण है। लेकिन ऐसी बात हमें सुनने को नहीं मिल रही है। इससे हम निराश हैं। यह हमारी समझ से परे है कि प्रशासन इन घटनाओं पर चुप्पी क्यों साधे हुए है। श्रीनिवास की हत्या की प्रशासन कड़े शब्दों में निंदा क्यों नहीं कर रहा है।

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