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भारत आने से बचने के लिए माल्या ने रचा गिरफ्तारी का ड्रामा?
amarujala.com- Presented by: अजय कुमार सिंह
Updated Wed, 19 Apr 2017 11:02 AM IST
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विजय माल्या
धोखाधड़ी और बैंकों का 9000 करोड़ रुपये का कर्ज नहीं चुकाने के आरोप में घिरे ‘भगोड़े’ भारतीय कारोबारी विजय माल्या की गिरफ्तारी और उसके बाद बेल मिलना उसके पक्ष में गया है। कानूनी जानकारों का कहना है कि माल्या के इस कदम से उसकी स्थिति और मजबूत हो गई है, क्योंकि कानूनी प्रक्रिया के जरिए माल्या को अब प्रत्यर्पण रुकवाने में मदद मिलेगी। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि अब माल्या ब्रिटेन की न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बन गया है।
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मुंबई मिरर की खबर के मुताबिक, अब उनके पास वहां के कानूनों में उपलब्ध सभी विकल्पों का इस्तेमाल करने का रास्ता खुल गया है। इस लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद ही उन्हें भारत प्रत्यर्पित करने का फैसला हो सकेगा। क्योंकि ब्रिटेन में प्रत्यर्पण की प्रक्रिया कई चरणों से होकर गुजरती है जिसमें जज को यह फैसला भी करना होता है कि मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाए या नहीं।
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वारंट की स्थिति में व्यक्ति को गिरफ्तार कर प्रारंभिक सुनवाई और फिर प्रत्यर्पण की सुनवाई के लिए अदालत में पेश किया जाता है। इसके बाद अंतिम फैसला वहां के विदेश मंत्री को करना होता है। वांछित व्यक्ति को किसी भी फैसले के खिलाफ उच्च अदालतों तथा सुप्रीम कोर्ट तक में अपील करने का अधिकार है। माल्या के मामले की सुनवाई कुछ ही हफ्तों में शुरू हो जाएगी। ब्रिटिश गृह मंत्रालय ने कहा कि माल्या के मामले पर ब्रिटिश प्रत्यर्पण कानून 2003 के पार्ट 2 के तहत सुनवाई होगी।
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ब्रिटेन से प्रत्यर्पण संधि के बावजूद भारत के भगोड़े अपराधियों के लिए यह देश सुरक्षित पनाहगाह है। भारत की ओर से विजय माल्या सहित 10 भगोड़े अभियुक्तों के प्रत्यर्पण का अनुरोध ब्रिटेन में लंबित है। पिछले पांच साल में केवल एक भगोड़े अपराधी समीरभाई वीनूभाई पटेल का ब्रिटेन से प्रत्यर्पण किया गया है।