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Maharashtra: 'लंदन से लाया जा रहा शिवाजी का 'वाघ नख' असली नहीं', इतिहासकार का दावा; शिंदे सरकार ने किया खंडन

Mon, 08 Jul 2024 10:12 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Mon, 08 Jul 2024 10:12 PM IST
सार

छत्रपति शिवाजी महाराज के लंदन से लाए जा रहे 'वाघ नख' को लेकर महाराष्ट्र के इतिहासकार ने बड़ा दावा किया है। इतिहासकार का मानना है कि शिवाजी का बाघ के पंजे के आकार का हथियार राज्य के सतारा जिले में ही मौजूद है।

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'Wagh nakh' being brought from London not original, says historian; govt refutes claim
शिवाजी का 'वाघ नख' को लेकर इतिहासकार का दावा - फोटो : ANI

विस्तार

महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार ने पिछले साल लंदन के एक संग्रहालय से छत्रपति शिवाजी महाराज के वाघ नख को वापस लाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। वहीं अब महाराष्ट्र के एक इतिहासकार इंद्रजीत सावंत ने दावा किया है कि लंदन से लाया जा रहा शिवाजी का 'वाघ नख' असली नहीं है। जिस दावे का राज्य सरकार ने खंडन किया है।
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'संग्रहालय के पास वाघ नख का कोई सबूत नहीं'
इतिहासकार इंद्रजीत सावंत ने सोमवार को कहा कि महान सम्राट की तरफ से इस्तेमाल किया गया हथियार राज्य के सतारा जिले में ही मौजूद है। इंद्रजीत सावंत ने कोल्हापुर में पत्रकारों से कहा, कि वाघ नख को तीन साल के लिए 30 करोड़ रुपये के समझौते पर महाराष्ट्र लाया जा रहा है। मेरे पत्र के जवाब में लंदन के विक्टोरिया और अल्बर्ट संग्रहालय ने कहा है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि वाघ नख (उनके पास) छत्रपति शिवाजी महाराज का है।
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असली वाघ नख सतारा में ही है- इतिहासकार
इतिहासकार ने दावा किया, कि इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए लंदन गए मंत्री सुधीर मुनगंटीवार के नेतृत्व में महाराष्ट्र की टीम को यह जानकारी प्रदर्शित करने के लिए कहा गया है। असली वाघ नख सतारा में ही है। वहीं एक अन्य शोधकर्ता पांडुरंग बलकावड़े ने एक मराठी टीवी चैनल को बताया कि प्रतापसिंह छत्रपति ने 1818 और 1823 के बीच अपने निजी संग्रह से 'वाघ नख' अंग्रेज ग्रांट डफ को दिया था, उन्होंने कहा कि डफ के वंशजों ने इसे संग्रहालय को सौंप दिया। हालांकि, इंद्रजीत सावंत ने कहा कि डफ के भारत छोड़ने के बाद प्रतापसिंह छत्रपति ने कई लोगों को 'वाघ नख' दिखाया। 
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महाराष्ट्र के मंत्री ने मुद्दे पर क्या दी सफाई
वहीं इस मुद्दे पर महाराष्ट्र के मंत्री शंभूराज देसाई ने कहा कि यह सभी जानते है कि 'भवानी तलवार' और 'वाघ नख' लंदन में हैं। उन्होंने ने कहा, हमारी सरकार ने वाघ नख की पुष्टि की और फिर सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। अगर इतिहासकारों का कोई अन्य दृष्टिकोण है, तो हमारी सरकार इस मुद्दे को स्पष्ट करेगी। इस मुद्दे पर महाराष्ट्र भाजपा के वरिष्ठ नेता आशीष शेलार ने कहा कि सरकार का रुख स्पष्ट है कि छत्रपति शिवाजी महाराज की सभी कलाकृतियां, जो लोगों के लिए प्रेरणा हैं, संरक्षित, प्रचारित और प्रदर्शित की जाएंगी।


शिवाजी के 'वाघ नख' का खास महत्व
बता दें कि 'वाघ नख' का इस्तेमाल मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज ने 1659 में बीजापुर सल्तनत के सेनापति अफजल खान को मारने के लिए किया था। 'वाघ नख' राजा की दृढ़ता और वीरता का एक स्थायी और पूजनीय प्रतीक है क्योंकि इसका इस्तेमाल शारीरिक रूप से बड़े प्रतिद्वंद्वी को वश में करने और मारने के लिए किया जाता था। 
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