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उत्तराखंड: नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से भाजपा को उम्मीद, नई बिसात बिछाने की कवायद

Sun, 14 Mar 2021 01:51 AM IST
योगेश साहू शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली।
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 14 Mar 2021 01:51 AM IST
सार

  • उम्र में जूनियर लेकिन राजनीति में त्रिवेन्द्र से सीनियर हैं तीरथ
  • गुरुपुत्र मनीष खंडूड़ी को हराकर पहुंचे हैं लोकसभा

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Uttarakhand: BJP hopes for new Chief Minister Tirath Singh Rawat, exercise to lay new board
tirath singh rawat - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के पास उत्तराखंड में भाजपा की जड़ें मजबूत करने और राज्य सरकार का इकबाल दुरुस्त करने के लिए केवल 9 महीने बचे हैं। लेकिन उन्हें भरोसा है कि वह भाजपा को निराश नहीं करेंगे। तीरथ सिंह रावत शपथ लेने के बाद से लगातार सक्रिय हैं। वह कुमाऊं और गढ़वाल में एक तालमेल बिठाने में लगे हैं। उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष के बदले जाने, मंत्रिमंडल के पुनर्गठन के साथ-साथ वह अन्य स्तरों पर बड़े बदलाव की तैयारी में हैं। बताते हैं कि मुख्यमंत्री की योजना राज्य में केंद्र और राज्य सरकार के कामकाज को तेजी से लागू करने और जनता के बीच में इसका सकारात्मक संदेश देने की है। इसके लिए वह बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादले और नौकरशाही की जिम्मेदारी में फेरबदल कर सकते हैं।

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उत्तराखंड के प्रभारी और वरिष्ठ भाजपा नेता दुष्यंत गौतम फिलहाल अपना पूरा ध्यान लगातार उत्तराखंड पर लगा रहे हैं। गौतम का मुख्य प्रयास राज्य में भाजपा नेताओं की गुटबाजी के असर से भाजपा को मुख्त करना है। प्रदेश सरकार में मंत्री सतपाल महाराज, डॉ.. हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल, अरविंद पांडे, पुष्कर धामी, गणेश जोशी जैसे चेहरों को शामिल करने के अपने माने हैं।  
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संगठन से लेकर सरकार के कामकाज का अनुभव है तीरथ के पास
तीरथ सिंह रावत लोगों के बीच में अपील करने वाले अपने स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। उन्हें बखूबी समझने वालों में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (रिटा.) भुवन चंद्र खंडूरी हैं। 86 वर्ष के बीसी खंडूरी ने अपने राजनीतिक जीवन में तीरथ सिंह रावत का न काफी ख्याल रखा, बल्कि उन्हें खूब आगे भी बढ़ाया। खंडूरी को तीरथ सिंह रावत का राजनीतिक गुरू भी कहा जाता है। यह भी दिलचस्प है कि तीरथ सिंह रावत 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार और गुरुपुत्र मनीष खंडूरी को 2 लाख 85 हजार से अधिक मतों से हराकर लोकसभा में पहुंचे। यह खंडूरी के लिए बड़ा धर्म संकट का समय था कि वह पुत्र या शिष्य में किसका साथ दें, लेकिन बताते हैं कि उनका आशीर्वाद शिष्य के लिए ही रहा। तीरथ सिंह रावत गढ़वाल क्षेत्र में जनता के बीच में अपनी अच्छी छवि रखते हैं। उन्हें भाजपा के संगठन और संघ तथा उसके अनुषांगिक संगठनों से अच्छे तालमेल के लिए जाना जाता है। खास बात यह भी है कि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत की तरह ही तीरथ भी संघ के प्रचारक से नेता और फिर मुख्यमंत्री बने हैं।
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त्रिवेंद्र से 4 साल छोटे, लेकिन अनुभव में कई साल बड़े हैं तीरथ
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र और वर्तमान मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत दोनों जमीन से उठे और अपने दम पर मुकाम बनाने वाले राजनेता हैं। उम्र के लिहाज से त्रिवेन्द्र तीरथ सिंह रावत से चार साल बड़े हैं। त्रिवेंद्र करीब 60 साल के हो चुके हैं। इसके समानांतर तीरथ सिंह रावत करीब 56 साल के हैं। त्रिवेंद्र तीरथ से राजनीतिक छलांग लगाने में आगे रहे। वह चार साल पहले मार्च 2017 विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत मिलने के बाद विधायक से सीधे मुख्यमंत्री बन गए। तीरथ सिंह रावत को यह पद 10 मार्च 2021 को मिला है। लेकिन 2000 में उत्तराखंड जब नए राज्य के रूप में बना था, तब तीरथ सिंह रावत राज्य के पहले शिक्षा मंत्री बनाए गए थे। तीरथ सिंह रावत 1997 में उ.प्र. विधान परिषद के लिए चुने गए थे। 2007 में भाजपा के प्रदेश महामंत्री, 2013 में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बने। तीरथ सिंह रावत छात्र राजनीति से ही सक्रिय रहे हैं। हेमवती नंदन गढ़वाल विश्वविद्यालय के वह छात्र संघ अध्यक्ष रहे हैं और वहां से संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भाजपा में लगातार राजनीतिक सफर तय किया है। 


कुछ महीने बाद राज्य में शुरू हो जाएगा चुनावी राजनीति का दौर
उत्तराखंड में भाजपा के मुकाबले में कांग्रेस है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने राज्य में पिछले एक साल से क्षेत्रीय और राजनीतिक स्तर पर गोट बिछाने का काम तेज कर दिया है। प्रीतम सिंह, इंदिरा हृदयेश समेत अन्य को लग रहा है कि 2022 विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड में कांग्रेस का लौटना लगभग तय है। राज्य की जनता भाजपा सरकार के कामकाज से तंग आ चुकी है। तीरथ सिंह रावत के सहयोगियों को भी लग रहा है कि इस हिसाब से चुनौती काफी बड़ी है, जबकि समय बहुत कम। ऐसे में तीरथ सिंह रावत के सामने त्रिवेंद्र रावत, धन सिंह रावत समेत अन्य के साथ तालमेल और कामकाजी समीकरण बनाने की चुनौती है। पौड़ी गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र में पार्टी की धमक बनाने की चुनौती के साथ-साथ जनता में विश्वास मजबूत करने का लक्ष्य है।


 

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