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हमें अखिलेश के न्यौते का इंतजार : जदयू

Tue, 17 Jan 2017 03:58 AM IST
शशिधर पाठक/अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 17 Jan 2017 03:58 AM IST
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We await the invitation of Akhilesh for coalition: JDU leader, KC tyagi
kc tyagi - फोटो : Getty

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव गुट को साइकिल चुनाव चिन्ह मिलने के बाद जद(यू) ने इसका स्वागत किया है। जद(यू) नेता केसी त्यागी ने कहा कि चुनाव आयोग ने अखिलेश के गुट को चुनाव चिन्ह साइकिल देकर संवैधानिक मान्यता दे दी है। अब पार्टी, चुनाव चिन्ह, कार्यालय सब अखिलेश गुट की है। जद(यू) को समाजवादी पार्टी के निर्णय का इंतजार है।

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केसी त्यागी ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान कहा कि हमें चुनाव आयोग के निर्णय का सोमवार तक इंतजार करने के लिए कहा गया था। हम बेसब्री से इसकी प्रतीक्षा कर रहे थे और अब आगे गठबंधन का रास्ता साफ हो गया है।
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पहले ही कह चुके हैं नीतीश
केसी त्यागी ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री और जद(यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिश कुमार पहले ही बिहार की तर्ज पर गठबंधन की वकालत कर चुके हैं। नीतीश कुमार चाहते हैं सांप्रदायिक शक्तियों से मुकाबले के लिए यूपी में महागठबंधन बनना चाहिए। इसके लिए समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल समेत अन्य नेताओं को साथ आना चाहिए। त्यागी ने कहा कि हम ऐसे किसी भी गठबंधन का सम्मान करते हैं।

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केवल यादव-मुसलमान से नहीं चलेगा काम

We await the invitation of Akhilesh for coalition: JDU leader, KC tyagi

यूपी है सबसे बड़ी प्रयोगशाला
केसी त्यागी ने कहा कि यूपी भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति की सबसे बड़ी प्रयोगशाला है। यहीं से घर वापसी, अखलाक हत्या कांड, मुजफ्फरनगर दंगा समेत भाजपा ने कई प्रयोग किए है। भाजपा और संघ इसे सबसे बड़ी प्रयोगशाला के तौर पर ले रहा है। इसलिए सभी गैरसांप्रदायिक दलों को स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मिलकर हालात का मुकाबला करना चाहिए।

केवल यादव-मुसलमान से नहीं चलेगा काम
केसी त्यागी ने कहा कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को उ.प्र. में 42.8 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि बसपा और सपा का संयुक्त वोट प्रतिशत 42.5 प्रतिशत था। इसलिए केवल यादव-मुसलमान के समीकरण से काम नहीं चलने वाला। त्यागी के अनुसार इसके लिए जरूरी है कि कुर्मी, पटेल, नाई, कोहार, लोहार, ब्राह्मण, क्षत्रिय, जाट, गूजर समेत सभी दलों, जातियों का संयुक्त प्रतिनिधित्व हो। उन्होंने कहा कि उ.प्र. में सात-आठ जिलों में कुर्मी मतदाता है। जद(यू) के साथ आने से इसका लाभ मिल सकता है। वहीं पश्चिमी उ.प्र. में राष्ट्रीय लोकदल के साथ गठबंधन का लाभ मिलेगा। कांग्रेस का पूरे प्रदेश में हर विधानसभा में कुछ न कुछ वोट है। इन सभी को साथ आना होगा।

क्या हो
सभी पार्टियों के नेता बैठक करें, विचार विमर्श के बाद इसे अंतिम रूप दें। साझा वक्तव्य जारी हो और सब मिलकर उ.प्र. में भाजपा के खिलाफ चुनाव प्रचार में उतरें। अखिलेश यादव प्रदेश का सर्वमान्य, गैर विवादित और जनता की पसंद का चेहरा हैं। उनके मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा जाए।

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