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वीवीआईपी चौपर डील मामले में कोर्ट ने कहा, विचाराधीन कैदियों को दोषियों के साथ नहीं रख सकते

Wed, 06 Mar 2019 05:50 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Wed, 06 Mar 2019 05:50 AM IST
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VVIP Chopper deal case: Court can not keep prisoners under trial
Christian Michel

विचाराधीन कैदियों को दोषी कैदियों के साथ नहीं रखा जा सकता। जेल नियम इसकी अनुमति नहीं देते। यह टिप्पणी अदालत ने 36 सौ करोड़ के वीवीआईपी चौपर डील केस में आरोपी ब्रिटिश नागरिक क्रिश्चियन मिशेल जेम्स को दोषियों की सेल से विचाराधीन कैदियों की सेल में शिफ्ट करने का आदेश देते हुए की है। मामले की सुनवाई के दौरान मिशेल के वकील ने कहा कि उसकी गिरफ्तारी से पहले सीबीआई अधिकारी दुबई में उससे मिले थे और उनके मुताबिक बयान और लोगों के नाम न लेने पर उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। इसी कड़ी में उसे अब छोटा राजन व शहाबुद्दीन जैसे कैदियों के साथ रखकर दबाव बनाया जा रहा है। सीबीआई के विशेष अधिवक्ता ने बचाव पक्ष की इस दलील पर कड़ा ऐतराज जताया।

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मिशेल ने आवेदन दायर कर कहा था कि उसे परेशान करने की मंशा से सामान्य सेल से निकालकर हाई सिक्योरिटी सेल में शिफ्ट कर दिया गया है। वह अभी विचाराधीन कैदी है और उसे हाई सिक्योरिटी सेल में छोटा राजन, शहाबुद्दीन व अन्य खतरनाक अपराधियों के साथ रखा जा रहा है। इस जेल में कैदी खुले में शौच करते हैं। इसकी जांच एजेंसी अथवा अदालत खुद जांच करवा सकती है।
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पटियाला हाउस अदालत के विशेष सीबीआई जज अरविंद कुमार ने तिहाड़ जेल प्रशासन को निर्देश दिया है कि मिशेल को अति सुरक्षा वाली सेल नंबर-दो से सेल नंबर-एक, तीन या चार में किसी भी सेल में शिफ्ट किया जाए। जेल प्रशासन उसकी सुरक्षा का आकलन करे और उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए। इसके अलावा उसे अन्य कैदियों को मिलने वाली सुविधाएं दी जाएं। 
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कोर्ट के समक्ष मिशेल के वकील एलजो के. जोसेफ, विष्णु शंकर व श्रीराम प्रकटन ने कहा कि मिशेल को अति सुरक्षा वाली सेल की बजाय सामान्य सेल में रखने का निर्देश दिया जाए। वह पहले भी 70 दिन तक सामान्य सेल में थे। सीबीआई के विशेष अधिवक्ता डीपी सिंह ने कहा कि भारत की किसी जेल में खुले में शौच नहीं किया जाता। मिशेल का ऐसा आरोप लगाना भारत को बदनाम करने की साजिश है।


कोर्ट के समक्ष तिहाड़ जेल नंबर-दो के अधीक्षक जोगिंदर सिंह सहरावत व विधि अधिकारी जोरावर सिंह ने कहा कि मिशेल विदेशी नागरिक है और उसे सुरक्षा के मद्देनजर अति सुरक्षा वाली सेल में शिफ्ट किया गया था। सेल में जो भी हाई प्रोफाइल कैदी हैं, हर दो माह बाद उनकी सुरक्षा व खतरे का आकलन किया जाता है। पुलवामा हमले के बाद हुए सिक्योरिटी रिव्यू के बाद मिशेल को सेल नंबर-दो में शिफ्ट गया था। उसे विचाराधीन कैदियों के लिए बनी अति सुरक्षित सेल नंबर-एक, तीन या चार में शिफ्ट किया जा सकता है।

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