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Bengal Politics: शहीद दिवस रैली के आयोजन स्थल को लेकर ममता और बागी गुट आमने-सामने, पुलिस की अनुमति पर संशय

Sun, 28 Jun 2026 02:30 AM IST
निर्मल कांत पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 28 Jun 2026 02:30 AM IST
सार

तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी गुटबाजी के बीच 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें ममता बनर्जी खेमे और बागी गुट दोनों ने एक ही स्थल पर रैली के आयोजन की मांग की है। वहीं, पुलिस की ओर से अनुमति देने को लेकर संशय है। दोनों गुटों ने क्या कहा, पढ़िए रिपोर्ट-
 

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Warring TMC factions eye July 21 Martyrs' Day rally at Dharmatala site amid permission speculation
ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच शनिवार को नया मोड़ आ गया। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और बागी गुट दोनों ने दावा किया कि वे 21 जुलाई को शहीद दिवस रैली को कोलकाता के पारंपरिक धर्मतल्ला स्थल पर आयोजित करेंगे। इस बीच यह भी चर्चा है कि पुलिस विक्टोरिया हाउस के पास रैली की अनुमति नहीं दे सकती।
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टीएमसी की संयुक्त राष्ट्रीय सचिव डोला सेन ने कहा कि ममता बनर्जी के गुट ने कोलकाता पुलिस से धर्मतल्ला के उसी पुराने स्थल पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मांगी है। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने भी कहा कि वह उसी स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए पुलिस से अनुमति मांगेगा।
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हालांकि, बागी गुट ने यह भी कहा कि यदि पुलिस अनुमति नहीं देती है तो वह किसी दूसरे स्थान पर कार्यक्रम करने के लिए तैयार है। लेकिन उनकी पहली पसंद धर्मतल्ला ही है। खबर लिखे जाने तक पुलिस की ओर से किसी भी आवेदन पर कोई जवाब नहीं आया था।
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डोला सेन ने क्या कहा?
  • टीएमसी नेता डोला सेन ने कहा, हमने कोलकाता पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर उसी स्थान पर शहीद दिवस कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मांगी है, जहां पिछले कई दशकों से यह आयोजन होता आ रहा है। हमारी नेता ममता बनर्जी हमेशा की तरह इस सभा को संबोधित करेंगी। 
  • उन्होंने कहा कि यह उनकी पार्टी का सबसे अहम केंद्रीय कार्यक्रम है और अब यह राज्य की सामाजिक और राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बन चुका है।
  • डोला सेन ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के लिए कोलकाता की प्रमुख रेड रोड को सात दिनों तक बंद रखा जा सकता है, तो शहीद दिवस रैली के लिए उसी इलाके की एक सड़क को कुछ घंटों के लिए बंद करने में भी कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
  • उन्होंने कहा, हमें योग दिवस कार्यक्रम से कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन हमारी पार्टी पिछले 33 वर्षों से इसी स्थान पर शहीदों को श्रद्धांजलि देती आ रही है। यह सिर्फ उन 15 वर्षों की बात नहीं है जब हम सत्ता में थे। हमें उम्मीद है कि पुलिस हमारा सहयोग करेगी। 

बागी गुट से विधायक अखरुज्जमान ने क्या कहा?
इस बीच, भंग हो चुके कोलकाता नगर निगम बोर्ड के पूर्व पार्षदों की बैठक के बाद बागी टीएमसी विधायक और विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक अखरुज्जमान ने कहा कि उनका गुट इस कार्यक्रम को उसकी मूल भावना के साथ आयोजित करना चाहता है। उन्होंने कहा, पिछले कुछ वर्षों में यह कार्यक्रम टॉलीवुड सितारों का शो बनकर रह गया था। हम शहीदों के परिवारों के साथ इस कार्यक्रम को पूरी गंभीरता और सम्मान के साथ आयोजित करेंगे। 

उन्होंने कहा कि विक्टोरिया हाउस के पास का स्थान उनकी पहली पसंद है। हालांकि, यदि पुलिस सार्वजनिक असुविधा का हवाला देकर अनुमति नहीं देती है तो वे किसी दूसरे स्थान पर कार्यक्रम करने का फैसला कर सकते हैं। 

क्यों और कब से शहीद दिवस मना रही टीएमसी?
21 जुलाई को शहीद दिवस मनाने की शुरुआत 1993 की एक घटना से हुई थी। उस समय ममता बनर्जी के नेतृत्व में बंगाल युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मांग की थी कि मतदान के लिए केवल मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) को ही मान्य पहचान पत्र माना जाए। इस मांग को लेकर उन्होंने राइटर्स बिल्डिंग तक मार्च निकाला था। उस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। इसके बाद पुलिस की गोलीबारी में युवा कांग्रेस के 13 कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे।

यह घटना ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन का एक बड़ा मोड़ बनी और तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक मानी गई। वर्ष 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना के बाद ममता बनर्जी ने 21 जुलाई को 'शहीद दिवस' के रूप में मनाना शुरू किया। तब से हर साल कोलकाता में बड़ी रैली आयोजित कर 1993 में मारे गए कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि दी जाती है। समय के साथ यह कार्यक्रम टीएमसी का सबसे बड़ा राजनीतिक आयोजन बन गया है। इसमें शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ पार्टी अपनी राजनीतिक रणनीति और भविष्य की योजनाओं का भी एलान करती है।


रैली के आयोजन स्थल को लेकर चल रही चर्चा ऐसे समय में सामने आई है, जब हाल के महीनों में ममता बनर्जी गुट के सड़क पर कई कार्यक्रमों को पुलिस की ओर से अनुमति नहीं दिए जाने की खबरें सामने आई हैं। इससे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार और टीएमसी के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ा है।
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