200 शब्दों में समझिए मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के नतीजों के मायने
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कई विधानसभा चुनावों में यह नारा फलीभूत होता भी दिखा। लेकिन 2018 में कर्नाटक में ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद 11 दिसंबर को आए नतीजों ने तो मानो इस जुमले की हवा पूरी तरह से निकाल दी है। भाजपा के मजबूत किलों में शामिल छत्तीसगढ़ और राजस्थान में परचम बदल गया है। मध्यप्रदेश का किला भी देर रात ढह गया। अब यहां की प्राचीर पर पंजे की छाप आ गई है। माना जा रहा है कि यहां कमलनाथ के हाथों में सत्ता की कमान सौंपी जा सकती है।
यह सवाल आपके मन-मस्तिष्क में भी उठ रहा होगा कि आखिर यह बदलाव हुआ कैसे। दरअसल इसके पीछे एंटी इनकमबेंसी, यानी मौजूदा सरकार से नाराजगी भी बड़ी वजह है। माना जा रहा था कि अजीत जोगी और बसपा का गठबंधन कांग्रेस के वोट काटेगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। क्यों। क्योंकि, लोगों की नाराजगी जोगी या कांग्रेस से नहीं बल्कि सत्तारूढ़ भाजपा से थी। इतनी ज्यादा नाराजगी थी कि भाजपा के अलावा सबको वोट मिला। जोगी-बसपा ने भी भाजपा से नाराज वोट हासिल किए।