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Virtual Hearing : वर्चुअल सुनवाई को मौलिक अधिकार बनाने के मामले में हाईकोर्ट को पक्षकार बनाने की सुप्रीम इजाजत

Tue, 02 Aug 2022 06:46 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Tue, 02 Aug 2022 06:46 AM IST
सार

Virtual Hearing : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि कंपनी का निदेशक जो संबंधित समय पर व्यवसाय के संचालन के लिए प्रभारी या जिम्मेदार नहीं था, चेक बाउंस के लिए निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत उत्तरदायी नहीं होगा।

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Virtual Hearing : Supreme Court permited, High Court Will Be party in virtual hearing fundamental right case
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

Virtual Hearing : आभासी सुनवाई (वर्चुअल हियरिंग) को मौलिक अधिकार घोषित करने की मांग वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उन सभी हाईकोर्ट को पक्षकार बनाने का आवेदन स्वीकार कर लिया जिन्होंने आभासी सुनवाई के अनुरोधों पर विचार करना बंद कर दिया है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति को भी पक्षकार बनाने की सोमवार को अनुमति दी।
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इसके अलावा पीठ ने इस मामले में शीर्ष अदालत के समक्ष तीन याचिकाओं में से एक याचिकाकर्ता वरुण ठाकुर की याचिका पर नोटिस जारी किया। कोर्ट पहले ही अन्य दो याचिकाओं में नोटिस जारी कर चुका है। एक ऑल इंडिया ज्यूरिस्ट्स एसोसिएशन द्वारा दायर की गई है और दूसरी नेशनल फेडरेशन ऑफ सोसाइटीज फॉर फास्ट जस्टिस द्वारा दायर की गई है।
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चेक बाउंस : स्वतंत्र निदेशक जिम्मेदार नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि कंपनी का निदेशक जो संबंधित समय पर व्यवसाय के संचालन के लिए प्रभारी या जिम्मेदार नहीं था, चेक बाउंस के लिए निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत उत्तरदायी नहीं होगा। जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस जेके माहेश्वरी की पीठ ने एक मामले में यह आदेश दिया।
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शराब की लत के कारण बर्खास्त जवान के प्रति बड़ा दिल दिखाए केंद्र सरकार : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को शराब पर निर्भरता के चलते अनुशासनात्मक आधार पर सेवा से बर्खास्त किए गए सैनिक नागेंद्र सिंह को देय विकलांगता पेंशन में हस्तक्षेप नहीं करने का सुझाव दिया। शीर्ष अदालत ने सरकार से कारगिल युद्ध में शामिल इस जवान के प्रति बड़ा दिल दिखाने को कहा है। सिंह को सशस्त्र बल न्यायाधिकरण द्वारा पेंशन दी गई थी। इस तथ्य पर गौर करते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने सोमवार को कहा कि ऐसे में इसमें हस्तक्षेप करना न्याय के हित में नहीं होगा। पीठ ने केंद्र सरकार से न्याय के मानवीय पक्ष को देखने का आग्रह किया।
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