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सियासत: गुजरात विजय में भाजपा को कमजोर कड़ी क्यों लगे रूपाणी, यह है जानकारों की राय
Sat, 11 Sep 2021 07:15 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sat, 11 Sep 2021 07:15 PM IST
सार
विजय रूपाणी ने विधानसभा चुनाव से 15 महीने पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया। नए मुख्यमंत्री की रेस में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया, पुरुषोत्तम रुपाला, राज्य के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल के नाम आगे चल रहे हैं।
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विजय रूपाणी
- फोटो : ANI
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विस्तार
विजय रूपाणी भले ही सरल स्वभाव के मुख्यमंत्री रहे हों, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह उनके लिए खतरनाक भी साबित हुआ। इससे उनके कमजोर मुख्यमंत्री की छवि भी बनी। इस वजह से नौकरशाहों को राजनीतिक नेतृत्व के अहम फैसलों के खिलाफ कदम उठाने की हिम्मत मिली। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, कुछ जानकार इस ओर भी इशारा करते हैं कि उन्होंने जिस तरह से कोरोना महामारी की दूसरी लहर और उसके बाद आने वाले आर्थिक और सामाजिक संकट को संभाला, यह भी उनके पतन का सबसे बड़ा कारण रहा।
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मुख्यमंत्री के तौर में अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान रूपाणी ने जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून पारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस कड़ी में गोहत्या के खिलाफ कानून भी शामिल है। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गृह राज्य में 2019 के लोकसभा चुनाव अभियान में भाजपा का चेहरा थे। इस दौरान भी वह रूपाणी ही थे, जो अपेक्षाकृत छोटे जैन समुदाय से थे। जिन्होंने गुजरात में पार्टी मशीनरी को सीएम के रूप में चलाया। बता दें कि रूपाणी ने अगले विधानसभा चुनाव से करीब एक साल पहले शनिवार को पद से इस्तीफा दे दिया।
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रंगून (अब यांगोन, म्यांमार) में जन्मे रूपाणी ने संघ को स्कूली छात्र के रूप में चुना था। भाजपा में शामिल होने से पहले वे संघ के छात्र विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के भी सदस्य रहे। 2016 में पहली बार सीएम बनने से पहले रूपाणी ने ज्यादातर गुजरात में पार्टी संगठन के लिए काम किया और 2014 में अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा। इस दौरान उन्होंने राजकोट पश्चिम सीट से उपचुनाव जीता।
संघ के एक लो-प्रोफाइल व्यक्ति रूपाणी ने 2017 में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर वापसी की। यह इसलिए अहम था, क्योंकि लगातार कई सालों से सत्ता पर काबिज होने की वजह से राज्य में सरकार के खिलाफ माहौल होने का डर था और कोटे को लेकर पाटीदार भी भाजपा से नाराज चल रहे थे।
विधि में स्नातक रूपाणी 2006 से 2012 तक राज्यसभा सांसद रहे। जब उन्होंने 2006 में गुजरात पर्यटन विकास निगम का नेतृत्व किया, उस वक्त मेगास्टार अमिताभ बच्चन द्वारा अभिनीत बेहद सफल विज्ञापन अभियान 'खुशबू गुजरात की' लॉन्च किया गया। इससे राज्य को पर्यटन हॉटस्पॉट के रूप में बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था। इसके बाद 19 फरवरी 2016 को पार्टी ने उनका कद और बढ़ा दिया और उन्हें गुजरात भाजपा का प्रमुख नियुक्त किया गया।
जब राज्य की पहली और एकमात्र महिला मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने अगस्त 2016 में पाटीदार और दलित आंदोलनों को ठीक से नहीं संभालने के आरोपों के बाद इस्तीफा दे दिया, तो रूपाणी को हॉट सीट पर बैठाया गया। रूपाणी ने राज्य में 1974 में हुए छात्रों और मध्यम वर्ग के आंदोलन के दौरान अपने राजनीतिक कौशल को साबित किया था। यह आंदोलन आर्थिक संकट और जनसेवा में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाया गया था। उस समय एबीवीपी से जुड़े रूपाणी आपातकाल के दौरान लगभग एक साल तक जेल में भी रहे।
1996-97 में राजकोट के मेयर के रूप में उन्होंने नागरिक बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए अपने कामों केजरिए शहर के लोगों के बीच खुद की अलग पहचान बनाई। एक राजनेता के रूप में रूपाणी की योग्यता की परीक्षा 2019 के लोकसभा चुनावों में हुई थी, जब केंद्र की सत्ता पर दोबारा काबिज होने के लिए मोदी चुनावी मैदान में थे।
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