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वन संपदा की हानि: बारिश-बर्फबारी में कमी की वजह से धधक रहे हैं उत्तराखंड के जंगल

Wed, 07 Apr 2021 04:45 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 07 Apr 2021 04:45 AM IST
सार

  • भीषण आग के लिए इसे ही कारण मान रहे हैं विशेषज्ञ
  • कई वन अधिकारियों का मानना है कि गर्मी बढ़ने पर लगने वाली आग से बचाव के लिए वनकर्मी आग लगाते हैं, यह ‘कंट्रोल्ड बर्निंग’ ही अनियंत्रित हो गई है

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Uttarakhand Forest massive Fire expert says burning due to decrease in rain and snowfall
जंगल में आग बुझाते वनकर्मी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कमजोर मानसून के चलते हुई कम बारिश और बर्फबारी के चलते ऊंचे पहाड़ों पर बने सूखे जैसे हालात ही उत्तराखंड के जंगलों में लगी भीषण आग का कारण है। वन और पर्यावरण विशेषज्ञ भी इस बात को मान रहे हैं।

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विशेषज्ञों के मुताबिक, अमूमन मार्च-अप्रैल में पतझड़ के बाद ही जंगलों में आग लगती थी। इससे पहले पहाड़ों पर वर्षा और बर्फबारी की वजह से नमी रहती थी जो आग नहीं लगने देती थी। लेकिन इस साल उत्तराखंड में बहुत कम बारिश हुई और ऊंची पहाड़ियों पर बर्फबारी भी कम मात्रा में रही। इसीलिए अक्तूबर-नवंबर से ही पहाड़ी जंगलों में आग लगी हुई है, जो अब लगभग अनियंत्रित हो चुकी है। सरकार अब हेलिकॉप्टर के जरिए पानी गिराकर इसे बुझाने की कोशिश कर रही है, जिसके सफल होने की संभावना बेहद कम है।
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उत्तराखंड के पूर्व प्रमुख वन संरक्षक (पीसीसीएफ) आईडी पांडे कहते हैं कि हेलिकॉप्टर आग बुझाने के लिए अनुपयोगी साबित होगा। एक बार पानी डालने के बाद जब तक हेलिकॉप्टर दूसरी बार टिहरी झील से पानी लेकर आएगा, इतनी देर में आग पहले से ज्यादा भड़क जाएगी। दरअसल उत्तराखंड में मॉडर्न फॉरेस्ट फायर कंट्रोल प्रोजेक्ट के निदेशक रहे पांडे को तत्कालीन केंद्रीय पर्यावरण सचिव टीएन शेषन ने एक हवाई जहाज और एक हेलिकॉप्टर दिया था। हवाई जहाज से आग का पता लगाना था और हेलिकॉप्टर से पानी डालकर आग को बुझाना था। लेकिन यह प्रोजेक्ट तब विफल साबित हुआ था।
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अनियंत्रित हो गई है कंट्रोल्ड बर्निंग
कई वन अधिकारियों का मानना है कि गर्मी बढ़ने पर लगने वाली आग से बचाव के लिए वनकर्मी आग लगाते हैं। यह ‘कंट्रोल्ड बर्निंग’ ही अनियंत्रित हो गई है। उनके अनुसार, शिकारी पहाड़ी जंगल में नीचे से आग लगाते हैं, जो गर्म हवाओं के सहारे तेजी से ऊपर बढ़ती है। इसे उलट कंट्रोल्ड बर्निंग में आग चोटियों पर लगाई जाती है, जो धीरे-धीरे नीचे की ओर आती है। लेकिन मेहनत और पैसे बचाने के लिए कई बार वन कर्मी नीचे से आग लगा देते हैं, जो सूखी पत्तियों और गर्म हवा के सहारे अनियंत्रित हो जाती है।

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