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देवी के नाराज होकर अपनी जगह से नहीं हिलने की अफवाह ने जलाया था मुंगेर
Sun, 01 Nov 2020 03:01 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 01 Nov 2020 03:01 AM IST
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मुंगेर हिंसा
- फोटो : ANI
बिहार के मुंगेर में दुर्गा विसर्जन के जुलूस को लेकर भड़की हिंसा का स्रोत महज एक अफवाह थी, जिसका निराकरण तत्कालीन जिला प्रशासन समय पर करने में नाकामयाब रहा।
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दरअसल पुलिस के दुर्गा जुलूस रोकने पर किसी ने अफवाह फैला दी कि नाराज देवी अपनी जगह से नहीं हिल रही हैं। इसके बाद ही सारा शहर घटनास्थल की तरफ उमड़ पड़ा था और पुलिस को मजबूरन नियंत्रण के लिए फायरिंग करनी पड़ी थी।
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बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदान से महज कुछ घंटे पहले हुई इस हिंसा में एक व्यक्ति मारा गया और 7 घायल हुए। अगले दिन गुस्साई भीड़ ने एक पुलिस थाने और कई वाहनों में आग लगा दी थी। प्रदेश सरकार ने डीएम राजेश मीणा और एसपी लिपि सिंह को हटा दिया।
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इस घटना की जांच कर रही सीआईएसएफ के सामने आया है कि दुर्गा पूजा समितियों ने जिला प्रशासन से मूर्ति विसर्जन को चुनाव के बाद तक टालने की इजाजत देने का आग्रह किया था। लेकिन जिला प्रशासन मतदान से एक दिन पहले देर शाम को ही विसर्जन कराने पर अड़ा रहा।
प्रदेश सरकार और सीआईएसएफ के जांच अधिकारियों का मानना है कि जिला प्रशासन हालात का सही आकलन करने में नाकामयाब रहा। यदि मतदान के अगले दिन विसर्जन का कार्यक्रम रखा जाता तो सभी कार्य शांतिपूर्ण तरह से हो सकते थे।
यह आया है प्राथमिक जांच में सामने
दरअसल मुंगेर में परंपरा के अनुसार सबसे आगे बड़ी दुर्गा का जुलूस चलता है। उसके पीछे छोटी दुर्गा और फिर अन्य पूजा समितियों की मूर्तियों का जुलूस विसर्जन के लिए आगे बढ़ता है। एक से दूसरा जुलूस मिलते हुए यह कई किलोमीटर लंबा काफिला बन जाता है। लेकिन पुलिस ने बड़ी दुर्गा पूजा समिति पर तेजी से आगे बढ़ने का दबाव डाला।
श्रद्धालुओं ने पीछे से आ रहे दूसरे जुलूस का इंतजार करने देने का आग्रह किया। इसे लेकर दोनों पक्षों में तनाव हुआ तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया। पुलिस के बल प्रयोग से घबराकर बड़ी दुर्गा का रथ खींचने वाले प्रशिक्षित लोग भाग गए। पुलिस ने अन्य श्रद्धालुओं से रथ को खींचने को कहा, लेकिन लकड़ी का भारी रथ उनसे खींचा नहीं गया।
इसके बाद ही शहर में भक्तों पर लाठीचार्ज होने से देवी के नाराज होने और अपनी जगह ही विराजमान हो जाने की अफवाह उड़ गई और पूरा शहर वहां पहुंचने लगा।
लेडी सिंघम के नाम से मशहूर हुई थीं एसपी लिपि सिंह
मुंगेर से हटाई गईं और विपक्षी दलों की तरफ से पुलिस फायरिंग के लिए जिम्मेदार मानी जा रही लिपि सिंह को अभी तक बिहार की लेडी सिंघम कहकर पुकारा जाता था। यह नाम उन्हें पिछले साल बाहुबली नेता अनंत कुमार सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए मिला था।
निर्भीक पुलिस अधिकारी कहलाने वाली लिपि के पिता आरसीपी सिंह खुद यूपी काडर के आईएएस रहे हैं और वर्तमान में जदयू से राज्यसभा सांसद हैं।