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एक और खुलासा, महिलाओं को बेटा पैदा करने की दवाई भी देता था रामवृक्ष यादव

Wed, 15 Jun 2016 12:03 PM IST
पुनीत शर्मा/ अमर उजाला, मथुरा
पुनीत शर्मा/ अमर उजाला, मथुरा Updated Wed, 15 Jun 2016 12:03 PM IST
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villain of jawahar bagh mathura ramvriksh treat others like doctor
डिग्री कोई नहीं खुद को बताता होम्योपैथिक चिकित्सक - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, मथुरा-बरेली

जवाहर बाग हिंसा का सूत्रधार रामवृक्ष वर्षों तक डाक्टर बनकर लोगों का इलाज करता रहा। कई गंभीर रोगों के शर्तिया इलाज का दावा भी करता था। गाजीपुर और देवरिया समेत कई जगह होम्योपैथिक क्लीनिक के नाम पर दवाखाने खोल रखे थे। बेटा बूटी के नाम पर भोले-भाले लोगों को उसने खूब छला है। खास बात यह है कि वह लोगों को छलता रहा मगर जिम्मेदार विभाग के लोग आंखें मूंदे रहे।

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रामवृक्ष गाजीपुर जनपद में रामपुर बांगसुर गांव का रहने वाला था। बताते हैं कि वह सोलह साल की उम्र में ही बाबा जयगुरुदेव का शिष्य बन गया था। आसपास के गांवों में कार्यक्रम करके जयगुरुदेव मिशन का प्रचार-प्रसार करने लगा। क्षेत्र में लोग उसे जानने लगे थे। 2005 में उसने क्षेत्र में होम्योपैथिक के नाम से क्लीनिक खोल दिया। एक क्लीनिक देवरिया में खोला जबकि दूसरा गाजीपुर में। वर्ष 2010 तक उसने बाकायदा क्लीनिक चलाए। लोगों को दवाइयां बेचीं। बेटा बूटी के नाम पर तो उसने तमाम लोगों को छला।
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बताया जाता है कि रामवृक्ष ने अपने साथ कुछ लोग भी जोड़ रखे थे। उसके इस गोरखधंधे का नेटवर्क कुशीनगर, बस्ती, बलिया, मऊ, कन्नौज, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, बदायूं और बरेली के ग्रामीण इलाकों तक पहुंच गया था। रामवृक्ष को जानने वाले लोगों का कहना है कि 2010 में उसने अपने सभी अवैध क्लीनिक बंद कर दिए थे। बाद में उसने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम से संगठन बना लिया।
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वर्ष 2014 में वह मथुरा के जवाहर बाग में आ गया था। इस बाग पर उसने कब्जा कर लिया। बताया जाता है कि बेटा बूटी के नाम पर छलने का धंधा उसने यहां भी शुरू कर दिया था। कई दूसरे गंभीर रोगों के इलाज के नाम पर भी वह लोगों से पैसे ऐंठ रहा था।

तीन जून और पांच जून को जब पुलिस ने जवाहर बाग में आपरेशन सर्च चलाया था, तब भी तमाम दवाएं यहां से बरामद हुई थीं। जवाहर बाग हिंसा में घायल झारखंड निवासी देवकी प्रसाद, जानकी और बिहार के केशव सिंह का कहना है कि जवाहर बाग में उसने अस्पताल खोल रखा था। अगर किसी को कोई दिक्कत होती थी तो रामवृक्ष ही दवा देता था। उसके साथ दो दूसरे लोग भी दवा बांटते थे। कैंप लगाकर भी दवाएं बांटी जाती थीं। कई लोगों की दवा खाने से तबीयत भी बिगड़ गई थी।

कौन थे डाक्टर साहब मुजफ्फरपुर वाले
पुलिस ने 4 जून को उन 10 लोगों की सूची जारी की थी जिनकी शिनाख्त गिरफ्तार किए गए कब्जाधारियों ने की थी। इनमें एक डाक्टर साहब मुजफ्फरपुर वाले का भी उल्लेख था। पुलिस ने जो रिपोर्ट डीजीपी को दी है उसमें लिखा है कि लोगों से पूछताछ में जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक यह डाक्टर जवाहर बाग में कैंप लगाकर बीमार लोगों का इलाज करता था।

