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Vegetable Prices: पिछले साल के मुकाबले दोगुना महंगा हुआ टमाटर, एक महीने तक नहीं मिलेगी राहत

Mon, 10 Jul 2023 05:19 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 10 Jul 2023 05:19 PM IST
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सार
Vegetable Prices: एशिया की सबसे बड़ी फल-सब्जी मंडी आजादपुर के पूर्व चेयरमैन आदिल अहमद खान ने अमर उजाला को बताया कि टमाटर के रेट की इतनी ज्यादा बढ़ोतरी का कारण पेट्रोल-डीजल कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी और फसल कम पैदा होना है। लगभग पंद्रह-बीस दिन पहले यही टमाटर बाजार में 20 से 30 रुपये किलो के रेट से मिल रहा था...
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Vegetable Prices: Tomato has become twice expensive as compared to last year
Vegetable Prices - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

बारिश के सीजन में सब्जियों का महंगा होना कोई नई बात नहीं है। हर साल बारिश के सीजन में सब्जियों की आवक कमजोर पड़ जाती है और सब्जियों के दाम चढ़ जाते हैं। लेकिन पिछले साल की तुलना में इस साल टमाटर के रेट लगभग दोगुने हो गए हैं। पिछले साल इसी सीजन में आजादपुर सब्जी मंडी में टमाटर 40 से 60 रुपये में बिक रहा था, जो खुले बाजार में लोगों को 80 से 100 रुपये के बीच मिल रहा था। लेकिन इस साल मंडी में ही टमाटर की कीमत 60 से 100 रुपये किलो तक हो गया है जिससे खुदरा में इसकी कीमत 120 से 180 रुपये तक हो गई है। इस साल सब्जियों की कीमत में ज्यादा बढ़ोतरी का कारण क्या है?

यह भी पढ़ें: Vegetable Prices: क्या टमाटर के आसमान छूते दाम महंगाई दर पर डालेंगे असर, ये तीन सब्जियां बिगाड़ रहीं बजट

एशिया की सबसे बड़ी फल-सब्जी मंडी आजादपुर के पूर्व चेयरमैन आदिल अहमद खान ने अमर उजाला को बताया कि टमाटर के रेट की इतनी ज्यादा बढ़ोतरी का कारण पेट्रोल-डीजल कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी और फसल कम पैदा होना है। लगभग पंद्रह-बीस दिन पहले यही टमाटर बाजार में 20 से 30 रुपये किलो के रेट से मिल रहा था। लेकिन बारिश के कारण फसल की बाजार में पहुंच कम हो गई, जिससे कीमतों में अचानक बढ़ोतरी हो गई। बारिश ने खलल डालना बंद नहीं किया तो टमाटर सहित दूसरी सब्जियों की कीमत लगभग एक महीने तक ऊंची बनी रह सकती हैं।

बारिश से नष्ट हुई पौध

पिछले सीजन में किसानों को टमाटर के लिए दो से तीन रुपये तक कीमत मिल रही थी। किसानों की लागत भी नहीं निकल रही थी। यह एक कारण हो सकता है कि इस बार किसानों ने टमाटर की ज्यादा फसल नहीं बोई। दूसरा बड़ा कारण रहा कि इस साल मार्च-अप्रैल से लेकर मई तक में लगातार बीच-बीच में बारिश होती रही। टमाटर की जब पौध लगाई जाती है, तब ज्यादा पानी उनके लिए खतरनाक साबित होता है। इस बार किसानों की बहुत ज्यादा फसल ज्यादा पानी के कारण नष्ट हो गई।  

कम कीमत ने खराब किया बाजार 

पिछले साल किसानों को टमाटर के लिए दो-चार रुपये प्रति किलो का ही दाम मिल रहा था। ज्यादातर किसानों को लागत भी निकालना मुश्किल हो रहा था। यहां तक कि टमाटर की फसल तोड़कर आढ़ती तक पहुंचाने का दाम भी नहीं निकल रहा था। परेशान किसानों ने फसल को खेतों में ही सड़ने के लिए छोड़ दिया। इसका परिणाम हुआ कि इस बार किसानों ने टमाटर की कम पौध लगाई। जिससे मांग पूरी नहीं हो पा रही है।

अभी इसी साल लगभग एक महीने पहले बढ़िया प्रीमियम क्वॉलिटी का टमाटर 20 से 30 रुपये मिल रहा था। किसानों को इस साल भी दो से सात रुपये तक की कीमत मिल रही थी और किसान कम कीमतों के कारण परेशान थे। लेकिन अचानक भारी बारिश ने हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र की मंडियों से फसल की आवक रोक दी जिससे टमाटर के भाव बढ़ गए।

पेट्रोल-डीजल और श्रमिकों की लागत बढ़ी

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण सब्जियों की आवक महंगी हो गई है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी पल्लेदार श्रमिकों की दिहाड़ी कीमतों में आई है। लगभग साल भर पहले 300 से 400 रुपये में काम करने के लिए श्रमिक मिल जाते थे, लेकिन बढ़ती महंगाई से परेशान श्रमिकों ने भी अब ज्यादा कीमतें मांगना शुरू कर दिया है। एक दिन के लिए एक श्रमिक 500 से 600 रुपये मांगते हैं। इन सब बढ़ोतरियों के कारण सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

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