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विवेक भारद्वाज इंटरव्यू: पंचायती राज विभाग के सचिव बोले, खत्म होंगे झगड़े, विकास की नीतियों में होगी आसानी

Sun, 26 Jan 2025 06:04 AM IST
अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 26 Jan 2025 06:04 AM IST
सार

ग्रामीणों को उनकी जमीन का मालिकाना हक मिले, इसके लिए केंद्र सरकार ने स्वामित्व योजना शुरू की थी। हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी ने इसके तहत 65 लाख स्वामित्व कार्ड बांटे। स्वामित्व योजना किस तरह ग्राम्य विकास की नीतियां बनाने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाएगी, इस पर भारत सरकार में पंचायती राज विभाग के सचिव विवेक भारद्वाज से शैलेश अरोड़ा की विशेष बातचीत...

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Vivek Bhardwaj Interview Panchayati Raj Dept Swamitva Yojana Development Policies implementation
पंचायतीराज विभाग सचिव विवेक भारद्वाज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्वामित्व योजना में ड्रोन मैपिंग से लेकर कार्ड मिलने तक क्या-क्या होता है?  
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इसमें आबादी और गैरआबादी क्षेत्र के चिह्नीकरण के लिए सफेद चूने से लाइन बनाई जाती है ताकि पता रहे कि कहां ड्रोन उड़ाना है और कहां नहीं। उसके बाद गांव का एक नक्शा बनता है। इसके बाद राज्यों की रेवेन्यू अथॉरिटी से पारित होने पर नक्शा वापस सर्वे ऑफ इंडिया या संबंधित एजेंसी को दिया जाता है। जरूरी सुधारों के बाद बिल्कुल सटीक नक्शा वापस रेवेन्यू अथॉरिटी को दिया जाता है। उसके बाद राज्य सरकार इस नक्शे को ग्राम पंचायतों के साथ साझा करती है। इसके बाद लोग अपनी-अपनी जमीन और बाउंड्री देख पाते हैं। इसके बाद यदि किसी को लगे कि गलत मैपिंग हुई है, तो उसी हिसाब से दावा करता है। मैप टू फाइनल होने के बाद प्रॉपर्टी कार्ड दिए जाते हैं। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और जन भागीदारी पर आधारित है।

अब तक कितना लक्ष्य हासिल कर चुके हैं?
इसमें पहला चरण ड्रोन फ्लाइंग का होता है। 92 फीसदी गांवों में यह काम पूरा हो चुका है। इसका मतलब यह है कि अब अधिकतर राज्यों में हमारा मापन और मैप टू हो गया है। अगले साल मार्च तक हम सभी गांवों में प्रॉपर्टी कार्ड वितरण कर पाएंगे। मार्च 2026 तक सभी को यह कार्ड मिल चुके होंगे।
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गांव के विकास में इसका कैसे लाभ मिलेगा?
यह एक ड्रोन का सर्वे है, इसलिए इसके बहुत सारे फायदे हैं। जैसे-किसी गांव में कितनी चौड़ाई की सड़क है, क्या उस सड़क पर कोई एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड पहुंच पाएगी या नहीं? यह हम उससे समझ सकते हैं। मान लीजिए कहीं 3 मीटर चौड़ाई की सड़क है और हमें एंबुलेंस जाने के लिए साढ़े तीन मीटर सड़क की जरूरत है, तो ग्रामीणों को समझना और तय करना होगा कि हम किस प्रकार व्यवस्था करें कि हमारे गांव में भी एंबुलेंस पहुंच पाए।
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देश में छह लाख से अधिक गांव हैं, लेकिन लाभ लगभग साढ़े तीन लाख गांवों को ही क्यों?
गांवों में आबादी और गैर आबादी, दो तरह के क्षेत्र होते हैं। गैर आबादी क्षेत्र का रिकॉर्ड पहले से ही ग्रामीणों के पास है। लेकिन, कई राज्यों में आबादी क्षेत्र का कोई भूमि रिकॉर्ड नहीं था। बिहार, तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह व्यवस्था पहले से ही थी। यदि इन राज्यों को अलग कर दें, तो साढ़े छह लाख गांवों में से साढ़े तीन लाख के करीब ही बचते हैं। इस हिसाब से यह योजना पूरे देश में चलाई जा रही है।

स्वामित्व योजना से क्या लाभ हैं?
गांव में सबसे पहले जो विवाद ऐसे होते हैं कि मेरी मुंडेर, तुम्हारी जमीन के अंदर तो नहीं आ रही है। मालिकाना हक होने से सबसे पहले वे खत्म होते हैं। मालिकाना हक मिलने पर संपत्ति व मकान को गिरवी रखकर ऋण ले सकते हैं, क्योंति कागजात न होने से मकान व संपति डेड एसेट के तौर पर ही माने जाते हैं। ऋण लेकर कोई भी व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। महिलाओं का नाम जोड़कर महिला सशक्तीकरण भी किया जा रहा है।


पीएम मोदी ने संपत्ति कार्ड के वितरण के समय डेड कैपिटल का जिक्र किया, ये क्या है?
जाने-माने पेरू के अर्थशास्त्री हर्नाडो डी सोटो ने कहा है कि बहुत से विकासशील देशों में संपत्ति के कागजात न होने से गरीब, गरीब ही रह जाते हैं क्योंकि वह किसी संस्था से ऋण नहीं ले पाते। इससे आसानी से ऋण मिलेगा।  
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