पूरे जवाहर बाग में उसे डाक्टर साहब के नाम से पुकारा जाता था। पूछताछ में पुलिस को इतना तो पता चल गया था कि वह मुजफ्फरपुर के रहने वाला है, लेकिन मुजफ्फरपुर में कहां का रहने वाला है, इसकी जानकारी नहीं हो पाई है। हालांकि लोगों ने इतना जरूर बताया था कि वह रामवृक्ष के खास थे। पिछले ढाई साल से ही जवाहर बाग में रह रहे थे। उन्होंने यहां पूरा मेडिकल स्टोर भी खोल रखा था। जो दवाई नहीं होती थी उसे बाहर से मंगवा लिया जाता था।

जवाहरबाग में सुबह शाम होती थी लोगों की हाजिरी

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जवाहर बाग में रहने वाले लोगों की सुबह-शाम हाजिरी होती थी। इसके लिए बाकायदा इंचार्ज बना रखे थे। पचास लोगों पर एक इंचार्ज था। अगर कहीं कोई संख्या कम हो जाती थी तो इंचार्ज को सजा दी जाती थी। भागने की कोशिश करने वालों को रामवृक्ष के गुर्गे बांधकर पीटते थे।

जवाहर बाग में उत्तर प्रदेश के साथ ही झारखंड और बिहार के भी लोग थे। हालांकि जब 2014 में रामवृक्ष आया था तब मुश्किल से लोगों की संख्या 500 के करीब रही होगी लेकिन आहिस्ता-आहिस्ता संख्या में इजाफा होता चला गया। मौजूदा समय में संख्या एक हजार से ऊपर थी। जवाहर बाग से एक साल बिताने वाले लोगों का कहना है कि बाग में सुबह-शाम दोनों वक्त लोगों की हाजिरी होती थी। इसके लिए लोगों की ड्यूटियां लगा रखी थीं।

अगर संख्या कम हो जाती थी तो उसकी तलाश की जाती थी। दूसरी टोलियों में तो वह नहीं है यह देखा जाता था। तमाम लोग ऐसे भी थे जो रामवृक्ष के झांसे में आकर यहां आ तो गए मगर उन्हें यहां से निकलने का मौका नहीं मिल रहा था। घर वालों को सूचना देने का भी कोई माध्यम नहीं था। अगर किसी के पास फोन था भी तो उसे रामवृक्ष जमा करा लिया करता था।

बैरक नंबर 16 में हैं रामवृक्ष के गुर्गे

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कुछ को पहले यहां से शिफ्ट भी कर दिया गया था - फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
रामवृक्ष के गुर्गों को मथुरा जेल की बैरक संख्या सोलह में रखा गया है। एक ही बैरक में यह 122 लोग रह रहे हैं। बीच में इनमें से कुछ का स्वास्थ्य बिगड़ा था, लेकिन उपचार के बाद अब सभी स्वस्थ हैं।

ढाई साल से जवाहर बाग पर कब्जा जमाए लोगों को पुलिस ने दो जून को हटाया था तो तमाम लोग फरार हो गए थे। कुछ को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इनमें से 122 लोग मौजूदा समय में मथुरा जेल में बंद हैं। इन सभी को एक ही बैरक में रखा है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि जिस तरह से दूसरे बंदियों को खाना दिया जा रहा है उसी तरह से ये भी ले रहे हैं। इनके आने के बाद जेल में बंदियों की संख्या बढ़ गई है। यहां अब क्षमता से अधिक बंदी हो गए हैं।

अपनों को ढूंढते हुए जेल पहुंचे कई
किसी का भाई मथुरा के जवाहर बाग से लापता है तो किसी का पति। काफी ढूंढा लेकिन कहीं जानकारी नहीं हुई। सोमवार को कई लोग अपनों की तलाश में मथुरा जेल पहुंचे। जब इन लोगों को पता चला कि उनके अपने जेल में बंद हैं तो उनसे मुलाकात की। जेल अफसरों ने बताया कि करीब दस लोगों के परिवार वाले मिलाई करने के लिए आए थे। इन सभी की मुलाकात करा दी गई है।
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