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जल बोर्ड घोटाला: दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और हैदराबाद में ईडी के छापे, 41 लाख नकद और दस्तावेज जब्त
Sat, 06 Jul 2024 06:19 AM IST
मेघा झा
अमर उजाला, ब्यूरो
अमर उजाला, ब्यूरो
Published by: मेघा झा
Updated Sat, 06 Jul 2024 06:19 AM IST
सार
ईडी ने दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े एसटीपी घोटाले में दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और हैदराबाद में छापे मारे। एसटीपी घोटाले में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार शहरों में कई ठिकानों की तलाशी के दौरान एजेंसी ने 41 लाख रुपये जब्त किए।
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प्रवर्तन निदेशालय
- फोटो : ANI
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) घोटाले में दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और हैदराबाद में छापे मारे। एसटीपी घोटाले में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार शहरों में कई ठिकानों की तलाशी के दौरान एजेंसी ने 41 लाख रुपये जब्त किए। कई दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए।
ईडी ने बताया कि ये छापे 3 जुलाई को मारे गए थे। कार्रवाई दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा की आेर से यूरोटेक एनवायरनमेंटल कंपनी और अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की गई। आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड में 10 एसटीपी के विस्तार और उन्नयन के नाम पर घोटाला किया गया। एसटीपी के संवर्धन और विस्तार कार्यों के लिए अक्तूबर 2022 में 1,943 करोड़ रुपये की चार निविदाएं जारी की गईं। इसमें केवल तीन संयुक्त उद्यम कंपनियों ने भाग लिया और यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक को निविदा मिल सके। दो संयुक्त उद्यमों को एक-एक निविदा मिली, जबकि एक ने दो निविदाएं हासिल कीं।
साठ-गांठ कर चुनिंदा कंपनियों को दिए ठेके
एफआईआर के अनुसार, निविदा की शर्तें ऐसी बनाई गईं ताकि चुनिंदा कंपनियां ही हिस्सा ले सकें। 1,546 करोड़ लागत अनुमान के बाद में 1,943 करोड़ कर दिया गया। इस तरह, बढ़ी दरों पर ठेके दिए गए, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। तीनाें उद्यमों ने एक ही अनुभव प्रमाणपत्र लगाया, जिसे जल बोर्ड ने बिना सत्यापन स्वीकार कर लिया। तीनों उपक्रमों ने काम के लिए हैदराबाद स्थित यूरोटेक एनवायरनमेंट को उप-अनुबंधित किया।
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ईडी ने बताया कि ये छापे 3 जुलाई को मारे गए थे। कार्रवाई दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा की आेर से यूरोटेक एनवायरनमेंटल कंपनी और अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की गई। आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड में 10 एसटीपी के विस्तार और उन्नयन के नाम पर घोटाला किया गया। एसटीपी के संवर्धन और विस्तार कार्यों के लिए अक्तूबर 2022 में 1,943 करोड़ रुपये की चार निविदाएं जारी की गईं। इसमें केवल तीन संयुक्त उद्यम कंपनियों ने भाग लिया और यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक को निविदा मिल सके। दो संयुक्त उद्यमों को एक-एक निविदा मिली, जबकि एक ने दो निविदाएं हासिल कीं।
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साठ-गांठ कर चुनिंदा कंपनियों को दिए ठेके
एफआईआर के अनुसार, निविदा की शर्तें ऐसी बनाई गईं ताकि चुनिंदा कंपनियां ही हिस्सा ले सकें। 1,546 करोड़ लागत अनुमान के बाद में 1,943 करोड़ कर दिया गया। इस तरह, बढ़ी दरों पर ठेके दिए गए, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। तीनाें उद्यमों ने एक ही अनुभव प्रमाणपत्र लगाया, जिसे जल बोर्ड ने बिना सत्यापन स्वीकार कर लिया। तीनों उपक्रमों ने काम के लिए हैदराबाद स्थित यूरोटेक एनवायरनमेंट को उप-अनुबंधित किया।
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