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Venkaiah Naidu Tenure: नायडू का शानदार रहा कार्यकाल, शुरुआती अशांति के बाद राज्यसभा में 100 फीसदी कामकाज

Sat, 06 Aug 2022 08:46 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 06 Aug 2022 08:46 AM IST
सार

राज्यसभा के एक अधिकारी ने बताया कि नायडू के सभापतित्व काल में शुरुआत में सदन की उत्पादकता बहुत कम रही, लेकिन इसके बाद के आठ सत्रों में से छह की उत्पादकता 76 से 105 फीसदी तक रही।

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Venkaiah Naidu as a Rajya Sabha chairman, Initial turbulence, later recovery
उपराष्ट्रपति वेकैंया नायडू - फोटो : ANI

विस्तार

उपराष्ट्रपति व राज्यसभा के सभापति वेकैंया नायडू का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। आज लोकसभा व राज्यसभा के सदस्य नए उपराष्ट्रपति का चुनाव करने जा रहे हैं। नायडू के राज्यसभा सभापति के कार्यकाल को देखें तो पता चलता है कि शुरुआती सत्रों में सदन के कामकाज में ज्यादा अशांति हुई, लेकिन बाद के सत्रों में जबर्दस्त सुधार आया। पिछले कुछ सत्रों में तो उच्च सदन का कामकाज 100 फीसदी तक हुआ। 

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राज्यसभा के एक अधिकारी ने बताया कि नायडू के सभापतित्व काल में शुरुआत में सदन की उत्पादकता बहुत कम रही। इस साल के बजट सत्र समेत कुल 13 पूर्णकालिक सत्रों की उन्होंने अध्यक्षता की। इनमें से पहले पांच सत्रों में कामकाज या उत्पादकता 6.80 फीसदी से लेकर 58.80 फीसदी तक रही। लेकिन इसके बाद के आठ सत्रों में से छह की उत्पादकता 76 से 105 फीसदी तक रही। पांच सत्रों में तो यह 100 फीसदी से ज्यादा रही। 
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58 मुद्दों पर हुआ सदन में व्यवधान व कार्यवाही स्थगन
नायडू के कार्यकाल के दौरान राज्यसभा में  58 मुद्दों को लेकर कामकाज में व्यवधान आया या कार्यवाही को जबरन स्थगित करना पड़ा। सदन की 57 फीसदी बैठकों के दौरान  दिन के किसी हिस्से या पूरे दिन के लिए सदन में व्यवधान और जबरन स्थगन की नौबत आई। राज्यसभा के अधिकारी के अनुसार आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा देने को लेकर चार सत्रों में 36 बैठकों में हंगामा हुआ। वर्ष 2018 के बजट सत्र के दौरान सर्वाधिक 24 बार इस मामले पर सदन की कार्यवाही में व्यवधान पड़ा। एक आधिकारिक बयान के अनुसार इसके अलावा चार अन्य मुद्दों यथा- कृषि कानून व किसान आंदोलन, कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन और 2021 के शीत सत्र के दौरान 12 सदस्यों के निलंबन को लेकर सदन की कार्यवाही सर्वाधिक खलल पड़ा।
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78 फीसदी सदस्य रोज बैठक में आए
उपराष्ट्रपति नायडू के कार्यकाल में 78 फीसदी राज्यसभा सदस्यों ने सदन की बैठक में रोज हिस्सा लिया, लेकिन 3 फीसदी ने ऐसा नहीं किया। 30 फीसदी सदस्यों ने विभिन्न सत्रों में पूर्ण हाजिरी दी। 

प्रश्नकाल का उपयोग बहुत कम हुआ
1978 के बाद जब से राज्यसभा के कामकाज के बारे में विस्तृत डाटा रखा गया है, सदन मुख्य रूप से संसद के प्रति कार्यपालिका की जवाबदेही के काम को कम समय दिया गया है। प्रश्नकाल इसका माध्यम है और इस समय का बहुत कम उपयोग हो सका है।


10 अगस्त को पूरा हो रहा नायडू का कार्यकाल, सोमवार को विदाई
राज्यसभा सोमवार को सभापति वेंकैया नायडू को विदाई देगी। उनका कार्यकाल 10 अगस्त को पूरा हो रहा है। 11 अगस्त को नए उपराष्ट्रपति पदभार संभालेंगे। राज्यसभा के सभापति का कार्यकाल पांच वर्ष जबकि सदस्य का छह वर्ष होता है। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने नायडू की विदाई समारोह की जानकारी दी। शुक्रवार को हरिवंश ने कहा कि सभापति एम वेंकैया नायडू 10 अगस्त को अवकाशग्रहण कर रहे हैं। सदन उन्हें सोमवार आठ अगस्त को विदाई देगा। इस वजह से उस दिन शून्यकाल नहीं होगा ताकि विभिन्न दलों के सदस्य विदाई भाषण दे सकें। सभापति को विदा देने के अवसर पर प्रधानमंत्री, सदन के नेता एवं नेता प्रतिपक्ष एवं विभिन्न दलों के नेता निवर्तमान सभापति के कार्यकाल में उनके योगदान और भूमिका की चर्चा करते हैं।

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