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Kavach: 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही थी वंदे भारत, 'कवच' ट्रायल के दौरान सिग्नल पर अपने आप रुकी
Fri, 16 Feb 2024 09:53 PM IST
कुमार विवेक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Fri, 16 Feb 2024 09:53 PM IST
सार
Kavach Trial: उत्तर मध्य रेलवे जोन के डिप्टी चीफ सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर कुश गुप्ता की देखरेख में मथुरा और पलवल के बीच सुबह 9:30 बजे कवच का ट्रायल शुरू हुआ। दोपहर 2 बजे तक अप और डाउन दोनों दिशाओं में पूरी कवायद दोहराई गई।
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Indian Railways: Ayodhya-Anand Vihar Vande Bharat Express
- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
आगरा रेलवे डिवीजन ने शुक्रवार को स्वदेशी रूप से विकसित टक्कर-रोधी उपकरण 'कवच' का ट्रायल किया। इस दौरान आठ डिब्बों वाली वंदे भारत ट्रेनों में लगाए गए स्वचालित ब्रेकिंग सिस्टम का सफल परीक्षण किया गया। अधिकारी ने कहा, "पहले परीक्षण में, लोको पायलट ने ब्रेक नहीं लगाए और फिर भी 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही ट्रेन रेड सिग्नल से 10 मीटर पहले स्वत: ही रुक गई।"
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आगरा रेल मंडल की जनसंपर्क अधिकारी प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि देशभर में वंदे भारत से चलने वाली सभी आठ डिब्बों वाली वंदे भारत ट्रेनों के लिए अब इस मानक को अनिवार्य कर दिया गया है। सभी वंदे भारत ट्रेनों में एक कवच प्रणाली लगी हुई है जो किसी भी कारण से लोको पायलट के विफल होने की स्थिति में अपने आप ब्रेक लगा सकती है।
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चूंकि इस प्रणाली के तहत स्टेशन कवच, आरएफआईडी टैग और पटरियों के साथ कवच टावरों को एक साथ काम करने की जरूरत है, इसलिए भारतीय रेलवे परिचालन सुरक्षा बढ़ाने के लिए अपने नेटवर्क में इन घटकों को लागू करने की प्रक्रिया में है।
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उत्तर मध्य रेलवे जोन के डिप्टी चीफ सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर कुश गुप्ता की देखरेख में मथुरा और पलवल के बीच सुबह 9:30 बजे ट्रायल शुरू हुआ और दोपहर 2 बजे तक अप और डाउन दोनों दिशाओं में पूरी कवायद दोहराई गई। श्रीवास्तव ने कहा कि यह कवायद अब 16 डिब्बों वाली वंदे भारत ट्रेनों के लिए की जाएगी। इस परीक्षण से पहले, गुप्ता की देखरेख में आगरा डिवीजन ने अन्य मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए 140 किमी प्रति घंटे और 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दो और कवच परीक्षण सफलतापूर्वक किए।
आगरा डिवीजन ने मथुरा (स्टेशन को छोड़कर) और पलवल के बीच 80 किलोमीटर की दूरी पर एक पूर्ण कवच नेटवर्क विकसित किया है। इसमें स्टेशन क्षेत्रों और अन्य स्थानों पर रेलवे पटरियों पर RFID टैग लगाना, स्टेशनों जैसे कई स्थानों पर स्थिर कवच इकाइयों की स्थापना और पटरियों के साथ टावरों और एंटेना की स्थापना शामिल है। अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा विकसित कवच प्रणाली, आपात स्थिति के दौरान जब ट्रेन चालक समय पर प्रतिकिया देने में विफल रहता है तो स्वचालित रूप से ब्रेक लगा सकती है।
आरडीएसओ अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली और आगरा के बीच तीन हिस्सों में 125 किलोमीटर का हिस्सा पूरे रेल नेटवर्क का एकमात्र खंड है जहां ट्रेनें 160 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति से चल सकती हैं। भारत में अन्य सभी खंडों पर ट्रेनें 130 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति से चलती हैं। अप्रैल 2016 में लॉन्च हुई भारत की पहली सेमी-हाई स्पीड ट्रेन गतिमान एक्सप्रेस के लिए यहां विशेष ट्रैक बिछाया गया था।